मुंबई: 16 जून की आधी रात के कुछ देर बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर एक चार्टर्ड विमान मुंबई से उड़ा. सुबह करीब 3 बजे दिल्ली पहुंचने से पहले यह विमान जयपुर में रुका, जो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का शहर है.
करीब उसी समय एक और चार्टर्ड विमान नांदेड़ हवाई अड्डे पर नागेश पाटिल अष्टिकार का इंतज़ार कर रहा था, ताकि उन्हें दिल्ली ले जाया जा सके. उस रात महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से तीन और चार्टर्ड विमान भी दिल्ली के लिए रवाना हुए.
इन उड़ानों के जरिए शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद दिल्ली पहुंचे. वहां उन्हें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर ऐसे पत्र सौंपने थे, जिनमें उन्होंने शिंदे की शिवसेना को समर्थन देने की घोषणा की थी. इसके साथ ही उस अभियान का अंतिम चरण पूरा हुआ, जिसे शिंदे गुट ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया है.
हालांकि, सोमवार को मुंबई में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में इन छह सांसदों के शिंदे सेना में शामिल होने के साथ इस अभियान को औपचारिक रूप दिया गया, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसकी तैयारी करीब डेढ़ साल पहले शुरू हो गई थी.
शिंदे सेना के सूत्रों के मुताबिक, नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों में बड़ी सफलता के बाद शिवसेना (यूबीटी) के भीतर असंतोष और बगावत की चर्चाएं शुरू हो गई थीं.
शिवसेना (शिंदे) के एक नेता ने दिप्रिंट को बताया, “काफी समय से हम इन सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहे थे, क्योंकि हमें पता था कि वे नाराज़ हैं, लेकिन लंबे समय तक हमारे साथ छह सांसद नहीं आ पा रहे थे. पिछले हफ्ते यह स्थिति बदल गई.”
विभाजन से पहले शिवसेना (यूबीटी) के पास नौ सांसद थे और दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों (दो-तिहाई) का साथ आना जरूरी था.
सबसे पहले जिन सांसदों को मनाया गया, उनमें हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल अष्टिकार शामिल थे. बाद में उन्होंने तीन अन्य सांसदों— संजय जाधव, भाऊसाहेब वाघचौरे और संजय देशमुख को भी साथ लाने में अहम भूमिका निभाई.
हालांकि, धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर, जिन्हें उद्धव ठाकरे का वफादार माना जाता है और मुंबई नॉर्थ ईस्ट के सांसद संजय दीना पाटिल पार्टी छोड़ने को तैयार नहीं थे.
शिंदे गुट के एक दूसरे नेता ने कहा, “लेकिन जब टीएमसी के सांसद पार्टी से अलग हुए तो चीज़ें तेज़ी से आगे बढ़ीं. इसी महीने की शुरुआत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ ने रफ्तार पकड़ ली.”
शिवसेना नेता रामदास कदम ने मीडिया से कहा कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ “पूरी तरह सफल” रहा है.
उन्होंने कहा, “यह तो सिर्फ झांकी है…अभी बहुत कुछ बाकी है. ऑपरेशन टाइगर 100 प्रतिशत सफल रहा है और यह सिर्फ सांसदों तक सीमित नहीं रहेगा. आगे क्या होता है, बस इंतज़ार कीजिए. इसका असर बीएमसी में भी दिखाई देगा.”
कैसे आगे बढ़ा पूरा घटनाक्रम
इस महीने की शुरुआत में जब शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज होने लगीं, तो पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 14 जून को अपने निवास मातोश्री में सभी नौ सांसदों की बैठक बुलाई.
बागी सांसदों में से केवल संजय दीना पाटिल ही बैठक में पहुंचे थे, जबकि बाकी सांसद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े. हालांकि, बागी सांसदों ने इस दावे को न तो स्वीकार किया और न ही खारिज किया.
राज्यसभा सांसद और शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने सोमवार को दिप्रिंट से कहा कि बैठक के दौरान सांसद भाऊसाहेब वाघचौरे ने तीन मिनट के भीतर चार बार साईं बाबा की कसम खाकर कहा था कि वह पार्टी के प्रति वफादार रहेंगे.
