कर्मनाशा नदी अब कई स्थानों पर सूख चुकी है. बिहार में मिलों और तमाम औद्योगिक इकाइयों का गंदा पानी नदी में छोड़ा जा रहा है, जिसके कारण ये पूरी तरह विषाक्त हो चुकी है.
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में इन स्कूलों की कहानियां बताती हैं कि सरकारी शिक्षक यदि सही ढ़ंग से अपनी डयूटी निभाएं तो सरकारी स्कूलों में शिक्षण की गुणवत्ता को सुधारा जा सकता है.
स्कूल में दाखिल होते ही हर कक्षा में बच्चों द्वारा हाथ से बनाई कई कलाकृतियां चारों तरफ नज़र आती हैं. खास तौर से बच्चों द्वारा बनाई गई सुंदर बांस की टोकरियों जैसी चीजें.
बड़ी बात ये है कि भाजपा और आरएसएस वाले भले ही स्वदेशी का राग अलापते हैं, बावजूद इसके देश में 90 प्रतिशत लोग होली मनाने के लिए चाइनीज़ रंगों पर आश्रित हैं.
शायद ही देश के किसी यूनिवर्सिटी कैंपस में जेएनयू की तरह प्रेम और सद्भाव के वातावरण में होली खेली जाती हो. सब धाराओं-विचारधाराओं के स्टूडेंट्स मिलकर होली के रंग बिखेरते हैं.
शिक्षण पद्धति और कई गतिविधियों से रायगढ़ जिला परिषद प्राथमिक मराठी स्कूल दिवील में लड़कों से ज्यादा लड़कियां अपनी जिम्मेदारी या नेतृव्य क्षमता सब में आगे.
आज जब भारत में कोरोनावायरस से दो मौतों हुईं हैं और दुनियाभर में यह वायरस फैल रहा है ऐसे में डॉक्टर कोटनिस ने आज से लगभग आठ दशक पहले चीन में पीड़ित सैनिकों की सेवा करते हुए जिस तरह अपनी जिंदगी समर्पित कर दी, उसके लिए चीन आज भी उनका एहसान मानता है.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.