संविधान ने बेशक छुआछूत का निषेध कर दिया है और जातीय भेदभाव के खिलाफ बेशक संसद ने कानून बना दिया है, लेकिन दलितों को बराबरी से देखने का भाव समाज के एक हिस्से में अब तक नहीं आया है.
धर्म-अध्यात्म के नाम पर जो भी हलचल होगी, जो भी जनजागरण होगा, वह आखिर में जाकर मनुवादी ताकतों को मजबूती देगा, न कि दलित बहुजन आंदोलन और उसकी वैचारिकी को.
पश्चिमी मीडिया में पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति रही है. जिहादी आतंकवाद से सबसे अधिक पीड़ित देशों में भारत है. किन्तु पश्चिमी विश्लेषणों में भारत का ऐसा उल्लेख नदारद मिलेगा.
पिछले दो दशक से झारखंड में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने का मुद्दा उठता रहा है. पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इसकी पहल की थी. अब झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमंत सोरेन ने ओबीसी आरक्षण दोगुना करने का वादा किया है.
सरकार को यह तो सुनिश्चित करना ही होगा कि मेडिकल कॉलेजों के अच्छे फैकल्टियों को प्राइवेट कॉलेजों के शिक्षकों से कहीं ज्यादा वेतन और सुविधाएं प्राप्त हों.
एनआरसी की पूरी प्रक्रिया से ज्यादा कुछ हासिल नहीं हुआ है. इससे राज्य के लोगों को काफी परेशानियां हुई है, भारत की बदनामी हुई , सुप्रीम कोर्ट का समय खर्च हुआ. एनआरसी सूची को अपडेट करने में लगभग 1100 करोड़ रुपए लगे हैं.
पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.