हिंदी अक्षरों से लेकर टैश डिज़ाइन और कलाकारों के सहयोग तक, भारतीय ब्रांड भारत की अपनी स्नीकर कहानी गढ़ रहे हैं. "भारतीय ब्रांडों ने लोगों से ज़्यादा पैसे वसूलने की संस्कृति और आकांक्षा का निर्माण किया है."
भारत-विशिष्ट कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ डेटाबेस यह पता लगाने में मदद करेगा कि किसी व्यक्ति को भविष्य में हृदय रोग होने का खतरा है या नहीं. इससे इलाज और दवा अधिक सटीक तरीके से दी जा सकेगी.
कर्ज़ के बोझ तले दबे किसान धान की खेती से चिपके रहते हैं, जबकि यह मिट्टी, पानी और भविष्य की संभावनाओं को बर्बाद कर देता है. "फसल विविधीकरण एक अच्छा शब्द है, लेकिन नीतिगत स्तर पर कुछ नहीं किया गया है."
एलवी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट के डॉक्टर 1.5 लाख कॉर्निया स्कैन पर एआई मॉडल को प्रशिक्षित कर रहे हैं ताकि ग्रामीण स्वास्थ्यकर्मी शुरुआती चरण में संक्रमण पहचान सकें. “मशीन एक साधारण फोटो से भी संक्रमण पहचान सकती है.”
2016 से 2020 के बीच 1,238 फैक्ट्रियों को पहले चरण की मंज़ूरी मिली थी, जिससे 16,832 करोड़ रुपये का निवेश आया. 2020 के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 2,154 फैक्ट्रियों तक पहुंच गया और निवेश 90,503 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
डिजिटल लेबर चौक उन तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म्स की श्रृंखला का हिस्सा है जो मैनुअल मज़दूरी को सड़कों से हटाकर एल्गोरिदम और ऐप्स की दुनिया में लाने की कोशिश कर रहे हैं. '10,000 से ज़्यादा कंपनियां भर्ती कर रही हैं.'
इंडियन रोड कांग्रेस के अध्यक्ष मनोरंजन परिडा ने कहा कि विकास की रफ्तार बहुत तेज़ है, शायद इसी वजह से हमारे मटेरियल की क्वालिटी- क्वांटिटी, विशेषज्ञता और क्षमता ज़रूरत के हिसाब से मेल नहीं खा पा रही.