आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 में चेतावनी दी गई है, कि कोविड जैसी संक्रामक बीमारियों पर, बहुत ज़्यादा संसाधन न लगाए जाएं, चूंकि ग़ैर-संक्रामक बीमारियां अभी भी, सबसे ज़्यादा जानें लेती हैं.
भारत की टीकाकरण रणनीति चतुराई से डिजाइन की हुई है, और दूसरी लहर से निपटने में, ये स्वास्थ्य देखभाल में लगे कर्मियों को मज़बूत करेगी, ये कहना है डॉ वी रवि का, जो निमहंस में बेसिक साइंसेज़ के पूर्व डीन हैं.
कोवैक्सीन उन लोगों के लिए मना है, जो ख़ून पतला करने की दवा लेते हैं, जबकि कोविशील्ड लेने वालों को डॉक्टर को बताने के लिए कहा जाता है. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इस मनाही का कोई औचित्य नहीं है.
पीएम-जे का 60 प्रतिशत संभावित आर्थिक आधार इन्हीं तीन राज्यों में है. इस योजना को सरकार से वित्त पोषित, दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम बताया जा रहा है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अबतक 1,03,45,985 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं. संक्रमण मुक्त होने का राष्ट्रीय औसत 96.90 हो गया है. मृत्यु दर 1.44 प्रतिशत है.
जब महामारी ने भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमताओं से पूरी तरह से कसौटी पर कस दिया है, मोदी सरकार को स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय जरूरतों और आर्थिक हालात की वास्तविकता के बीच एक अच्छा संतुलन बनाना पड़ सकता है.
पिछले महीने इसके नतीजों का एक प्री-प्रिंट जारी किया गया, जिससे पता चला कि ट्रायल में, वैक्सीन के तीनों फार्मूलों के नतीजे में मज़बूत इम्यून रेस्पॉन्स पैदा हुए.
यह घटना एक असहज लेकिन संवैधानिक रूप से सामान्य बात को सामने लाती है: जम्मू-कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक हैं. उनकी सुरक्षा क्षेत्रीय है, न कि "सभ्यतागत."