महामारी विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. समीरन पांडा ने दिप्रिंट को बताया कि ICMR अपने सभी शोध निष्कर्षों को प्रकाशित करता है, जिसमें Covaxin डाटा शामिल है.
ये सीरो-प्रचलन स्टडी तीन अलग अलग प्रतिष्ठानों के शोधकर्ताओं द्वारा - जिनमें लांज़ू यूनिवर्सिटी और वूहान यूनिवर्सिटी शामिल हैं- मार्च से मई 2020 के बीच की गई.
स्वास्थ्य कर्मियों और कोविड-19 के खिलाफ फ्रंटलाइन वर्कर्स के बाद 50 वर्ष से अधिक आयु के करीब 27 करोड़ व्यक्तियों और अन्य बीमारियों से ग्रसित 50 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों का वैक्सीनेशन शुरुआती चरण में ही किया जाएगा.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा टीकों को प्राथमिकता के आधार पर उन देशवासियों को देने में सक्षम होंगे जिन्हें सरकारी एवं निजी क्षेत्र में खतरा है. सरकार पहले ही इसकी योजना को सार्वजनिक कर चुकी है.
दिप्रिंट के ‘ऑफ द कफ़’ में शेखर मांडे कोविड-19 के लिए भारत के गणितीय सुपरमॉडल, कम आय और अधिक आय वाले देशों पर महामारी के असर, और ‘फेलूदा’ के बारे में बात करते हैं.
हैदराबाद और चंडीगढ़ के अस्पतालों में काम कर रहे वैज्ञानिकों ने वार्ड में मौजूद हवा के नमूना का उपयोग किया जो वायरस कणों को इकट्ठा कर सकता है, और फिर आरटी-पीसीआर का उपयोग करके उनकी मौजूदगी को देखा.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि वह लगभग सात दिनों के भीतर कोविड-19 टीके को उपलब्ध कराने के लिए तैयार है लेकिन टीके की शुरूआत की तारीख पर अंतिम फैसला अभी लिया जाना है.
कोविशील्ड को मंजूरी की शर्तों के बारे में पूछे जाने पर पूनावाला ने दिप्रिंट को बताया, ‘(भारत में वैक्सीन की मंजूरी के लिए) शर्त केवल यही है कि हम इसे अभी निजी बाजार में बेच या निर्यात नहीं कर सकते हैं.’
कोविन एप को फिलहाल सार्वजनिक तो नहीं किया गया है लेकिन यह सिविल सेवकों से लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली प्रबंधक, वैक्सीनेटर और संभावित लाभार्थी तक हर स्तर के यूजर के लिए बहुत उपयोगी है.
लोकतंत्र की ‘रेटिंग’ करना एक जोखिम भरा काम है. मैं केवल इस सीधी-सी कसौटी को लागू करता हूं—कहां सबसे शांतिपूर्वक तथा सामान्य ढंग से राजनीतिक सत्ता का निरंतरता के साथ बदलाव होता रहा है.