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Tuesday, 13 January, 2026
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नेशनल इंट्रेस्ट

क्यों लुटा हिंदू कारवां, और क्या है भारतीय सेक्युलरवाद का भविष्य

भारत में धर्मनिरपेक्षता का ठेका लंबे समय से 14 फीसदी मुसलमानों के जिम्मे रहा है लेकिन अब समय आ गया है कि इसकी ज़िम्मेदारी हिंदुओं को संभाल लेनी चाहिए.

मोदी-BJP चाहती है कि मुसलमान उनकी शर्तों पर चलें, राजनीतिक चुनौती देने के लिए 3 शर्तें जरूरी

फिलहाल अजेय दिख रही भाजपा क्या यह चाहती है कि देश की करीब 15 फीसदी आबादी को उसकी आस्था के कारण अलग-थलग कर दिया जाए? यह तो भारतीय लोकतंत्र को कमजोर ही करेगा.

क्या मुझे ऑल्ट न्यूज़ के ज़ुबैर से कोई शिकायत है? इसके 3 जवाब हैं- नहीं, नहीं और हां

किसी को अपने विचारों के लिए जेल में नहीं डाला जाना चाहिए, न उस पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए. खासकर उन विचारों के लिए जो केवल सोशल मीडिया पर जाहिर किए गए हों.

महाराष्ट्र में चला सियासी खेल नैतिक और राजनीतिक से कहीं ज्यादा वैचारिक है

बाल ठाकरे कुछ भी कर सकते थे, घंटे भर में अपनी दिशा बदल सकते थे. अगर वे यह चाहते थे कि ठाकरे कुनबा औपचारिक सत्ता से अलग रहे तो इसकी भी एक वजह थी.

मोदी सरकार की हैरत में डालने वाली आदत ही ‘अग्निपथ’ जैसे जरूरी सुधार के लिए बनी चुनौती

मोदी सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी यह रही है कि वह चुनावी बहुमत की सीमाओं को स्वीकार करने से कतराती है, जिस वजह से भूमि कानून, कृषि कानून का कबाड़ा हो गया, श्रम संबंधी नियम लागू न हो पाए

‘वर्दी वाले तानाशाह कभी मरते नहीं’: मुशर्रफ ने पाकिस्तान के लिए विनाशकारी विरासत बनाई है

बेनज़ीर की हत्या, भारत पर 26/11 के हमले, एबटाबाद में अमेरिकी सैनिकों के हमले में लादेन की मौत— जनरल मुशर्रफ़ के राज में हुई इन वारदात ने पाकिस्तान को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया लेकिन वे खुद को लोकतांत्रिक मानते रहे.

मोदी सरकार की कश्मीर नीति सफल रही, असफल रही या वही है जो पहले थी

मोदी सरकार की कश्मीर नीति राज्य का स्टेटस बदलने और इस बात का निर्धारण करने में सफल रही है कि किस पर बात होगी और किस पर नहीं लेकिन इससे आतंकवाद का खात्मा हो जाएगा यह खयाली पुलाव है.

यूक्रेन को हार मानने की सलाह देने वाले जरा इस काल्पनिक युद्ध के खेल को खेलकर देखें

विश्व व्यवस्था बदल रही है और हर देश भारत को खुश करने में जुटा है जिसके कारण अब तक तो भारत के लिए अकल्पनीय आर्थिक, रणनीतिक और सैन्य संभावनाएं उभरती रही हैं, अब भारत के ऊपर है कि वह इनका कैसे लाभ उठाता है.

मंदिर या मस्जिद? नए सर्वे की जरूरत नहीं, बस सच्चाई को स्वीकार कर सुलह की ओर बढ़ें

यह तो निर्विवाद तथ्य है कि मंदिर तोड़े गए और मस्जिदें बनाई गईं, अब उस इतिहास को बदला नहीं जा सकता लेकिन सौहार्द पर विचार करने से पहले हम अतीत की गलतियों से इनकार नहीं कर सकते.

एंबेसडर कार की तरह कांग्रेस पर भी अस्तित्व का संकट, नया मॉडल नहीं नया ब्रांड लाने से सुधरेगी हालत

पुरानी एंबेसडर कार की तरह कांग्रेस ने भी खुद को नये अवतार में ढालने की कई नाकाम कोशिशें की लेकिन उसे अपने शानदार अतीत से आगे बढ़कर कुछ ऐसा करना पड़ेगा जो भविष्य के लिए उम्मीदें जगाता हो.

मत-विमत

जेन-Z आंदोलन के बाद फिर पुरानी राजनीति, नेपाल की पार्टियां ‘स्टार्टिंग पॉइंट’ पर लौटीं

एक स्थिर नेपाल के लिए आगे का रास्ता लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, समावेशी संवाद के जरिए राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने में है.

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जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के पॉलीट्रॉमा गहन चिकित्सा इकाई में भरा पानी

जयपुर, 13 जनवरी (भाषा) जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के पॉलीट्रॉमा गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) के पास सोमवार देर रात पाइप से पानी का...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.