बाइडेन-हैरिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका दिवाली समारोह वास्तव में त्योहार की भावना को प्रतिबिंबित करे. यह न्याय और समता के बारे में है, केवल प्रतीकवाद के बारे में नहीं.
बात चाहे आर्थिक हालत की हो या फिर शिक्षा और रोजगार के अवसरों की — भारत में जाति ही इनको निर्धारित करने वाली धुरी बनी हुई है. जातिगत गैर-बराबरी की सच्चाई को समझने के लिए बिहार की ही तरह पूरे देश को एमआरआई की जरूरत है.
हाल के वर्षों में शेयर बाजार में सर्वश्रेष्ठ लाभ ‘लार्ज-कैप’ वाले शेयरों से नहीं ‘मिड-कैप’ और ‘स्माल-कैप’ वाली कंपनियों से मिला, जिनमें से कई को तो नाम से तुरंत पहचाना भी नहीं जाता.
जब ऐसा लग रहा था कि मध्य-पूर्व अमन की गहरी नींद में सोने लगा है, तभी वहां फिर से आग सुलगाकर हमास ने वहां के कई विरोधाभासों और इस्लामी दुनिया से जुड़े सवालों को उभार दिया है
1857 के विद्रोह के लिए 'निचली' जाति के अंसारी लोगों को दोषी ठहराने से लेकर उन्हें AMU में प्रवेश न देने तक, यूनिवर्सिटी के संस्थापक सैयद अहमद खान ने कई मौकों पर पसमांदाओं के साथ भेदभाव किया है.
यहां तक कि जो लोग यह घोषणा करते हैं कि विधानसभा चुनावों के इस दौर में बीजेपी अधिकांश राज्यों को हार जाएगी, वे भी इस बात से आश्वस्त हैं कि नरेंद्र मोदी लोकसभा में एक और कार्यकाल के लिए वापस आएंगे.
इज़रायल-फिलिस्तीन संघर्ष की जटिल और गहरी जड़ें मध्य-पूर्व में शांति मध्यस्थ के रूप में चीन की इच्छित भूमिका और महत्वाकांक्षाओं के लिए एक कठिन चुनौती पेश करती हैं.
नाहिद इस्लाम—युवा नेता और 2024 के प्रतिरोध आंदोलन का चेहरा, ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में सात महीने के छोटे कार्यकाल के बाद एनसीपी की स्थापना की.