मुंबई: महाराष्ट्र सरकार की ओर से सूचना का अधिकार (RTI) नियमों में किए गए बदलावों के खिलाफ पूरे राज्य में विरोध शुरू हो गया है. भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने चेतावनी दी है कि अगर ये बदलाव वापस नहीं लिए गए तो वह भूख हड़ताल पर बैठेंगे. वहीं, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्य सचिव को कानूनी नोटिस भी भेजा है.
RTI कानून में किए गए इन बदलावों में आवेदन और अपील की फीस बढ़ाई गई है. साथ ही अब आवेदन करने वाले लोगों को अपना फोटो पहचान पत्र भी अपलोड करना होगा. केंद्रीय सूचना का अधिकार कानून राज्यों को कुछ मामलों में नियम बनाने की अनुमति देता है, लेकिन कानून के मूल प्रावधानों में बदलाव नहीं किया जा सकता.
अन्ना हजारे ने इन नए नियमों को “गैरकानूनी” बताया है और कहा है कि अगर महाराष्ट्र सरकार इन्हें तुरंत वापस नहीं लेती तो वह 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे.
हजारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर कहा है कि महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026 RTI कानून की धार को कमजोर कर देंगे और लोगों के लिए सूचना हासिल करना मुश्किल बना देंगे.
हजारे ने कहा कि ये नियम व्यवस्था की कमियां दूर करने के बजाय नागरिकों पर बोझ डालते हैं. उन्होंने कहा कि RTI कानून की धारा 4, जिसके तहत सरकारी विभागों को खुद ही जानकारी सार्वजनिक करनी होती है, आज भी ठीक से लागू नहीं हो रही है. इसी वजह से लोगों को RTI आवेदन देना पड़ता है.
इस बीच, पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, वकील प्रह्लाद कचारे, RTI कार्यकर्ता विजय कुंभर, पत्रकार विनीता देशमुख, नागरिक अधिकार कार्यकर्ता विवेक वेलणकर, जुगल राठी, मोहम्मद अफजल और अन्य नागरिकों ने सरकार को कानूनी नोटिस भेजा है. उनका कहना है कि नए नियम व्हिसलब्लोअर, पत्रकारों और सूचना मांगने वाले लोगों को RTI का इस्तेमाल करने से हतोत्साहित करेंगे.
इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर 15 दिनों के भीतर नियम वापस नहीं लिए गए तो वे बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख करेंगे.
RTI कार्यकर्ता विजय कुंभर ने दिप्रिंट से कहा, “ये बदलाव सीधे-सीधे मूल कानून के खिलाफ हैं. कुछ प्रावधान राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आते. ये प्रावधान मूल कानून का विरोध करते हैं. इसलिए हमने सरकार को नोटिस भेजा है.”
दिप्रिंट ने मुख्य सचिव, जिन्हें यह कानूनी नोटिस भेजा गया है, से ईमेल के जरिए प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला. जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा.
क्या बदलाव किए गए हैं
इस महीने की शुरुआत में महाराष्ट्र सरकार ने RTI नियम, 2005 में बदलाव करते हुए महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026 जारी किए. ये बदलाव 5 जुलाई से लागू होंगे.
इन बदलावों में सबसे ज्यादा विरोध नई फीस व्यवस्था का हो रहा है. RTI आवेदन की फीस 10 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये कर दी गई है. A4 आकार के एक पेज की फोटोकॉपी का शुल्क 2 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये कर दिया गया है. पहले डिजिटल कॉपी मुफ्त मिलती थी, लेकिन अब उसके लिए भी प्रति पेज 5 रुपये देने होंगे.
पहली और दूसरी अपील की फीस भी बढ़ाकर क्रमशः 50 रुपये और 100 रुपये कर दी गई है.
हजारे ने कहा कि फीस बढ़ाने के पीछे कोई तर्क या आर्थिक अध्ययन नहीं किया गया. उन्होंने कहा, “RTI कोई कमाई करने वाला कानून नहीं है. अगर 20 साल बाद फीस बढ़ाई गई है, तो जानकारी देने से इनकार करने वाले अधिकारियों पर लगने वाला जुर्माना भी बढ़ाया जाना चाहिए.”
इसके अलावा, RTI आवेदन के साथ स्वयं सत्यापित फोटो पहचान पत्र अपलोड करना भी अब अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि पहले इसकी जरूरत नहीं थी.
कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे RTI कार्यकर्ताओं और व्हिसलब्लोअर की जान खतरे में पड़ सकती है.
एक और नया नियम यह है कि एक आवेदन में सिर्फ एक ही विषय शामिल किया जा सकेगा और आवेदन की शब्द सीमा 150 शब्द होगी. हजारे का कहना है कि यह नियम बेवजह बोझ बढ़ाने वाला है. उनका यह भी कहना है कि एक जैसे दोबारा दिए गए आवेदनों को सीधे बंद कर देने का प्रावधान लोगों को पूरी या नई जानकारी पाने से रोक देगा.
दूसरे कार्यकर्ताओं की आपत्ति क्या है
कार्यकर्ताओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस, जिसकी प्रति दिप्रिंट के पास है, में कहा गया है, “इन सभी प्रावधानों का कुल असर यह होगा कि सूचना हासिल करना पहले से ज्यादा महंगा और मुश्किल हो जाएगा.”
नोटिस में आगे कहा गया है, “महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026 के कई प्रावधान ऐसे लगते हैं कि उन्हें RTI कानून को लागू करने के लिए नहीं, बल्कि कानून के तहत मिले अधिकारों को सीमित करने, लोगों को हतोत्साहित करने और उन पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए बनाया गया है. इन नियमों का कुल असर यह है कि संसद की मंशा के मुकाबले सूचना हासिल करना ज्यादा महंगा, ज्यादा तकनीकी और ज्यादा जटिल हो जाएगा.”
नोटिस में यह भी कहा गया है, “कानून का यह स्थापित सिद्धांत है कि किसी कानून के तहत बनाए गए नियम उसी कानून की सीमा के भीतर रहने चाहिए. वे संसद द्वारा दिए गए अधिकारों को खत्म, कमजोर, सीमित या उन पर अतिरिक्त शर्तें नहीं लगा सकते. नियम कानून को लागू करने के लिए होते हैं, उसे कमजोर करने के लिए नहीं.”
कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इन नए नियमों को तुरंत वापस लिया जाए. साथ ही RTI उपयोगकर्ताओं, पूर्व सूचना आयुक्तों, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज के सदस्यों और कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए पारदर्शी और सार्थक सार्वजनिक चर्चा कराई जाए. उसके बाद ही नए नियम बनाए जाएं.
विजय कुंभर ने कहा, “सरकार की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है. लेकिन दूसरी सरकारों की तरह हमें भी उनसे जवाब की उम्मीद नहीं है. हमारा अगला कदम बॉम्बे हाई कोर्ट जाना होगा.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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