मुजफ्फरनगर के अतुल कुमार को आईआईटी धनबाद में दाखिले के लिए झारखंड और मद्रास हाई कोर्ट के अलावा सुप्रीम कोर्ट से भी गुजरना पड़ा क्योंकि वे 17,500 रुपये की फीस भरने की समय सीमा पूरी होने से महज़ कुछ सेकंड से चूक गए थे.
छात्रों ने मीडिया से बात की, लेकिन छाते के पीछे छिपकर. वह मुश्किल स्थिति में हैं — कॉलेज अधिकारियों के गुस्से से बचते हुए सरकार के सामने अपनी चिंताएं व्यक्त करने की कोशिश कर रहे हैं.
राजस्थान के 17 नए जिलों के गठन के एक साल बाद, वो भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक युद्ध का मैदान बन गए हैं, लेकिन रिव्यू पैनल की रिपोर्ट पर कार्रवाई अभी भी लंबित है.
थ्री आर्ट्स क्लब द्वारा बलराज साहनी की 1972 की आत्मकथा, 'फ्लैशबैक: द स्टोरी ऑफ बलराज साहनी' का नाट्य वाचन न सिर्फ एक प्रेमपूर्ण श्रद्धांजलि है बल्कि यह याद दिलाता है कि लोगों की समझ किस तरह वास्तविकता से बहुत अलग हो सकती है.
दस-वर्षीय अभिनव अरोड़ा के शिक्षक उन्हें खाली समय में भजन गाने के लिए कहते हैं. उनकी कक्षा का हर बच्चा उनके साथ बैठना चाहता है — उन्हें रोस्टर बनाना पड़ता है.
कटारा कोई वीआईपी नहीं हैं, लेकिन अब उनकी ज़िंदगी हाई-लेवल सुरक्षा के घेरे में है और पुलिस अधिकारी उनके फोन में स्पीड डायल पर हैं. उनकी कहानी बताती है कि भारत में हत्या के गवाह आगे आने से क्यों कतराते हैं.
ज्यादातर स्टूडेंट्स गौतम कुमार को नहीं जानते थे क्योंकि नया शैक्षणिक वर्ष अभी एक महीने पहले ही शुरू हुआ था, लेकिन उनकी मौत ने गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी में इस विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया है.
21 सालों में जेपीएससी ने सिर्फ 13 परीक्षाएं आयोजित की हैं, जबकि इसे सालाना आयोजित किया जाना चाहिए. ऐसी एक भी सिविल सेवा परीक्षा नहीं हुई है, जिसका मसला अदालत में न गया हो.
जैसे कुछ कंपनियां सिर्फ इसलिए गिग वर्कर्स का फायदा उठाती हैं क्योंकि वे ऐसा कर सकती हैं, वैसे ही कंज्यूमर्स भी उन्हें बेवजह दौड़ाते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि हम ऐसा कर सकते हैं.