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Thursday, 23 April, 2026
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एक असंगठित विरोध—यह मानेसर से नोएडा तक कैसे फैला

इन विरोध-प्रदर्शनों ने इस क्षेत्र की श्रम अर्थव्यवस्था में मौजूद गहरी दरारों को उजागर कर दिया है, जिससे अधिकारियों को 'डैमेज-कंट्रोल' करने पर मजबूर होना पड़ा है—ठीक ऐसे समय में जब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर और भी तेज़ हो गया है.

डॉग्स डे आउट—लैब्राडोर, इंडी और रिट्रीवर ने ऐसे बिताई मनाली में छुट्टियां

भारत में पेट पैरेंट्स कुत्तों के लिए खास छुट्टियों पर लाखों खर्च कर रहे हैं, “उसे दुनिया दिखाना चाहता हूं”.

भारत के CEO अब प्रोटीन, पेरिमेनोपॉज़ और मेंटल हेल्थ के बारे में क्यों पोस्ट कर रहे हैं

Mamaearth की ग़ज़ल अलघ से लेकर Zomato के दीपेंद्र गोयल तक, भारत के CEO कॉर्पोरेट जगत की ऊंचाइयों से यह संकेत दे रहे हैं कि आज के दौर में नेतृत्व के लिए अपने शरीर और मन का ख़्याल रखना बेहद ज़रूरी है

दाल, रोटी और सम्मान: दिल्ली-एनसीआर की महिला बाउंसर कैसे अपनी लड़ाई लड़ रही हैं

दिल्ली-NCR में लगभग 2,500 महिला बाउंसर हैं—जिनमें से कई अब अपने लिए सपोर्ट सिस्टम तैयार कर रही हैं. उनके सबसे सक्रिय व्हाट्सएप ग्रुप में से एक, जिसका नाम 'नारी शक्ति' है, में 208 सदस्य हैं.

भारत के CEO इस बात से सहमत हैं कि AI नौकरियों को बदल देगा लेकिन इसके तरीके पर उनकी राय बंटी हुई है

जेरोधा के नितिन कामथ के AI की वजह से किसी को नौकरी से न निकालने के वादे से लेकर ज़ोहो के श्रीधर वेम्बु की देखभाल जैसे वैकल्पिक कामों की सलाह तक, भारत के शीर्ष CEOs के काम के भविष्य को लेकर अलग-अलग विचार हैं.

नोएडा-गाजियाबाद के लोग UP के प्रीपेड बिजली मीटर सिस्टम से क्यों हैं परेशान

बिजली दफ़्तरों में भारी भीड़ है, जहां लोग अपनी शिकायतें या सवाल पूछने के लिए लंबी कतारों में लग कर इंतिज़ार कर रहे हैं. कभी-कभी, RWA के अध्यक्ष अधिकारियों के साथ सामूहिक बैठकें करने के लिए दफ़्तरों का दौरा करते हैं.

दिल्ली के इस इलाके में सुअरों की पूजा कर रहे हैं हिंदू, निशाने पर हैं मुसलमान

दिल्ली के त्रि नगर के निवासी अपने घरों में सुअरों को पिंजरे में रख रहे हैं, जबकि दीवारों पर गहनों से सजे एक शक्तिशाली, देवी-देवता के पोस्टर लगाए गए हैं.

दिल्ली के उद्योग का दम घुट रहा है: प्रदूषण जांच और नाला-सड़क-पानी की चुनौती

पिछले 30 सालों से, दिल्ली अपने औद्योगिक इलाकों में प्रदूषण के खिलाफ सख्ती बरत रही है, उन्हें वहां से हटा रही है, और फिर बिना किसी बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के उन्हें बेसहारा छोड़ दे रही है. ‘हम अनाथों जैसे हैं.’

डॉ. टीके लाहिरी—वाराणसी के ‘डॉक्टर भगवान’ की जिंदगी कैसे लोककथा बन गई

पद्म श्री से सम्मानित वह व्यक्ति, जिसने धन और सत्ता का त्याग कर दिया था, जनवरी में बदहाल, अकेला और लगभग बेजान हालत में पाया गया. उनकी कीर्ति भले ही बढ़ती जा रही हो, लेकिन डॉ. टी.के. लाहिरी आज भी एक पहेली ही बने हुए हैं.

नए कोर्स, अपनी डिग्री, हॉस्टल—NCERT ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ बनने की तैयारी कैसे कर रहा है

NCERT अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा कोर्स भी बेहतर किए जाएंगे, लेकिन ज्यादातर पहले जैसे ही रहेंगे, जबकि नए मास्टर्स और डॉक्टरेट प्रोग्राम अतिरिक्त तौर पर शुरू किए जाएंगे.

मत-विमत

दंतेवाड़ा के कलेक्टर ओपी चौधरी ने नक्सल-प्रभावित ज़िले में शिक्षा को कैसे बढ़ावा दिया?

तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.

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राजनीति

देश

एनसीबी ने मालदीव जाने वाले भारतीयों को आगाह किया

नयी दिल्ली, 23 अप्रैल (भाषा) स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने मालदीव की यात्रा पर जाने वाले भारतीयों को बृहस्पतिवार को उस देश में मादक...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.