दिल्ली-NCR में लगभग 2,500 महिला बाउंसर हैं—जिनमें से कई अब अपने लिए सपोर्ट सिस्टम तैयार कर रही हैं. उनके सबसे सक्रिय व्हाट्सएप ग्रुप में से एक, जिसका नाम 'नारी शक्ति' है, में 208 सदस्य हैं.
जेरोधा के नितिन कामथ के AI की वजह से किसी को नौकरी से न निकालने के वादे से लेकर ज़ोहो के श्रीधर वेम्बु की देखभाल जैसे वैकल्पिक कामों की सलाह तक, भारत के शीर्ष CEOs के काम के भविष्य को लेकर अलग-अलग विचार हैं.
बिजली दफ़्तरों में भारी भीड़ है, जहां लोग अपनी शिकायतें या सवाल पूछने के लिए लंबी कतारों में लग कर इंतिज़ार कर रहे हैं. कभी-कभी, RWA के अध्यक्ष अधिकारियों के साथ सामूहिक बैठकें करने के लिए दफ़्तरों का दौरा करते हैं.
दिल्ली के त्रि नगर के निवासी अपने घरों में सुअरों को पिंजरे में रख रहे हैं, जबकि दीवारों पर गहनों से सजे एक शक्तिशाली, देवी-देवता के पोस्टर लगाए गए हैं.
पिछले 30 सालों से, दिल्ली अपने औद्योगिक इलाकों में प्रदूषण के खिलाफ सख्ती बरत रही है, उन्हें वहां से हटा रही है, और फिर बिना किसी बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के उन्हें बेसहारा छोड़ दे रही है. ‘हम अनाथों जैसे हैं.’
पद्म श्री से सम्मानित वह व्यक्ति, जिसने धन और सत्ता का त्याग कर दिया था, जनवरी में बदहाल, अकेला और लगभग बेजान हालत में पाया गया. उनकी कीर्ति भले ही बढ़ती जा रही हो, लेकिन डॉ. टी.के. लाहिरी आज भी एक पहेली ही बने हुए हैं.
NCERT अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा कोर्स भी बेहतर किए जाएंगे, लेकिन ज्यादातर पहले जैसे ही रहेंगे, जबकि नए मास्टर्स और डॉक्टरेट प्रोग्राम अतिरिक्त तौर पर शुरू किए जाएंगे.
तुलसी में ज़्यादातर कंटेंट क्रिएटर्स लॉग ऑफ कर चुके हैं और वापस खेतों, फैक्ट्रियों या बेरोज़गारी में लौट गए हैं. कम होते व्यूज़, आपसी मतभेद और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो के साथ खुद को ढाल न पाने की वजह से यह गिरावट आई.
कार्यकर्ता रुद्राणी छेत्री ने कहा, ‘किन्नर और हिजड़ा समुदाय आमतौर पर गरिमा गृह नहीं आते. अगर यह कानून लागू हुआ, तो जो लोग हमारे पास आते हैं, उनमें से ज्यादातर की हम मदद नहीं कर पाएंगे.’
अगर सरकार टैक्सपेयर्स का पैसा देश को बेहतर बनाने में खर्च करना चाहती है, तो ज्यादा अदालतें बनाए, टूटती हुई नौकरशाही को सुधारे, लेकिन, ज़ाहिर है, नेता सिर्फ अपने बारे में सोचेंगे.