Tuesday, 5 July, 2022
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नीतीश सहित कई मुख्यमंत्रियों ने केन्द्रीय योजनाओं को राज्यों पर थोपने पर सवाल उठाए 

विशेष राज्य का दर्जा न मिलने पर बीजेडी की संसद में आंदोलन की धमकी. बिहार के सीएम नीतीश कुमार सहित उड़ीसा के नवीन पटनायक और आंध्र प्रदेश के सीएम जगनमोहन रेड्डी ने विशेष राज्य के दर्जे की मांग की.

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नई दिल्लीः पीएम मोदी के दोबारा सत्ता में आने के बाद नीति आयोग की पहली बैठक में शामिल होने आए एनडीए शासित राज्य बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार अपने हितों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाना बंद करे और राज्यों को उनकी ज़रूरतों के हिसाब से योजनाएं बनाने में केवल वित्तीय सहायता प्रदान करे.

नीतीश कुमार ने कहा राज्य सरकारें केन्द्रीय योजनाओं में भागीदारी करने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य होती हैं भले ही वो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में उसकी कोई ज़रूरत हो या नहीं. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार सरकार सभी ग्रामीण और शहरी घरों में 2020 तक नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य पूरा करने वाली है जबकि नल से जल पहुंचाने की मोदी सरकार की केन्द्रीय योजना 2024 में पूरी होगी. ऐसे में राज्यों को केन्द्रीय योजनाओं से हटने का विकल्प होना चाहिये.


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नीतीश के मुताबिक केन्द्र अपनी योजनाओं के लिए राज्यों को मिलने वाली वित्तीय सहायता में भी कटौती किए जा रहा है. कई बार 60 प्रतिशत केन्द्रीय हिस्से की जगह 50 फीसदी हिस्सा ही राज्य सरकार के पास पहुंच पाता है. केन्द्र अपनी योजनाओं को समय पर पूरा करना चाहती है तो राजस्व देने में भी उसको उतनी ही तत्परता दिखानी चाहिये.
आंकड़े देते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि 2015-16 में 4500 करोड़ रुपये तो 2016-17 में 4900 करोड़ रुपये, 17-18 में 15335 और 2018 -19 में 21396 करोड़ रुपये बिहार को अपने संसाधनों से केन्द्रीय योजनाओं में मिलाने पड़े हैं.

नीतीश कुमार की बात को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा मोदी सरकार संघीय ढांचे को मजबूत करना चाहती है तो समय पर केन्द्रीय योजनाओं की भागीदारी जारी करे. इधर उधर की कमियां निकालकर आवंटित हिस्सेदारी को रोकने से विकास का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता. केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने ममता के राजनैतिक स्टैंड को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अपने वर्तमान स्वरूप में नीति आयोग राज्यों की मदद करने में विफल रहा है और केन्द्रीय योजनाओं को लादने का एप्रोच राज्यों के विकास और संघीय ढांचे के लिए सही नहीं है.

विशेष राज्य के दर्जा के लिए संसद में जेडीयू बीजेडी वाईएसआर मिलकर आंदोलन करने की राह पर

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित उड़ीसा के नवीन पटनायक और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने राज्य की विशेष परिस्थिति को ध्यान में रखकर केन्द्र से अपने लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग की. आंध्र प्रदेश के जगन रेड्डी ने विशेष राज्य के दर्जे की मांग रखते हुए 2.58 लाख करोड़ रुपये केन्द्र सरकार से मांगे तो नीतीश कुमार ने रघुरामराजन कमेटी की सिफ़ारिशों के मुताबिक सरकार से विशेष दर्जे की मांग की. उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बीजेडी सांसदों को संसद में जेडीयू और जगन रेड्डी की पार्टी के साथ विशेष दर्जा न मिलने तक आंदोलन चलाने का निर्देश दिया है. वहीं पंजाब के कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी भेजी चिट्ठी में राज्य के किसानों के लिए क़र्ज़ माफी और विशेष पैकेज की मांग रखी. कांग्रेस ने पंजाब चुनाव में क़र्ज़माफी को मुद्दा बनाकर चुनाव जीता था.

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सूखा प्रबंधन के लिए एसडीआरएफ नियमों में संशोधन की मांग

राजस्थान सहित कई राज्यों ने कृषि अनुदान के लिए भूमि सीमा 2 हेक्टेयर से बढ़ाकर 5 हेक्टेयर करने की मांग की है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फसलों के नष्ट होने की स्थिति में किसानों को मिलने वाली राहत की सीमा 33 फीसदी से 20 फीसदी पर लाने की मांग की.

कृषि का संकट और जल प्रबंधन की मांग

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की बैठक में कृषि क्षेत्र में संस्थागत बदलाव लाने के लिए एक कमेटी के गठन का फ़ैसला किया गया है लेकिन सभी राज्यों ने मौजूदा सूखे से निपटने के लिए अतिरिक्त धनराशि की मांग की. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने सूखे से निपटने के लिए जल प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय योजना चलाने का सुझाव दिया तो कर्नाटक मध्य प्रदेश महाराष्ट्र ने भी जल प्रंबंधन के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही. प्रधानमंत्री पिछले हफ़्ते ही सभी ग्राम पंचायत प्रमुखों को चिट्ठी लिखकर मानसून के महीने में जल संग्रहण का राष्ट्रीय आन्दोलन शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित करने को कहा है.


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ममता, अमरिंदर सिंह और तेलंगाना के मुख्यमंत्री बैठक में नहीं आए

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इस बैठक में शामिल नहीं हुए. ममता बनर्जी ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि नीति आयोग के पास कोई वित्तीय अधिकार नहीं है और इसलिए बैठक में शामिल होने से मना कर दिया था.

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह तबीयत खराब होने के कारण बैठक में शिरकत नहीं कर पाए पर उनकी जगह राज्य के मुख्य सचिव ने बैठक में हिस्सा लिया. सबसे आश्चर्यजनक अनुपस्थिति तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव की रही.

केसीआर के क़रीबी नेताओं के मुताबिक वह राज्य की बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के उद्घाटन कार्यक्रम में व्यस्त होने की वजह से नमो 2.0 की पहली नीति आयोग बैठक में नहीं पहुंच सके पर उनके एक क़रीबी नेता के मुताबिक बीजेपी की आक्रामक विस्तार की योजना से केसीआर चौकन्ना हो गए हैं और फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाने में विश्वास कर रहें हैं.

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