लोकलसर्कल्स द्वारा संचालित सर्वे में 17,000 लोगों ने भाग लिया. वैक्सीन को लेकर हिचिकचाहट के संबंध में प्रतिकूल प्रभावों और वैक्सीन की प्रभावशीलता पर शंकाएं भी ज़ाहिर की गयी.
कई संस्थान और विशेषज्ञ इसे एक प्रभावकारिता परीक्षण के तौर पर देखने की वकालत करते हैं जो टीकों के प्रति भरोसा बढ़ाने में मददगार होगा, खासकर भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के लिए जो ट्रायल के तीसरे चरण में है.
महामारी की एक वर्ष की अवधि में सामने आए तमाम अहम वैज्ञानिक साक्ष्य इस तरफ इशारा करते हैं कि कोविड-19 का संक्रमण सतह को छूने की तुलना में हवा में मौजूद होने के कारण ज्यादा फैलता है.
सीमित स्टॉक और ज्यादा जोखिम वाले लोगों के तत्काल टीकाकरण की जरूरत जैसे कई फैक्टर काफी मायने रखते हैं जिससे वह स्थिति आने में वक्त लगेगा जब कोई भी अपने नजदीकी स्टोर से टीके की खुराक ले सकेगा.
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटे में 137 लोगों की मौत होने से मृतक संख्या बढ़कर 1,52,556 पर पहुंच गई. संक्रमण से एक दिन में मरने वालों की संख्या भी बीते करीब आठ महीने में सबसे कम है.
सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि रक्त समूह ‘ओ’ वाले लोग संक्रमण के प्रति कम संवेदनशील हो सकते हैं, जबकि 'बी' और 'एबी' रक्त समूह वाले लोग अधिक जोखिम में हो सकते हैं.
जोखिम खत्म नहीं हुआ है. इसका रूप बदल गया है—यह नॉन-परफॉर्मिंग लोन की वजह से बैलेंस शीट पर दबाव से हटकर तेजी से बढ़ते डिजिटल सिस्टम को संभालने की ऑपरेशनल चुनौतियों में बदल गया है.