चेन्नई: विजय तो INDIA ब्लॉक में शामिल हो गए हैं, लेकिन उनके सहयोगियों में से एक ऐसा लगता है कि उसका एक पैर कहीं और है.
तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस (INDIA) के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. यह इस महीने की शुरुआत में विपक्षी गठबंधन में शामिल होने के कुछ दिनों बाद विपक्ष के आंदोलन में टीवीके की पहली भागीदारी थी. हालांकि, गठबंधन के विरोध प्रदर्शन में टीवीके के प्रमुख गठबंधन सहयोगी विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) ने SIR को विजय की पार्टी की चुनावी जीत से जोड़ दिया.
टीवीके मंत्री राजमोहन अरुमुगम ने कांग्रेस, वीसीके, वाम दलों, मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कझगम (MDMK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेताओं के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने शुरुआत से ही SIR प्रक्रिया का विरोध किया है और इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी.
राजमोहन ने इस प्रक्रिया की निंदा की और आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने से लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को खतरा पैदा हुआ है. उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से जवाबदेही तय करने की मांग की, जिसमें CEC कुमार को हटाना भी शामिल है. प्रदर्शन में राजमोहन ने कहा, “हम शुरुआत से ही SIR के खिलाफ लड़ रहे हैं और ऐसा करना जारी रखेंगे. SIR ऐसी प्रक्रिया है जो लोकतंत्र को कमजोर करती है. करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाया जाना गंभीर चिंता का विषय है. हम राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर हमेशा जनता के साथ खड़े रहेंगे.”
संयुक्त रुख के बावजूद, INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन में सबसे बड़ी परेशानी वीसीके अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन के बयान से हुई. उन्होंने हाल के विधानसभा चुनाव में कोलाथुर से स्टालिन की हार के लिए SIR को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने अनुमान लगाया कि SIR की वजह से बने कई कोणों वाले मुकाबलों ने टीवीके को चुनाव में जीत हासिल करने में मदद की.
राजमोहन की मौजूदगी में SIR के खिलाफ थिरुमावलवन के बयान से पार्टी के लोगों के बीच भ्रम पैदा हो गया. ऐसा माना जा रहा था कि यह बयान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर हमला करने के लिए दिया गया था, लेकिन कई लोगों ने इसे सत्तारूढ़ टीवीके के लिए शर्मिंदगी के रूप में समझा.
थिरुमावलवन ने बीजेपी पर विपक्षी नेताओं के खिलाफ मतदाताओं के नाम हटाने को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने स्टालिन, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का उदाहरण दिया. उनका आरोप था कि इन नेताओं को इस प्रक्रिया के जरिए निशाना बनाया गया.
स्टालिन को दी गई अपनी चेतावनी का जिक्र करते हुए VCK नेता ने कहा, “मैंने उसी दिन उनसे विधानसभा क्षेत्र बदलने के लिए कहा था और मैंने उन्हें चेतावनी दी थी कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है.” उनके बयान से संकेत मिला कि उनका मानना था कि कोलाथुर में चुनाव के नतीजे पर SIR प्रक्रिया का असर हो सकता है. यह ध्यान देने वाली बात है कि टीवीके उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने कोलाथुर में स्टालिन को हरा दिया.
यह पहली बार नहीं है जब वीसीके ने SIR की वजह से विधानसभा चुनाव के नतीजों पर सवाल उठाया है. टीवीके की सहयोगी होने के बावजूद, वीसीके प्रमुख थिरुमावलवन ने पिछले हफ्ते कहा था कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की जीत SIR का नतीजा हो सकती है. उस आरोप में डीएमके अध्यक्ष की हार को भी कम से कम कुछ हद तक SIR से जोड़ा गया था.
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