नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा प्रदर्शन करने का ऐलान किया था. पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि इसके जरिए दिखाया जाएगा कि “तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है.” पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका इस समय न्यायिक हिरासत में हैं. उन पर जंतर-मंतर में ‘जबरन घुसने’ का आरोप है. गृह मंत्रालय की ओर से जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद वे राष्ट्रीय ध्वज लेकर वहां पहुंचे थे.
गुरुवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपके, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा, अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की नेता आइशी घोष, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष शेख सलाउद्दीन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ियों के आरोप भी लगाए.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन मांगें रखी गईं- SIR में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें, आशुतोष रांका, सौरव दास और हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ “पुलिस की बर्बरता” बंद हो और जंतर-मंतर को फिर से प्रदर्शन स्थल बनाया जाए.
दीपके ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार “इतने ज़रूरी” क्यों हैं.
उन्होंने कहा, “पिछले 10-15 दिनों से छात्र संगठन और दिल्ली के युवा सड़कों पर लड़ रहे हैं. उन्हें सड़कों पर घसीटा जा रहा है…जब इस देश का विपक्ष भी सड़कों पर उतरा, तो उसे भी हिरासत में लिया गया. नेता प्रतिपक्ष को भी हिरासत में लिया गया. जब ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनराई विजयन समेत पूर्व मुख्यमंत्री सड़कों पर उतरे, तो उन्हें भी हिरासत में लिया गया. किसके लिए? एक ज्ञानेश कुमार के लिए.”
दीपके ने CJP के 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के आह्वान के बाद रेलगाड़ियों की सेवाओं पर लगी पाबंदियों और कुछ मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने सवाल किया कि जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा कर्मियों को राष्ट्रीय राजधानी में क्यों तैनात किया गया.
उन्होंने पूछा, “नरेंद्र मोदी के लिए ज्ञानेश कुमार इतने जरूरी क्यों हैं? हमें यह क्यों नहीं मानना चाहिए कि ज्ञानेश कुमार नरेंद्र मोदी को चुनाव जिताने में मदद कर रहे हैं? अगर वह उन्हें चुनाव जिताने में मदद नहीं कर रहे हैं, तो नरेंद्र मोदी उन्हें इतनी सुरक्षा क्यों दे रहे हैं?”
AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों को परेशान करने का आरोप अधिकारियों पर लगाया. उन्होंने कहा, “हमने देखा कि पत्रकारों से कैमरे छीन लिए गए और उनसे कहा गया कि अगर वे इसे कवर करेंगे, तो उन्हें अपने कैमरे वापस नहीं मिलेंगे.”
बोरा ने दिल्ली के ACP विवेक भगत पर एक महिला पत्रकार के साथ यौन उत्पीड़न करने के आरोप का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि महिला पत्रकार की शिकायत के बाद उसके खिलाफ कथित जातिसूचक टिप्पणियां करने के आरोप में जवाबी एफआईआर दर्ज की गई थी.
उन्होंने कहा, “जब आम लोग न्याय मांगने के लिए पुलिस के पास जाते हैं, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय पुलिस किसी खास राजनीतिक पार्टी का साथ देती है और जनता पर ही कार्रवाई करती है. यह उस चीज का साफ उदाहरण है, जिसे हम इस देश में लंबे समय से देखते आ रहे हैं.”
अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 7 का इस्तेमाल मुस्लिम मतदाताओं के नाम ‘चुपचाप हटाने’ के लिए किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक के 23 जिलों में रहने वाले वे लोग, जो प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली नहीं आ सकते, इस प्रक्रिया के जरिए अपनी आवाज उठाने से रोके जा रहे हैं.
उन्होंने कहा, “फॉर्म 7 का इस्तेमाल मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है. कर्नाटक के 23 जिलों के उन लोगों की आवाज चुपचाप मिटाई जा रही है, जो दिल्ली नहीं पहुंच सकते.”
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की निंदा की. उन्होंने इसके लिए लाठीचार्ज के वीडियो का हवाला दिया और स्थिति को “गुंडा राज” बताया.
उन्होंने कहा, “हम सभी सरकार बदलना चाहते हैं. सरकार बदलना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है. इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अंग्रेजों के बनाए देशद्रोह कानून को असंवैधानिक माना गया था. इसीलिए, जब तक हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाने के लिए उकसाया नहीं जाता, तब तक सिर्फ सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा करना हमारे संविधान के तहत अपराध नहीं है.”
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