पर्दे पर चंदन और शोएब को महत्वाकांक्षा और संभावनाएं दी गई हैं — सरकारी नौकरी की तैयारी करते युवा, सिपाही बनने के सपने देखते हुए. हालांकि, हकीकत थोड़ी अलग थी.
पैनासिया बायोटेक के ऑफिस में DengiAll को लेकर बातचीत में उत्साह साफ दिखता है. 10,000 से ज्यादा लोगों पर मानव परीक्षण पूरे होने के बाद कंपनी अब मंजूरी का इंतज़ार कर रही है.
कानपुर की गिरावट के लिए किसे दोषी ठहराया जाए, इस पर सब सहमत नहीं हैं. यहां तक कि RSS समर्थित ट्रेड यूनियन भी 1970 और 1980 के दशक के हड़ताली मज़दूरों को दोष देने में जल्दबाजी नहीं करते.
बंगाल के 700 सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघर घटकर 130 रह गए हैं, लेकिन दक्षिण कोलकाता का प्रिया सिनेमा आज भी हाउसफुल दर्शक खींच रहा है. ‘हमने दशकों से खुद को मार्केट और पोजिशन किया है.’
बिहार में कभी लोगों के लिए मददगार रहीं माइक्रोफाइनेंस कंपनियां अब कर्ज का जाल बन गई हैं, जो परिवारों को उन्हीं कर्जों में फंसा रही हैं जो उन्हें गरीबी से बचाने के लिए दिए गए थे.
रायज़ादा परिवार ने नेहरू युग से ही पुरानी दिल्ली में सिंगल-स्क्रीन सिनेमा देखने के कल्चर को ज़िंदा रखा है. डिलाइट सिनेमा में आज भी कैश रजिस्टर बज रहे हैं.
9 साल की एस्थर हनामते को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार जीतने के बाद उनके मिजोरम के गांव में हीरो जैसा स्वागत मिला. अब अंबानी परिवार ने उन्हें बुलाया है — ‘हम मुंबई जा रहे हैं.’
पाकिस्तान अधिकतर मामलों में भारत की बराबरी करे यह न केवल नामुमकिन है, बल्कि वह और पिछड़ता ही जाएगा. उसके नेता अपनी अवाम को अलग-अलग बोतल में सांप का तेल पेश करते रहेंगे.