पता चला है कि अहमदाबाद के सभी मुर्दाघरों में शवों को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है. कोल्ड स्टोरेज केवल कुछ अस्पतालों में ही उपलब्ध है, और वह भी सीमित क्षमता में.
मुझे लिखित संदेश मिला कि कानू सान्याल अपना ‘प्रतिनिधिमंडल’ मेरे पास भेजना चाहते हैं. उम्मीद की जा रही थी कि अपने उग्र समर्थकों के साथ आ रहे दुबले-पतले गुस्सैल बूढ़े आदमी के साथ बेहद तीखी मुठभेड़ होगी.