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Monday, 5 January, 2026
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समाज-संस्कृति

377 एब नॉर्मल: कैसे देखते हैं ‘नॉर्मल’ लोग एलजीबीटी समुदाय को

अब इसी मुद्दे पर एक डेढ़ घंटे की फिल्म रिलीज़ हुई है. नाम है ‘377 एब नॉर्मल.’ यह सिनेमाघरों की जगह एक वेब प्लेटफार्म पर रिलीज हो रही है.

फिल्म ‘मर्द को दर्द नहीं होता’: चायवाला और चौकीदार पर ज़बर्दस्त ऐक्शन कॉमेडी

बहुत दिनों बाद ऐसी एक्शन कॉमेडी फिल्म आई है जिसके एक्शन सीन याद रह जाएंगे. बॉलीवुड, हॉलीवुड, रजनीकांत-कमल हासन और ब्रूस ली को छूते हुए ये फिल्म बेहतरीन मनोरंजन करती है.

होली विशेष: होरी खेलन कैसे जाऊं सखी री, बीच में ठाढ़ो कन्हैया रे दईया- बेगम अख़्तर

होली हो और होली के गीत की बात न हो तो होली अधूरी ही लगती है. होली पर वैसे तो बेग़म अख़्तर ने कई गीत ठुमरी और दादरे गाए हैं.

लोकसभा चुनाव में जनता के बीच नहीं, फिल्मी परदे पर होगा प्रचार

जमाना बदल गया है और जमाने के साथ चुनाव प्रचार भी बदल गया है. पहले लोग चुनाव में उम्मीदवार उतारते थे. अब फिल्में भी उतारी जाती है.

जी आपने सही सुना, प्रियंका और दीपिका प्रेगनेंट नहीं हैं!

समाज में शादी के बाद मां बनना इतना महत्व रखता है कि जो धारा के विपरीत चलते हैं उनको संदेह की दृष्टि से देखा जाता है.

अलविदा विनोद कश्यप, चली गई आकाशवाणी की आवाज़

विनोद कश्यप ने ही देश को भारत-चीन युद्ध, भारत पाकिस्तान युद्ध ( 1965, 1971), नेहरू जी और लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के समाचार सुनाए थे.

सीआरपीएफ के जवानों के लिए जन्नत में खुला ‘हेवन’, जल्द ही आमलोग भी ले सकेंगे मजा

आम लोगों के लिए फिलहाल ‘हेवन’ के दरवाज़े नहीं खोले गए हैं मगर कश्मीर के विशेषकर दक्षिण कश्मीर के हालात को देखते हुए एक सिनेमाघर का खुलना व फ़िल्मों का प्रदर्शित होना एक बड़ी बात है.

अमिताभ बच्चन के अंदर का इंकलाब 77 की उम्र में भी अभी शांत नहीं हुआ है

मीडिया चौथा स्तंभ है, देश की अंतरात्मा है. मेरे पास अपनी अंतरात्मा के साथ जीने की क्षमता या दुस्साहस है, लेकिन मीडिया के साथ नहीं.

तेजप्रताप का नाटक तो जारी है, पर ऐश्वर्या की शादी का मुद्दा क्यों उछाला जा रहा है?

आज भी पढ़ी-लिखी लड़कियों के शादी से बाहर निकलने या रहने की व्यवस्था घर के बड़े-बुज़ुर्गों के हाथों में है. कुछ ऐसा ही हाल है तेजप्रताप और एश्वर्या की शादी का.

नामवर सिंह के जाने से अचानक कमी का एहसास हुआ… अब मिलना नहीं होगा: गुलज़ार

हिंदीे के प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह की मृत्यु से साहित्य जगत में गहरा शोक व्याप्त है. पर नामवर सिंह ने कोई ख़ाली जगह नहीं छोड़ी, उन्होंने अपनी जगह बनायी और उसे बख़ूबी भर दिया. कोई और नामवर सिंह नहीं हो सकता.

मत-विमत

NEP के पांच साल बाद: ‘डिज़ाइन योर डिग्री’ के ज़रिये जम्मू-कश्मीर ने दिखाया आगे का रास्ता

ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में भारतीय विश्वविद्यालयों का योगदान अब भी कम है, खासकर जब इसकी तुलना एमआईटी और इम्पीरियल कॉलेज जैसे विदेशी संस्थानों से की जाती है.

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राजनीति

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असम में 5.1 तीव्रता का भूकंप, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं

गुवाहाटी, पांच जनवरी (भाषा) असम के मध्य भाग में सोमवार तड़के 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। एक आधिकारिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई।...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.