लॉन्ग कोविड के थकान जैसे लक्षणों का संबंध संक्रमण की गंभीरता से जोड़ा जाता है, लेकिन टिन्निटस–कानों में लगातार गूंज- उन लोगों को भी सता रही है जिन्हें पहली और दूसरी लहर में हल्की बीमारी थी.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 49 दिन के बाद देश में कोविड के उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर दो लाख से कम रह गई है.
राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग कहता है कि पंजीकृत आईएसएम चिकित्सकों को बदनाम करना, उन कानूनों का उल्लंघन है जो डॉक्टरी करने के अधिकार की रक्षा करते हैं.
मंत्रालय ने आगे कहा, पिछले 24 घंटों में 60,298 मरीज ठीक हुए हैं और महामारी की शुरुआत के बाद से अब तक ठीक हुए मरीजों की कुल संख्या 4,20,37,536 है. भारत का ठीक होने की दर 98.21 प्रतिशत है.
इस कथन में कहा गया है, 'आपमें से जिन्होंने टीके की तीसरी खुराक ली है, जाइये और अपनी एड्स की जांच करवाइये. नतीजे आपको चौंका सकते हैं. इसके बाद आप अपनी सरकार पर मुकदमा कीजिये.'
फाइजर के शोधकर्ताओं ने बिना टीकाकरण वाले ऐसे कोविड मरीजों के बीच 2/3 क्लीनिकल ट्रायल किया, जिनमें बीमारी के लक्षण थे लेकिन वे अस्पताल में भर्ती नहीं हुए और उनकी स्थिति गंभीर होने का जोखिम ज्यादा था.
सिकल सेल एनीमिया रक्त से जुड़ी एक आनुवंशिक बीमारी है जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं अर्धचंद्राकार हो जाती हैं. इसकी वजह से लगातार संक्रमण होता है, हाथों और पैरों में सूजन, दर्द, थकान रहती है और किशोरावस्था के लक्षण देरी से आते हैं.