राउत के अनुसार, एक अन्य सांसद ने अपने बच्चों की कसम खाई, एक ने देवी तुलजा भवानी के नाम पर शपथ ली, जबकि एक और सांसद ने अपनी दिवंगत पत्नी की कसम खाई. सभी ने उद्धव ठाकरे को भरोसा दिलाया कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे.
राउत ने कहा, “सभी ने हमसे कहा था कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे. अब क्या कहें. सभी झूठे निकले.”
मातोश्री की बैठक के दो दिन बाद ऑपरेशन टाइगर सबसे निर्णायक चरण में पहुंच गया. 16 जून की रात नांदेड़ हवाई अड्डे पर एक चार्टर्ड विमान तैयार खड़ा था. नागेश पाटिल अष्टिकार उसमें सवार होकर दिल्ली पहुंचे और रात करीब 1:30 बजे वहां पहुंचे.
संजय जाधव और संजय देशमुख दूसरे चार्टर्ड विमान से नांदेड़ से दिल्ली पहुंचे और रात करीब 2 बजे वहां पहुंचे. वहीं भाऊसाहेब वाघचौरे हैदराबाद होते हुए एक उड़ान से आधी रात के बाद दिल्ली पहुंचे.
संजय दीना पाटिल परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के साथ मुंबई से चार्टर्ड विमान में सवार होकर आधी रात के बाद दिल्ली पहुंचे.
इस बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अलग विमान से दिल्ली रवाना हुए. रास्ते में वह जयपुर गए, जहां उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की. इसके बाद वह सुबह करीब 3 बजे दिल्ली पहुंचे.
सबसे आखिर में सांसद ओमराजे निंबालकर पुणे से उड़ान लेकर सुबह करीब 4:30 बजे दिल्ली पहुंचे.
17 जून की सुबह ओमराजे निम्बालकर ने उपमुख्यमंत्री शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे के साथ ओम बिरला से मुलाकात की. श्रीकांत शिंदे को इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य रणनीतिकार माना जा रहा है.
इसके बाद शिंदे गुट के नेताओं के अनुसार बाकी सांसदों ने भी ओम बिरला से मुलाकात की.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और उनके कार्यालय ने अभी तक उन कथित समर्थन पत्रों को सार्वजनिक नहीं किया है, जो इन सांसदों ने शिवसेना के समर्थन में जमा किए थे. इसकी पुष्टि करने वाली कोई तस्वीर भी जारी नहीं की गई है.
दिप्रिंट ने फोन और ईमेल के जरिए ओम बिरला के कार्यालय से संपर्क किया. जवाब मिलने पर रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा. इसके बाद सभी सांसद नोएडा के एक पांच सितारा होटल में रुके और 18 जून को अलग-अलग स्थानों के लिए रवाना हो गए.
नागेश अष्टिकार चेन्नई गए और वहां से तिरुपति मंदिर पहुंचे. भाऊसाहेब वाघचौरे वाराणसी जाकर काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे. संजय देशमुख और संजय जाधव अयोध्या में दर्शन करने गए. वहीं संजय दीना पाटिल मुंबई लौट गए और ओमराजे निंबालकर पुणे चले गए.
इसी बीच शनिवार को एक विशेष सीबीआई अदालत ने 2006 में ओमराजे के पिता और महाराष्ट्र के उस्मानाबाद (अब धाराशिव) जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर की हत्या के मामले में सभी आठ आरोपियों को बरी कर दिया.
जून 2006 में पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
उक्त उद्धृत शिवसेना नेताओं में से एक ने दिप्रिंट से कहा, “वह (ओमराजे) अपने पिता की हत्या के मामले में आने वाले फैसले के बाद ही कोई निर्णय लेना चाहते थे, लेकिन दुर्भाग्य से फैसला उनके पक्ष में नहीं आया. हालांकि, एकनाथ शिंदे जी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह और शिवसेना उनके साथ हैं और उन्हें किसी बात की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. इसके बाद उन्होंने रविवार को अंतिम फैसला लिया.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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