Monday, 6 December, 2021
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भारत को और ज्यादा निजी बीमा कंपनियों की जरूरत, कोविड ने सरकार को इसे पूरा करने का मौका दिया है

ज्यादा खिलाड़ी बाज़ार को और ज्यादा प्रतिस्पर्द्धी बनाएंगे क्योंकि वे ग्राहकों के लिए आसान और कम लागत वाली बीमा योजनाएं पेश करने की होड़ करेंगे.

1991 के सुधारों के दायरे में बैंकिंग और वित्त क्षेत्र नहीं आए इसलिए अर्थव्यवस्था एक टांग पर चलने को मजबूर हुई

बैंकिंग पर प्रतिबंधों के कारण नये उद्यमियों के लिए संसाधन तक पहुंच हुई सीमित, पुराने इलीट हावी रहे लेकिन अब तो इस सब से मुक्त होना चाहिए.

सुधारों के लिए भारत को संकट का इंतजार था, जो नेहरू-इंदिरा के सोवियत मॉडल के चलते 1991 में आया

भारत में केंद्र द्वारा नियोजित अर्थव्यवस्था की शुरुआत 1950 के दशक में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अधीन हुई थी लेकिन 1991 में आकर वह अचानक चरमरा गई और देश भारी संकट में फंस गया.

कोविड संकट के मद्देनजर क्रेडिट रेटिंग फर्मों को अपने तौर-तरीकों पर फिर से विचार करने और बदलने की जरूरत है

कोविड की दूसरी लहर के बाद भारत की आर्थिक स्थिति में सुधार की धीमी गति के मद्देनजर रेटिंग एजेंसियों ने उसकी संभावित वृद्धि दर में कटौती की है. ऐसा लगता है कि सरकार जो भी कदम उठा रही है उसे भी ये एजेंसियां खारिज कर देंगी.

कोविड राहत पैकेज की घोषणा में मोदी सरकार ने काफी सावधानी क्यों बरती?

वित्त मंत्री ने पिछले दिनों जिस राहत पैकेज की घोषणा की उससे संकेत मिलता है कि सरकार की नज़र वित्तीय घाटे पर भी है.

मुद्रा संकट के डर से विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाते रहने के उलटे नतीजे भी मिल सकते हैं

रिजर्व बैंक के पास अब 608 अरब डॉलर का भंडार जमा हो गया है और भारत दुनिया में सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाला पांचवां देश बन गया है लेकिन यह अंततः रुपये को कमजोर ही करेगा.

महंगाई कुछ कम होगी- 5 कारण जिनकी वजह से आपको ऊंची कीमतों के बारे में ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए

महंगाई का मई का आंकड़ा कुछ दोषपूर्ण था, इसमें तेजी विश्व बाज़ार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, जींसों की कीमतों में वृद्धि और सप्लाइ में अड़चनों के कारण आई थी.

सिकुड़ते बजट के कारण भारतीय परिवारों को लेना पड़ रहा है उधार, वैक्सीनेशन में तेजी से हालत सुधर सकती है

रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि सोना गिरवी रखकर उधार लेने के आंकड़े तेजी से बढ़े हैं, दूसरे संकेतक भी यही दर्शा रहे हैं; कर्ज उपलब्ध कराना तो ठीक है लेकिन टीकाकरण को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है.

GDP के आंकड़े अर्थव्यवस्था में सुधार दिखा रहे हैं, लेकिन मुख्य बात है वैक्सिनेशन में तेजी लाना

कोविड के नये मामलों में कमी और लॉकडाउन में धीरे-धीरे छूट देने से अगले कुछ महीने में मांग में सुधार आएगा, कुछ साप्ताहिक सूचकांक आर्थिक गतिविधियों में गति आने के संकेत दे भी रहे हैं.

कोविड से जूझती मोदी सरकार को राहत की जरूरत, RBI को अपने सरप्लस फंड से और धन ट्रांसफर करना चाहिए

आरबीआई ने आपातकालीन निधि के प्रावधान के तौर पर 20,000 करोड़ रुपये अपने पास रखे हैं. इससे भारी राजकोषीय दबाव की स्थिति में मोदी सरकार को और मदद मिल सकती थी.

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