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Saturday, 21 March, 2026
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समाज-संस्कृति

कोरोनावायरस के हार मानने के बाद जो बहारें आएंगी सभी को उसका इंतज़ार होगा

जेठ की तपती दुपहरिया में अमलतास की पीली झालरों संग जुगलबंदी होगी. शायद कोरोना भी तब तक हार मान चुका होगा. कुदरत का श्रृंगार तब और भी जरूरी होगा.

विश्व जल दिवस: ‘कर्मनाशा’ भारत की एक ऐसी नदी जिसे माना जाता है अपवित्र

कर्मनाशा नदी अब कई स्थानों पर सूख चुकी है. बिहार में मिलों और तमाम औद्योगिक इकाइयों का गंदा पानी नदी में छोड़ा जा रहा है, जिसके कारण ये पूरी तरह विषाक्त हो चुकी है.

निराशावादी दौर से निकले ‘आशावादी’ मिलेनियल कवि!

इस दौर के मिलेनियल कवियों की आलोचना की जाती है कि ये लोग निराशावादी लिखते हैं. मगर इन कवियों का तर्क है कि वो वैसा ही लिखते हैं, जैसा लिखा जाना चाहिए.

आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूलों के नेटवर्क को तोड़ सरकारी स्कूल कमाल कर रहे हैं

छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में इन स्कूलों की कहानियां बताती हैं कि सरकारी शिक्षक यदि सही ढ़ंग से अपनी डयूटी निभाएं तो सरकारी स्कूलों में शिक्षण की गुणवत्ता को सुधारा जा सकता है.

महाराष्ट्र के सुदूर क्षेत्रों में बच्चे खुद गढ़ रहे कला और विज्ञान की परिभाषाएं, सपनों को दे रहे नए आकार

स्कूल में दाखिल होते ही हर कक्षा में बच्चों द्वारा हाथ से बनाई कई कलाकृतियां चारों तरफ नज़र आती हैं. खास तौर से बच्चों द्वारा बनाई गई सुंदर बांस की टोकरियों जैसी चीजें.

जेएनयू के ‘देशद्रोहियों’ की वजह से मैं कई सालों से होली में घर नहीं गया

बड़ी बात ये है कि भाजपा और आरएसएस वाले भले ही स्वदेशी का राग अलापते हैं, बावजूद इसके देश में 90 प्रतिशत लोग होली मनाने के लिए चाइनीज़ रंगों पर आश्रित हैं.

अटल-आडवाणी से लेकर इंदिरा-सोनिया तक भारतीय राजनेता कैसे मनाते आए हैं होली

शायद ही देश के किसी यूनिवर्सिटी कैंपस में जेएनयू की तरह प्रेम और सद्भाव के वातावरण में होली खेली जाती हो. सब धाराओं-विचारधाराओं के स्टूडेंट्स मिलकर होली के रंग बिखेरते हैं.

महाराष्ट्र के स्कूल दिवील में शिक्षिकाओं से बेटियों ने जानी अपनी शक्ति, बदल दी स्कूल की पहचान

शिक्षण पद्धति और कई गतिविधियों से रायगढ़ जिला परिषद प्राथमिक मराठी स्कूल दिवील में लड़कों से ज्यादा लड़कियां अपनी जिम्मेदारी या नेतृव्य क्षमता सब में आगे.

‘मर्दों की कामुकता नहीं जाती, इसलिए औरतों में आते हैं भूत’- प्रेत बाधा दूर करने वाले बाबा

नजफगढ़ में एक किराए के प्लॉट में भूत-प्रेत दूर करने का धाम चला रहे शनि भक्त मनू भैया के यहां झाड़-फूक कराने हजारों लोग पहुंचते हैं.

कोरोनावायरस के उत्पात के दौर में चीन को क्यों याद आ रहे हैं भारत के डॉक्टर कोटनिस

आज जब भारत में कोरोनावायरस से दो मौतों हुईं हैं और दुनियाभर में यह वायरस फैल रहा है ऐसे में डॉक्टर कोटनिस ने आज से लगभग आठ दशक पहले चीन में पीड़ित सैनिकों की सेवा करते हुए जिस तरह अपनी जिंदगी समर्पित कर दी, उसके लिए चीन आज भी उनका एहसान मानता है.

मत-विमत

‘विश्वगुरु’ बनने का हमारा-आपका भ्रम, दुनिया को देखने की समझ बिगाड़ रहा है

एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.

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राजनीति

देश

माकपा और विद्रोही नेता जी सुधाकरन के बीच जुबानी जंग तेज

अलप्पुझा (केरल), 21 मार्च (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) एवं उसके बागी नेता जी सुधाकरन के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.