अश्विनी कुमार चौबे ने राज्यसभा को मंगलवार को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह आंकड़े 22 जनवरी तक राज्यों से मिली सूचनाओं पर आधारित हैं.
यद्यपि पिछले वर्ष के आवंटन से तुलना करें तो यह बढ़ोतरी काफी अधिक है, इसके बावजूद यह राशि बहुत कम करीब 124 करोड़ रुपये ही है. फार्मा उद्योग ने इस वृद्धि को ‘मात्र एक औपचारिकता’ करार दिया है.
आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 में चेतावनी दी गई है, कि कोविड जैसी संक्रामक बीमारियों पर, बहुत ज़्यादा संसाधन न लगाए जाएं, चूंकि ग़ैर-संक्रामक बीमारियां अभी भी, सबसे ज़्यादा जानें लेती हैं.
भारत की टीकाकरण रणनीति चतुराई से डिजाइन की हुई है, और दूसरी लहर से निपटने में, ये स्वास्थ्य देखभाल में लगे कर्मियों को मज़बूत करेगी, ये कहना है डॉ वी रवि का, जो निमहंस में बेसिक साइंसेज़ के पूर्व डीन हैं.
कोवैक्सीन उन लोगों के लिए मना है, जो ख़ून पतला करने की दवा लेते हैं, जबकि कोविशील्ड लेने वालों को डॉक्टर को बताने के लिए कहा जाता है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इस मनाही का कोई औचित्य नहीं है.
पीएम-जे का 60 प्रतिशत संभावित आर्थिक आधार इन्हीं तीन राज्यों में है. इस योजना को सरकार से वित्त पोषित, दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम बताया जा रहा है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अबतक 1,03,45,985 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं. संक्रमण मुक्त होने का राष्ट्रीय औसत 96.90 हो गया है. मृत्यु दर 1.44 प्रतिशत है.