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Saturday, 11 April, 2026
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नेशनल इंट्रेस्ट

दो महाशक्तियों की खींचतान में भारत को खुद को ‘घास’ नहीं, बल्कि ‘खिलाड़ी’ साबित करना होगा

दो महाशक्तियों के इस व्यापार युद्ध ने सभी प्रभावित देशों के लिए संभावनाओं के दरवाजे खोल दिए हैं. ऐसे देशों में भारत सबसे बड़ा और सबसे निर्णायक देश है, उसे कोविड दौर वाले सुधारों को फिर से आगे बढ़ाना होगा.

ट्रंप के टैरिफ भारत के लिए सिर पर बंदूक तानने जैसा है, शायद यही अब तक की सबसे अच्छी बात है

ट्रंप जबकि गोली दागने की धमकी दे रहे हैं, अपनी पीठ खुद ठोकने में व्यस्त भारतीय सत्ता-तंत्र को सुर्खियां बनवाने के मोह से छुड़ाने के लिए ऐसी ही धमकी की जरूरत थी.

लाल बहादुर शास्त्री की 19 महीनों की विरासत, दूसरे की इमरजेंसी से ज्यादा प्रभावशाली साबित हो रही है

शास्त्री की विरासत पर ताशकंत में हुए शांति समझौते, और उनके उस जानलेवा दौरे का साया अनुचित रूप से हावी हो जाता है, जबकि ‘हरित क्रांति’ और प्रतिभाशाली वैज्ञानिक डॉ. स्वामीनाथन की खोज उनकी यादगार विरासतों में शामिल हैं.

कूटनीति या कमज़ोरी: भारतीय सेना की वास्तविक स्थिति को उजागर करता यह कॉलम…

राजीव गांधी को बोफोर्स आदि के लिए कोसना फैशन बन गया है लेकिन सच यह है कि हमारे इतिहास में सिर्फ 1985-89 वाला दौर ही ऐसा था जब हथियारों की खरीद भविष्य के मद्देनजर आगे बढ़कर की गई.

मिनिमम ट्रंप, मैक्सिमम मोदी—अमेरिका अफसरशाही को कमजोर कर रहा है, मोदी इसे सशक्त बना रहे हैं

ट्रंप ऐसे बागी हैं जो सरकारी बाबू को एक बुराई के रूप में देखते हैं. मोदी के लिए ये सरकारी बाबू निरंतरता, परिवर्तन और निष्ठा के प्रतीक हैं.

ट्रंप ने परमाणु हथियारों को फिर महान बना दिया, सहयोगियों पर ताने कसने, सौदे से नए WMD की होड़ शुरू होगी

मुक्त व्यापार, वैश्वीकरण पर ध्यान दीजिए; केवल यूक्रेन और गाज़ा ही ऐसे मसले नहीं हैं जो भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं. हकीकत यह है कि ट्रंप ने परमाणु अप्रसार के विचार की हत्या करके उसे दफन कर दिया है. परमाणु हथियार फिर से युद्ध-प्रतिरोधक बन गए हैं.

‘डीप स्टेट’ और ‘नॉन-स्टेट एक्टर’ बहस का मुद्दा हो सकते हैं, मगर असली खेल ‘शैलो स्टेट’ खेलता है

तमाम लोकतांत्रिक देशों में ‘डीप स्टेट’ आज साजिश के आरोपों को जन्म दे रहा है. इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई और अब भारत भी इसमें तेजी से आगे बढ़ रहा है. कई यूरोपीय देश भी इस कारवां में शामिल हो रहे हैं.

केजरीवाल की विचारधारा मुक्त राजनीति का दौर खत्म, INDIA में होने और कांग्रेस को निशाना बनाने का विरोधाभास

केजरीवाल और ‘आप’ समाप्त नहीं, तो ध्वस्त तो हो ही चुके हैं. वैसे, हारने के बाद भी उनके पास अभी पंजाब जैसा बड़ा राज्य है, दिल्ली का नगर निगम है और 43 प्रतिशत वोट हैं.

मैं मूर्ति-सुब्रह्मण्यम से सहमत हूं: कामयाबी 9-5 से परे है, लेकिन लंबी शिफ्ट के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता

कॉर्पोरेट वालों की मलामत करना आसान है. लेकिन अपने उद्यमियों, संपदा और रोजगार पैदा करने वालों को प्यार और सम्मान न देने वाला समाज निम्न-मध्यवर्गीय आय के खांचे में ही अटके रहने को अभिशप्त होता है.

मिडिल क्लास मोदी का आदी, धीमा विकास, रुके हुए सुधार और टैक्स का भार कोई मायने नहीं रखते

भारतीय मध्यम वर्ग इस बात से नाराज है कि राजनीतिक दल उनके टैक्स का पैसा लेकर उसे गरीब वर्गों में फैलाकर उनके वोट खरीद रहे हैं.

मत-विमत

दुनिया तेजी से बदल रही है—भारत को खुद को सुधारना, मजबूत करना और आर्थिक ताकत बढ़ानी चाहिए

आज निरंतर बदलती विश्व व्यवस्था भारत के लिए एक मौका उपलब्ध करा रही है जिसका लाभ उठाने के लिए उसे खुद को अनुशासित रखना होगा ताकि पाकिस्तान जब अपने लिए मौका देख रहा है तब हम हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया न कर बैठें.

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राजनीति

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उप्र : देवबंद में एटीएस की कार्रवाई, भड़काऊ पोस्ट साझा करने के आरोप में मुफ्ती गिरफ्तार

सहारनपुर, 11 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ और आपत्तिजनक सामग्री साझा करने तथा पाकिस्तान...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.