नई दिल्ली: 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी महेश दीक्षित को गुरुवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का डायरेक्टर नियुक्त किया गया. उनके साथ काम कर चुके अधिकारी उन्हें “इंटेलिजेंस के सबसे तेज दिमाग वाले अधिकारियों में से एक” बताते हैं. उनका कहना है कि वह शांत स्वभाव के हैं, हर स्थिति में संयम बनाए रखते हैं, भारत की सुरक्षा व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं और हमेशा सोच-समझकर फैसला लेते हैं.
महेश दीक्षित करीब 5 साल तक श्रीनगर में इंटेलिजेंस ब्यूरो की सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) के प्रमुख रहे. यह यूनिट जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ लेह में भी इंटेलिजेंस ऑपरेशन संभालती है. उन्होंने अनुच्छेद 370 हटने के बाद के बेहद अहम दौर में यह जिम्मेदारी निभाई. संगठन में उन्हें सबसे मेहनती अधिकारियों में माना जाता है. उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियान और आंतरिक सुरक्षा का विशेषज्ञ माना जाता है.
जम्मू-कश्मीर में उनके कार्यकाल के दौरान कई संवेदनशील चुनौतियां सामने आईं. उन्होंने जमात-ए-इस्लामी से बातचीत कर उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश की. सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल बनाया. राज्य में आंतरिक स्थिरता बनाए रखी. क्षेत्रीय सुरक्षा खतरों पर नजर रखी. अनुच्छेद 370 हटने के बाद अलगाववादी नेटवर्क पर भी करीबी नजर बनाए रखी. उन्होंने देश की सबसे जटिल सुरक्षा जिम्मेदारियों में से एक को संभाला.
वह हिमाचल प्रदेश कैडर के अधिकारी तपन डेका की जगह लेंगे, जो 2022 से IB के डायरेक्टर हैं. तपन डेका का कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है.
उनके साथ काम कर चुके एक अधिकारी ने कहा, “वह बेहतरीन रणनीतिक सोच रखने वाले अधिकारी हैं. सबसे ज्यादा दबाव वाली स्थिति में भी वह शांत रहते हैं और तथ्यों पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत है. वह उन गिने-चुने अधिकारियों में हैं जिन्हें आप हमेशा मुस्कुराते हुए देखेंगे.”
उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई मुश्किल समस्या हो तो उस पर भरोसा किया जा सकता है. वह परिपक्व हैं, बहुत पढ़े-लिखे हैं, संतुलित सोच रखते हैं और सबसे कठिन हालात को भी बहुत आसानी से संभाल लेते हैं. संकट के समय उन्होंने हमेशा मजबूती से जिम्मेदारी निभाई है और वह सही मायनों में एक नेता हैं.”
‘बेहतरीन बातचीत करने वाले अधिकारी’
महेश दीक्षित ने अलग-अलग पक्षों से बातचीत करने और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में सहमति बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कश्मीर और लद्दाख दोनों जगह यह जिम्मेदारी निभाई. 2024 में जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और उसे छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था, तब लेह में बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिशों में भी उनकी अहम भूमिका रही.
एक अन्य अधिकारी ने कहा, “उनकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह मुश्किल लोगों से भी बातचीत कर लेते हैं. वह बातचीत के माहिर हैं.”
उन्होंने कहा, “चाहे जमात-ए-इस्लामी को चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार करना हो या लेह में प्रदर्शन कर रहे समूहों को बातचीत की मेज तक लाना हो, उन्होंने हमेशा भरोसा बनाने और बीच का रास्ता निकालने की क्षमता दिखाई है. उनकी विश्वसनीयता, धैर्य और समझाने की शैली ने बार-बार अच्छे नतीजे दिए हैं.”
महेश दीक्षित के पास भारत के सबसे संवेदनशील सुरक्षा इलाकों में काम करने का लंबा अनुभव है. उन्हें कश्मीर में आतंकवाद के पूरे नेटवर्क की गहरी समझ है. एक तीसरे अधिकारी ने कहा, “इंटेलिजेंस ब्यूरो के आतंकवाद विरोधी अभियानों को संभालने का उनका रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है.”
कश्मीर में उनके कार्यकाल को याद करते हुए इस अधिकारी ने कहा, “अनुच्छेद 370 हटने के बाद का समय बेहद अहम था. महेश दीक्षित अपनी मजबूत जमीनी इंटेलिजेंस नेटवर्क और लंबे फील्ड अनुभव के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने पूरे ऑपरेशन को बहुत कुशलता से संभाला. इंटेलिजेंस एजेंसियों, पुलिस और दूसरे सुरक्षा बलों के बीच तालमेल बनाने से लेकर रणनीति तैयार करने और उसे लागू कराने तक, उन्होंने हर जिम्मेदारी पूरे आत्मविश्वास और सटीक तरीके से निभाई.”
अधिकारी ने आगे कहा, “उनमें बिल्कुल भी घमंड नहीं है. वह बेहद सरल और जमीन से जुड़े इंसान हैं. लोग उनका सम्मान उनके काम की वजह से करते हैं. वह मेहनत करने वालों की कद्र करते हैं. सबकी बात धैर्य से सुनते हैं. अपनी राय थोपने की कोशिश नहीं करते. वह आलोचना और नए विचारों का भी हमेशा स्वागत करते हैं.”
अपने पूरे करियर में महेश दीक्षित ने इंटेलिजेंस ब्यूरो में कई संवेदनशील जिम्मेदारियां संभाली हैं. इनमें वामपंथी उग्रवाद और सीमा पार घुसपैठ से जुड़े मामले भी शामिल हैं.
उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस (2016), पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस (2009) और पुलिस आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक (2004) से सम्मानित किया जा चुका है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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