विपक्षी दल साझा रैली-प्रदर्शन करने के बजाय अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन में लगे हुए हैं ताकि जब सीटों के तालमेल की बातचीत हो तो अधिक से अधिक सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर सकें.
केजरीवाल ने मोदी से जंग से फिलहाल पूरी तरह किनारा कर लिया है. वे किसी राष्ट्रीय मुद्दे पर चुनाव नहीं लड़ना चाहते. वे नहीं चाहते कि दिल्ली के मतदाता फरवरी में जब वोट डालने जाएं तब उनके मन में यह दुविधा हो कि मोदी के पक्ष में वोट दें या उनके पक्ष में.
सरकार जब महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे कांग्रेसी नेताओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर सकती है तो मंदी से निपटने के लिए मनमोहन सिंह जैसे अर्थशास्त्री के अनुभव का लाभ उठाने में क्या बुराई है?
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के लोगों का दावा कि भारतीय मुसलमानों से लेकर रानी मुखर्जी और अमेरिकी सीनेटर तक तमाम लोगों पर कैसे छा गए उनके वजीरे आज़म इमरान खान.
एकीकरण में कश्मीरी कहां हैं? क्या आज वे भारत के साथ पहले से ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं, या उनमें अलगाव की भावना पहले से ज्यादा व्यापक और प्रबल हो गई है?
सावरकर के हिंदुत्व की जड़ें उस वर्चस्ववाद में हैं, जो द्विज हिंदू सामाजिक दर्शन के आधार मनुस्मृति में दर्ज़ है, या फिर नीत्शे के सामाजिक डार्विनवाद में, जो योग्य लोगों को सुपरमैन बनाना चाहता है.
गांधी के कर्म और चिन्तन को अगर आगे के वक्तों के लिए जिन्दा रहना है तो फिर ये काम उनके पदचिन्हों से अपने कदम मिलाकर चलने वाले अनुयायियों से नहीं बल्कि गांधी को अपने युग की मांग के हिसाब से बरतने वाले ‘कुजात’ गांधीवादियों से ही हो सकता है.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.