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Sunday, 8 November, 2026
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हैदराबाद के जायके की दुनिया दीवानी है, लेकिन इसके रसोईघरों का हाल बेहाल है

हैदराबाद में कुल 14 जगहों के FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए और आठ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया.

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जब तेलंगाना स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी फॉर फूड एंड एसेंशियल ड्रग्स (TGSAFE) की ओर से हैदराबाद के पुराने शहर में की गई छापेमारी को लेकर प्रेस रिलीज आई, तो मुझे कोई हैरानी नहीं हुई. मुझे लगा कि इसमें उन्हीं होटलों और रेस्टोरेंट के नाम होंगे, जिन पर अक्सर कार्रवाई होती है या जिनके FSSAI लाइसेंस सस्पेंड किए जाते हैं.

लेकिन इस बार सबके लिए हैरानी की बात यह थी कि आलीशान पांच सितारा ताज फलकनुमा होटल को भी नोटिस जारी किया गया. वहीं, पुराने शहर के कुछ दूसरे मशहूर रेस्टोरेंट, जैसे शालिबंडा का शाह ग़ौस, नायाब होटल और यहां तक कि मेसन टैंक का डाइन हिल भी बंद कर दिए गए, क्योंकि उनके FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए थे.

मेरा अंदाजा गलत नहीं था. पिस्ता हाउस जैसे मशहूर होटलों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. लेकिन इस बार सबके लिए हैरानी की बात यह थी कि आलीशान पांच सितारा ताज फलकनुमा होटल को भी नोटिस दिया गया. वहीं, पुराने शहर के कुछ दूसरे मशहूर रेस्टोरेंट, जैसे शालिबंडा का शाह ग़ौस, नायाब होटल और यहां तक कि मेसन टैंक का डाइन हिल भी बंद कर दिए गए, क्योंकि उनके FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए थे.

सरकार की खाने-पीने की जगहों पर कार्रवाई

कुल मिलाकर, 14 जगहों के FSSAI लाइसेंस सस्पेंड किए गए और 8 को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. अब जो लोग हैदराबाद के रेस्टोरेंट और वहां साफ-सफाई की हालत से अनजान हैं, उन्हें मैं कुछ बातें बताना चाहता हूं. यहां साफ-सफाई नाम की कोई चीज नहीं है. या कहें कि कुछ जगहों पर यह बहुत कम या न के बराबर है.

ज्यादातर रेस्टोरेंट, यहां तक कि मशहूर रेस्टोरेंट भी, इतने गंदे हैं कि मैंने अपनी जिंदगी में शायद ही कहीं ऐसी गंदगी देखी हो. कुछ जगहें इसका अपवाद हैं. पुराने शहर के कुछ मशहूर होटलों में खास तौर पर पर्यटकों के लिए नए और शानदार AC केबिन बने हैं, लेकिन ऐसी जगहें बहुत कम हैं.

मैंने हमेशा लोगों से शिकायत की है कि हैदराबाद के रेस्टोरेंट, खासकर मशहूर रेस्टोरेंट कितने गंदे हैं. जिन जगहों का FSSAI लाइसेंस रद्द किया गया है, उनमें से एक डाइन हिल भी है. यह उन सबसे मशहूर होटलों में से एक है, जहां हम पिछले दस साल से भी ज्यादा समय से खट्टी दाल, जीरा राइस और ग्रिल्ड चिकन खाने जाते रहे हैं.

मैंने वहां एक चूहा और कॉकरोच देखा है. वहां जाने वाले कई दूसरे लोगों से भी ऐसे ही अनुभवों के बारे में सुना है. कहने की जरूरत नहीं कि हमने वहां जाना बंद कर दिया. सच कहूं तो इसमें कोई हैरानी नहीं है. TGSAFE विभाग ने हाल ही में डाइन हिल का FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था. इसकी वजह वहां चूहों का भारी आतंक, सड़े हुए फल और रसोई से आने वाली बदबू थी.

इसलिए, एक बार तो मुझे खुशी है कि रेस्टोरेंट को उनकी असलियत का एहसास कराया गया है. मैं बस यह सोच सकती हूं कि ताज फलकनुमा ने ऐसा क्या किया होगा कि उसे भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. सच में, खाने के शौकीन लोगों के तौर पर हम ऐसी जगह से इसकी उम्मीद बिल्कुल नहीं करते, जहां एक बार के खाने के लिए हजारों रुपये देने पड़ते हैं.

मुझे सच में राहत है कि इन जगहों को उनकी लापरवाही के लिए जवाबदेह ठहराया जा रहा है, क्योंकि ज्यादातर जगहों पर साफ-सफाई और स्वच्छता की बुनियादी व्यवस्था तक नहीं है. नियामक संस्थाओं को छोटी और संकरी गलियों में चलने वाले खाने-पीने के ठिकानों पर भी कार्रवाई करनी चाहिए.

