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Thursday, 18 June, 2026
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शिवसेना (UBT) में टूट की अटकलें तेज: 9 में से 6 लोकसभा सांसद पार्टी बैठक में नहीं हुए शामिल

यह बैठक पार्टी के चीफ व्हिप अनिल देसाई ने बुलाई थी और सभी सांसदों के लिए इसमें शामिल होना अनिवार्य किया गया था. यह बैठक ऐसे समय में हुई जब यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि सांसद विरोधी एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने का फैसला कर चुके हैं.

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मुंबई: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में संभावित टूट की चर्चा गुरुवार को और तेज हो गई, जब लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक अनिल देसाई द्वारा बुलाई गई बैठक में उसके नौ सांसदों में से छह सांसद शामिल नहीं हुए.

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया जब यह अटकलें तेज थीं कि शिवसेना (UBT) के छह सांसद प्रतिद्वंद्वी एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने का फैसला कर चुके हैं. यह बैठक सभी नौ सांसदों के लिए अनिवार्य थी.

सिर्फ अनिल देसाई (मुंबई साउथ सेंट्रल), अरविंद सावंत (मुंबई साउथ) और राजाभाऊ वाजे (नासिक) बैठक में मौजूद रहे, साथ ही राज्यसभा सांसद संजय राउत भी उपस्थित थे. पार्टी को उम्मीद थी कि संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट) और उद्धव ठाकरे के वफादार और धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर भी आएंगे, लेकिन वे अनुपस्थित रहे.

दिप्रिंट ने दोनों सांसदों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनके फोन बंद थे या अनरीचेबल थे.

शिवसेना (UBT) के कम से कम दो-तिहाई सांसदों की जरूरत होती है किसी अलग समूह बनाने या किसी मौजूदा पार्टी में विलय करने के लिए, ताकि एंटी-डिफेक्शन कानून के प्रावधानों से बचा जा सके. बैठक में शामिल नहीं होने वाले छह सांसद हैं: संजय दीना पाटिल, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाघचौरे, संजय देशमुख, संजय जाधव और नागेश पाटिल आष्टिकर.

शिवसेना (शिंदे) के नेता संजय शिरसाट ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह साफ हो गया है कि वे छह सांसद शिवसेना (UBT) में नहीं रहना चाहते. अब वे क्या फैसला लेते हैं, यह देखना होगा. जो भी हो, वे सब मिलकर लड़ते हैं.”

शिरसाट ने कहा कि उनकी पार्टी का इसमें कोई रोल नहीं है. “हमने कोई ऑपरेशन नहीं किया. यह उनके अपने दल का आंतरिक विवाद था और इसी वजह से वे छह सांसद खुद बाहर हो गए,” उन्होंने कहा.

शिवसेना (UBT) इन सांसदों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया में है, जिसमें उनसे उनकी अनुपस्थिति का स्पष्टीकरण मांगा जाएगा.

बैठक के बाद संजय राउत ने मीडिया से कहा, “उन्हें शो कॉज नोटिस दिए जाएंगे और उनसे जवाब मांगा जाएगा. हम उनकी सदस्यता रद्द करने की दिशा में देखेंगे. यह विश्वासघात है. वे अभी भी हमारी पार्टी के सदस्य हैं और हमारे चुनाव चिन्ह पर जीते हैं. अगर उन्होंने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. भारतीय जनता पार्टी ने देश की राजनीति को, खासकर महाराष्ट्र में, बदनाम किया है और उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.”

पार्टी बैठक शुरू होने से पहले राउत ने कहा था कि जो लोग पार्टी से अलग हुए हैं उनके खिलाफ सख्ती का समय आ गया है और इन सांसदों को “सबक सिखाने” की जरूरत है और “कार्रवाई की जाएगी”.

उन्होंने कहा, “वे सोचते हैं कि उन्होंने यह एक बार कर लिया है. मैं उनसे कहूंगा, करके दिखाओ. अगर हम तुम्हें तोड़ नहीं देंगे, तो हम अपने पिता का नाम नहीं लेंगे. और हमारे पिता बालासाहेब ठाकरे हैं. क्या आप लोकतंत्र का मजाक उड़ा रहे हैं? क्या आपके पास इतना पैसा है? आप प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई से किसे धमका रहे हैं? हमें? हम पहले भी जेल जा चुके हैं और फिर जाने के लिए तैयार हैं. लेकिन सिर्फ तुम्हें सबक सिखाने के बाद.”

राउत ने पहले आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के सांसदों को 50 करोड़ रुपये में खरीदा जा रहा है, जिसमें 15 करोड़ रुपये एडवांस दिए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक सांसद ओमराजे निंबालकर पर उनके पिता के 20 साल पुराने हत्या मामले के जरिए दबाव बनाया जा रहा है, जिसका फैसला 16 जून को आना था लेकिन अब इसे 20 जून तक टाल दिया गया है.

अरविंद सावंत के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में राउत ने बताया कि उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने उन्हें फोन किया था और कहा था कि इन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और किसी को भी छोड़ा नहीं जाना चाहिए. सावंत ने आगे कहा कि शिवसेना के दिवंगत संस्थापक बाल ठाकरे ने भी पार्टी छोड़ने वाले सांसदों और विधायकों को मारने तक का सुझाव दिया था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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