Monday, 6 December, 2021
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चार बातें, जो तय करेंगी कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोविड की दूसरी लहर के झटके से कैसे उबरेगी

चालू लॉकडाउन, आशंकाएं और अनिश्चितता आर्थिक वृद्धि दर को नीचे खींच रही हैं लेकिन महामारी की दूसरी लहर जब शांत पड़ने लगी है तब अगली तिमाही में आर्थिक कारोबार में सुधार की उम्मीद जागने लगी है.

तमाम संकेतकों में गिरावट, उम्मीद से कम वृद्धि दर- कोविड की इस लहर ने अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित किया

उम्मीद है भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले साल के मुकाबले इस साल बेहतर हाल में रहेगी लेकिन कोविड की दूसरी लहर से पहले वृद्धि दर 13% से ज्यादा रहने का जो अनुमान लगाया जा रहा था उसकी जगह यह दर 11% या उससे नीचे ही रह सकती है.

कोविड की मार खाई इकोनॉमी की मदद के लिए RBI ने की अच्छी शुरुआत, अब बैंकों की आगे आने की बारी

रिजर्व बैंक ने छोटे ऋण लेने वालों और असंगठित क्षेत्र की इकाइयों को केंद्र में रखकर कदम उठाए हैं, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की जरूरतों को भी पूरा करने की कोशिश की है लेकिन असली बात तो यह है कि  उपायों को कितनी गंभीरता से लागू किया जाता है    

कोविड वैक्सीन अब सबकी पहुंच में होगा इसलिए यह अब सभी तरह की हिचक तोड़ने का समय है

1 मई से वैक्सीन की मांग और आपूर्ति केंद्र सरकार के काबू में नहीं रह जाएगी, कोई भी वयस्क वैक्सीन लगवाने का फैसला कर सकता है, और सभी राज्यों तथा संस्थाओं को वैक्सीन खरीदने की छूट होगी.

Covid के गहराते संकट के बीच ऊंची महंगाई दर क्यों भारत की अगली बड़ी चिंता हो सकती है

ऊंची वैश्विक मुद्रास्फीति, वस्तुओं के बढ़ते दाम, कमज़ोर रुपया और स्थानीय लॉकडाउन्स, क़ीमतों को बढ़ा सकते हैं.

मोदी सरकार का विदेशी टीकों को अनुमति देना अच्छा कदम, इसके कई आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी फायदे हैं

टीकाकरण की मौजूदा गति से तो भारत में पूरी आबादी को कवर करने में 2 साल का समय लगेगा. नए टीके यह प्रक्रिया तेज कर सकते हैं और साथ ही इनके अन्य फायदे भी हैं.

RBI के सामने दोहरी चुनौती, सरकार पर ब्याज के बोझ को कम करे या महंगाई पर लगाम लगाए

सरकार पर ब्याज के बोझ को कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने ‘जी-एसएपी’ नाम का नया उपाय किया है लेकिन मुद्रास्फीति में वृद्धि के खतरे के मद्देनज़र महंगाई पर लगाम लगाने के लिए उसे ब्याज दरें बढ़ानी भी होगी.

क्यों मुद्रास्फीति टार्गेटिंग फ्रेमवर्क को बनाए रखने का मोदी सरकार का फैसला ठीक है

मुद्रास्फीति को लेकर अपेक्षाओं को मजबूत आधार देने के लिए जरूरी है कि मुद्रास्फीति के लक्ष्य को 4 प्रतिशत पर बनाए रखा जाए.

तेज ग्रोथ, तीव्र अस्थिरता— भारतीय अर्थव्यवस्था नए वित्तीय वर्ष में क्या उम्मीद कर सकती है

भारत और विदेशों में जिस तरह कोविड-19 की लहर के बाद लहर आ रही है, यह साल अच्छी और बुरी खबरों का गवाह बनता रहेगा, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता की स्थिति बनी रह सकती है.

विकास वित्त संस्थान जो फिर स्थापित हुआ है, मोदी सरकार इस बार कैसे उसे सफल बना सकती है

इन्फ्रास्ट्रक्चर की परियोजनाओं के लिए पैसे देने की ताकत खो चुके हैं बैंक, इसलिए अब डीएफआई फिर से चलन में है. उसके अंतर्गत इन परियोजनाओं के लिए 3 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य है.

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नागालैंड में हत्याओं के बाद पूर्वोत्तर में AFSPA हटाने की मांग ने फिर पकड़ा जोर

‘मणिपुर वीमेन गन सर्वाइवर्स नेटवर्क’ और ‘ग्लोबल अलायंस ऑफ इंडिजिनस पीपल्स’ की संस्थापक बिनालक्ष्मी नेप्राम ने आफस्पा को 'औपनिवेशिक कानून' बताते हुए कहा कि यह सुरक्षा बलों को 'हत्या करने का लाइसेंस' देता है.

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‘फ्री स्पीच चैंपियन’ ममता का बीता हुआ कल और मोदी मुक्का मारने के बजाए चबाने का मज़ा लेते हैं

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए पूरे दिन के सबसे अच्छे कार्टून