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Wednesday, 4 February, 2026
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समाज-संस्कृति

BJP ने उदाहरण पेश किया, नीतीश ने अपनाया – बिहार के पाला बदलने वालों के बारे में उर्दू प्रेस ने क्या लिखा

उर्दू मीडिया ने इस सप्ताह कौन-कौन सी खबरों को कवर किया और उनमें से कितनी खबरों ने संपादकीय पेजों पर जगह बनाई. दिप्रिंट का राउंड-अप.

एकनाथ शिंदे-फडणवीस- महाराष्ट्र में सबसे बड़ी बगावत और परदे के पीछे का गणित

शिवसेना में बगावत करवाकर और शिंदे को मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने एक तीर से कई निशाने लगाए हैं. बीजेपी के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही कि वो फिर एक बार सत्ता में आ गई.

दिमाग नहीं लगाएंगे तो मनोरंजन करेगी ‘रक्षा बंधन’

रक्षा बंधन फिल्म लड़के की आस में ऊल-जलूल हरकतें करते लोगों पर कटाक्ष करती है, दहेज की मांग करने वाले परिवारों पर वार करती है, लड़कियों को पढ़ा-लिखा कर काबिल बनाने की बात भी करती है.

भरी-पूरी होने के बावजूद दर्शकों की प्यास क्यों नहीं बुझा पाई ‘लाल सिंह चड्ढा’

यह फिल्म लाल सिंह चड्ढा के साथ-साथ चलते हुए भारत देश के समय और हालात को दिखाती है. दरअसल, यह फिल्म कहती तो बहुत कुछ है, लेकिन वह ‘कहना’ सुनाई नहीं देता.

सपनों की फेहरिस्त बहुत लंबी है, अभी तक मेरा मास्टरपीस आया नहीं है: राजपाल यादव

राजपाल यादव ने कहा कि जब से दुनिया बनी तब से हंसी का बोलबाला है क्योंकि हम सबको मुस्कुराहट के लिए लाफ्टर तो चाहिए ही. मैं मानता हूं कि कठिन रूपी जीवन जीने के लिए आर्ट एक लाइफ सपोर्टर है.

किसान जीवन का द्वंद्व और जीवन की संभावनाओं की यात्रा है ‘ढलती सांझ का सूरज’

'ढलती सांझ का सूरज' किताब की सबसे अच्छी बात यह है कि ये एक ऐसी प्रासंगिकता भरी यात्रा है जो संजीदगी और शोध के जरिए लिखी गई है.

‘ED छापे मार सकती है लेकिन मामलों का बचाव नहीं कर सकती’- उर्दू प्रेस की इस हफ्ते की सुर्खियां

दिप्रिंट का राउंड-अप कि उर्दू मीडिया ने पिछले हफ्ते की घटनाओं को कैसे कवर किया और उनमें से कुछ ने क्या संपादकीय रुख इख़्तियार किया.

आजादी के पहले सावरकर को कांग्रेस ने कहा था ‘रिक्रूटवीर’; बताया था अंग्रेजों का पिट्ठू

विभाजन के समय पाकिस्तान की तुलना में यदि सैन्य संतुलन भारत के विरुद्ध होता तो नए मुसलिम राष्ट्र ने भारतीय सीमावर्ती मुसलिम बहुल राज्यों-राजस्थान, गुजरात और यद्यपि बंगाल के मुसलिम बहुल क्षेत्रों को निगलने का प्रयास किया होता, जहां मुसलमानों की संख्या हिंदुओं से अधिक थी.

कितनी बार लुटा भारत का कोहिनूर, कैसे लंदन के संग्रहालय तक पहुंचा

यह फिल्म खत्म होते-होते यह सवाल भी छोड़ जाती है कि हम भारतीयों के लिए कोहिनूर के मायने क्या हैं-सदियों की विरासत, गौरवशाली इतिहास, भारत की पहचान, बेशकीमती रत्न, शापित हीरा या सिर्फ एक चमकता पत्थर?

शमशेरा के पिटने पर संजय दत्त और करण मल्होत्रा का दुख सही है लेकिन इसके लिए दर्शक जिम्मेदार नहीं हैं

शमशेरा पिटी क्यों? इस फिल्म को दर्शकों का वो प्यार क्यों नहीं मिला जिसकी उम्मीद फिल्म बनाने वालों और उससे जुड़े लोगों को थी?

मत-विमत

सवाल यह नहीं होना चाहिए कि बलात्कारी लड़कों के साथ क्या किया जाए? पूछिए कि उन्हें हमलावर किसने बनाया

जिन छोटे लड़कों को स्कूल के काम की चिंता करनी चाहिए, वे महिलाओं को परेशान करना सीख रहे हैं. क्या अब हमें उन लोगों की लिस्ट में बच्चों को भी शामिल करना होगा जिनसे हमें खुद को बचाना है?

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राजनीति

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फ्रैक्टल एनालिटिक्स का आईपीओ नौ फरवरी को खुलेगा, मूल्य दायरा 857-900 रुपये प्रति शेयर

नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) कृत्रिम मेधा (एआई) समाधान प्रदाता फ्रैक्टल एनालिटिक्स ने अपने 2,834 करोड़ रुपय के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.