स्टडीज़ के मुताबिक में पाया गया था कि महामारी के दौरान खाने-पीने के खतरनाक तौर-तरीके और अन्य स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार की वजह से लोगों के मोटापे में वृद्धि हुई थी.
आम धारणा है कि कभी-कभार या फिर रोजाना एक-दो पैग ले लेने में कोई बुराई नहीं है. लेकिन सेहतमंद बने रहने के लिए अपनाए जाने वाली खान-पान संबंधी ग्लोबल दिशा-निर्देशों में इसे शामिल नहीं किया जा सकता है.
कोविड के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में AI एक महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आया. दूसरी लहर में अस्पतालों ने इसका इस्तेमाल फेफड़ों को हुए नुकसान का पता लगाने के लिए किया. अब ये तकनीक सिर्फ रेडियोलॉजी तक सीमित नहीं रही है. कई बीमारियों की जांच और रोकथाम में ये एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
सरकार कोर्बेवैक्स के लिए सुरक्षा और प्रभावकारिता डेटा की उपलब्धता और इस सवाल पर प्रतिक्रिया दे रही थी, कि क्या इसका पियर रिव्यू किया गया था. उसने प्रभावकारिता और पियर रिव्यू के सवालों को नज़रअंदाज़ कर दिया.
भारत की नियामक अथॉरिटीज़ ने ज़ाइडस लाइफ साइंसेज़ (जो पहले कैडिला हेल्थकेयर नाम से जानी जाती थी) की ज़ाइकोव-डी को 12 वर्ष से बड़े बच्चों के लिए स्वीकृति दे दी है लेकिन वैक्सीन अभी देश के बाज़ार में नहीं आई है.
रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया का कहना है कि यह कदम भारत को प्रमुख दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा. अभी तक अधिकांश कच्चा माल चीन से आयात किया जाता था.