कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग मोदी पर राहुल गांधी के व्यक्तिगत हमलों से नाखुश है. वे इसे ना तो कांग्रेस अध्यक्ष पद के अनुरूप मानते हैं और ना ही प्रधानमंत्री पद के भावी उम्मीदवार के.
पारिवारिक लड़ाई 2016 में शुरू हुई. पार्टी कार्यकर्ता अभय सिंह चौटाला को पंसद नहीं करते थे, दुष्यंत की लोकप्रियता के चलते उन्हें पार्टी पोस्टर्स से हटाया गया
अगर 2014 लोकसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि मुस्लिम सांसदों की संख्या कम हो गई है, 2019 में ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती.
अगर राहुल गांधी इतने ही बेकार हैं कि वे इस सरकार के लिए एक 'एसेट' और विपक्ष के लिए एक 'लायबिलिटी' की तरह काम करते हैं, तो फिर सरकार उन्हें ख़बरों में बनाए रखने के लिए इतनी ज़ोर-शोर से कोशिश क्यों कर रही है?