इसके अलावा, इन्फ्लुएंसर्स की भी बड़ी भूमिका है. वे कई जगहों को बढ़ावा देते हैं, जबकि उन्हें पता होता है कि वहां साफ-सफाई की हालत बहुत खराब है. खासकर इंस्टाग्राम पर मैंने जितनी बार कूड़े जैसी चीजों को शानदार खाना बताकर प्रचारित होते देखा है, उसी वजह से मैंने हैदराबाद में किसी भी इन्फ्लुएंसर की बात को गंभीरता से लेना बंद कर दिया.

बेशक, आम लोगों को भी इन चीजों की ज्यादा परवाह नहीं दिखती. शायद यही वजह है कि मशहूर जगहें बंद नहीं होतीं और चलती रहती हैं. लेकिन मुझे लगता है कि इस बार पूरे शहर के पास खाने-पीने के कारोबार को बेहतर बनाने का अच्छा मौका है. मुझे लगता है कि FSSAI से भी ज्यादा जरूरी है कि हम होटलों में खाना बनाने और साफ-सफाई बनाए रखने के तरीके पर नए सिरे से सोचें.

पूरे हैदराबाद की समस्या

राज्य सरकार को शायद ज्यादा व्यावहारिक तरीका अपनाने की जरूरत है. उसे अपने मानक तय करने चाहिए कि रेस्टोरेंट की रसोई किस तरह रखी जानी चाहिए. यह काम होटल प्रबंधन के साथ मिलकर और कर्मचारियों को ट्रेनिंग देकर किया जाना चाहिए. इसकी जरूरत छोटे कैफे में भी है, जहां साफ-सफाई का कोई ध्यान नहीं रखा जाता.

सच कहूं तो यह बताना भी मुश्किल है कि ये जगहें कितनी गंदी हैं. यह समझाना मुश्किल है कि पहले मैं इतनी गंदगी कैसे बर्दाश्त कर लेती थी. शहर के ज्यादातर मशहूर रेस्टोरेंट में खाना बंद करने की यह भी एक वजह है. वहां साफ-सफाई या तो बिल्कुल नहीं होती या फिर नाममात्र की होती है. एक बार मैंने एक चाय कैफे में एक आदमी को प्याज काटते देखा, जिसे एक चूहा कुतर रहा था. उस कैफे में चाइनीज खाना भी मिलता था.

मैं उसे घूरती रही और वह हंसने लगा. आखिरकार मुझे वहां से जाना पड़ा, क्योंकि उससे बहस करने का कोई फायदा नहीं होता. उसे सच में लग रहा था कि इसमें कुछ गलत नहीं है.

लेकिन मैं यह भी साफ कर देना चाहती हूं कि यह समस्या शहर के बाकी हिस्सों में भी है. भले ही इस बार छापेमारी सिर्फ चारमीनार और गोलकुंडा इलाके की जगहों पर हुई हो. मैं यह नहीं कह रही कि हाईटेक सिटी और बंजारा हिल्स जैसे महंगे इलाकों में हालात बेहतर हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं है, क्योंकि यह समस्या पूरे हैदराबाद में है.

कुछ महीने पहले, सितंबर में, हाईटेक सिटी या IT कॉरिडोर के कुछ महंगे बार और खाने-पीने की जगहों पर भी छापेमारी हुई थी और उनके लाइसेंस सस्पेंड किए गए थे. इसलिए साफ-सफाई की यह समस्या हर जगह है. इन जगहों की तस्वीरें हम सभी ने देखी थीं. यह सब बेहद घिनौना है.

पहले भी कई महंगी जगहों को इसी तरह नोटिस मिल चुके हैं. इसलिए रेस्टोरेंट कारोबार में बड़े बदलाव की जरूरत है, ताकि लोग सेहत को हल्के में लेना बंद करें. इसमें समय लग सकता है, लेकिन यह बदलाव किया जा सकता है और इसकी जरूरत भी है.

मेरी जिन लोगों से बात हुई है, उनसे पता चला कि रेस्टोरेंट मालिक इसके लिए तैयार हैं. आखिरकार, यह कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने का मामला है. इसलिए विभाग चाहे जितनी बार लाइसेंस सस्पेंड कर दे या नोटिस जारी कर दे, जब तक इससे कोई ठोस सुधार नहीं होता, तब तक समस्या हल नहीं होगी.

यूनुस लसानिया हैदराबाद के एक पत्रकार हैं, जिनका काम राजनीति, इतिहास और संस्कृति पर केंद्रित है. वे @YunusLasania पर ट्वीट करते हैं. विचार निजी हैं.

(इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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