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Tuesday, 31 March, 2026
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बीजेपी सरकार को समझना आसान है, बस आप वह किताबें पढ़ लीजिए जो कभी मोदी-नड्डा-शाह ने पढ़ी थीं

कांग्रेस की सरकारों और भाजपा सरकार में मूल अंतर विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता का ही है. विचारधारा कांग्रेस के नेतृत्व की नीतियों को तो दिशा देती थी मगर कभी उन पर राज नहीं करती थी. भाजपा में विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता कट्टरपंथी किस्म की है.

बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान को जब पद से हटा दिया वह नीतीश कुमार को दोबारा सीएम क्यों बनाएगी?

चंडीगढ़ मेयर चुनाव की घटना आज भारतीय राजनीति के बेतुकेपन को दर्शाती है.

बजट में लुभावने वादों से परहेज बताता है कि सरकार चुनावी जीत को लेकर बेफिक्र है

अंतरिम बजट में ‘पीएम किसान योजना’ के तहत दिए जाने वाले उपहार में दोगुना बढ़ोतरी की जा सकती थी. ऐसा नहीं करना बताता है कि भाजपा को अपनी जीत का पूरा भरोसा है; दूसरे, उसका मानना है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास जैसी चीजें ज्यादा कारगर होंगी

कांग्रेस ने हमेशा पिछड़े, दलितों और गरीबों के लिए काम किया, राहुल गांधी की पदयात्रा इसका ताज़ा उदाहरण है

कांग्रेस पार्टी के विरोधी जब कांग्रेस पर दलितों पिछड़ों आदिवासियों के हितों पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाते हैं तो वे इतिहास को भूल जाते हैं कि किन झंझावातों से कांग्रेस पार्टी जूझ रही थी.

राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा में 15 में 10 जजमान एससी, एसटी, ओबीसी होना सावरकरवादी हिंदुत्व है

भाजपा-आरएसएस द्वारा स्थापित की जा रही नई राजनीतिक हिंदू व्यवस्था हिंदू समाज में सुधार की निरंतरता है. जाति और ऊंच-नीच कायम हैं, लेकिन यह प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जाता है.

नीतीश कुमार को समर्थन देकर मोदी-शाह अपना 2020 का अधूरा एजेंडा पूरा कर रहे हैं

लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार भाजपा के लिए बेहद नाकारा हो जाएंगे. बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए भाजपा 2025 में अगले विधानसभा चुनाव का इंतज़ार नहीं करेगी.

भारत को कमतर करके देखना बंद करे चीन, इसके अपने स्कॉलर दिल्ली को ‘मजबूत’ कहते हैं

चीन सिर्फ भारत के इरादों को गलत नहीं समझ रहा है; यह ऐतिहासिक रूप से मैत्रीपूर्ण रिश्ते को शत्रुतापूर्ण रिश्ते में बदलकर एक रणनीतिक गलती कर रहा है, जिससे मौजूदा विश्वास की खाई और गहरी हो रही है.

भारतीय मुसलमानों को ‘मुस्लिम’ नेता की नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत जो धर्म के लेबल से ऊपर उठे

यह धारणा कि समुदायों का प्रतिनिधित्व उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि के नेताओं द्वारा किया जाना चाहिए, संविधान का खंडन करती है.

दक्षिण भारत हिंदी पट्टी से कम धार्मिक नहीं है, प्यू सर्वे ने उत्तर-दक्षिण विभाजन को खत्म कर दिया

प्यू के 2020-2021 सर्वे के अनुसार, रीति-रिवाजों में अंतर है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के संदर्भ में उत्तर-दक्षिण विभाजन का कोई सबूत नहीं है.

मुसलमानों को अपना कोई राम मोहन राय या आंबेडकर चाहिए, ‘हिंदू वामपंथी’ और लिबरल नेताओं को छोड़ें

अब तक मुसलमानों ने कभी भी हिंदुओं और उनके धर्म को समझने की कोशिश नहीं की. मुस्लिम शासकों को भारतीय जनता, संस्कृति, धर्म और इतिहास के प्रति कोई जिज्ञासा नहीं थी

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हरियाणा एक अप्रैल से रबी की खरीद के लिए तैयार: मंत्री

चंडीगढ़, 31 मार्च (भाषा) खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के राज्यमंत्री राजेश नागर ने मंगलवार को कहा कि हरियाणा रबी खरीद मौसम...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.