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Sunday, 14 June, 2026
होमदेशगुटखा व्यापार के खिलाफ MCOCA, पतंजलि पर कार्रवाई: महाराष्ट्र FDA में तुकाराम मुंढे का सख्त रुख

गुटखा व्यापार के खिलाफ MCOCA, पतंजलि पर कार्रवाई: महाराष्ट्र FDA में तुकाराम मुंढे का सख्त रुख

'सुरक्षित भोजन, सुरक्षित दवा, सुरक्षित महाराष्ट्र' के मकसद के साथ, एक IAS अधिकारी ने मिलावट और दूसरी अनियमितताओं पर नज़र रखने के लिए सैकड़ों प्रतिष्ठानों पर छापेमारी का आदेश दिया है.

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मुंबई: खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने अपने पहले दो हफ्तों में ही कई बड़े कदम उठाए हैं. उन्होंने प्रतिबंधित निकोटीन उत्पादों के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़े महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) को लागू किया है और ‘भ्रामक दावों’ को लेकर पतंजलि के खिलाफ कार्रवाई की है.

2005 बैच के IAS अधिकारी मुंढे ने 25 मई को महाराष्ट्र FDA का कार्यभार संभाला था.

21 साल में 25 बार तबादला झेल चुके FDA आयुक्त ने पूरे राज्य में खाद्य और दवाओं में मिलावट के खिलाफ अभियान शुरू करके इस क्षेत्र को साफ करने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली है. ‘सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र’ के नारे के साथ मुंढे ने मिलावट और दूसरी गड़बड़ियों पर नजर रखने के लिए सैकड़ों प्रतिष्ठानों पर छापेमारी के आदेश दिए हैं.

मिलावटी दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे पनीर, कृत्रिम तरीके से पकाए गए आम, प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू उत्पाद, गलत लेबल वाला खाद्य तेल और गंदे तरीके से बनी आइसक्रीम. कुछ भी इस ईमानदार और बारीकी से काम करने वाले अधिकारी की नजर से नहीं बचा है.

पतंजलि और कथित तौर पर भ्रामक विज्ञापन देने वाली अन्य कंपनियां भी महाराष्ट्र में कार्रवाई का सामना कर रही हैं.

मुंढे ने दिप्रिंट से कहा कि उनका लक्ष्य सुरक्षित भोजन और दवाओं के जरिए महाराष्ट्र के 13 करोड़ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

उन्होंने कहा, “और हम इसे सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र मिशन के जरिए सुनिश्चित करेंगे. हमारी रणनीति ‘ई3’ होगी, जिसका मतलब है लोगों को सशक्त बनाना, कारोबार को सक्षम बनाना और कानून लागू करना. ईमानदार कारोबारियों को डरने की जरूरत नहीं है और अवैध कारोबार, संस्थाओं और व्यक्तियों के पास छिपने की कोई जगह नहीं होगी.”

IAS अधिकारी के पद संभालने के सिर्फ एक हफ्ते के भीतर ही FDA विभाग ने 50 से ज्यादा प्रतिष्ठानों पर छापे मारे और लगभग 100 लोगों को गिरफ्तार किया. मुंढे ने कहा कि 25 मई से 11 जून के बीच प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों को लेकर 354 प्रतिष्ठानों की जांच की गई, जिसमें 3.27 करोड़ रुपये के सामान जब्त किए गए.

अब तक 235 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. मुंढे के दिए आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 274 प्रतिष्ठानों को सील भी किया गया है.

कार्रवाई में तेजी लाने के लिए मुंढे ने कहा कि FDA अधिकारियों को इस क्षेत्र के दोनों हिस्सों. खाद्य और दवा. पर एक साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई कोई अचानक शुरू किया गया अभियान नहीं है, बल्कि एक तय योजना और रणनीति का हिस्सा है.

अपने सख्त रवैये के लिए जाने जाने वाले मुंढे को अपने प्रशासनिक करियर में काफी राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ा है. दिव्यांग कल्याण विभाग में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान उन्होंने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र रखने वालों के खिलाफ अभियान चलाया था. लाभार्थियों को सभी सेवाएं देने के लिए एक डिजिटल वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म शुरू करने में भी उनकी अहम भूमिका रही थी.

कदमों में तेजी

पहले FDA अधिकारी आमतौर पर त्योहारों के दौरान ही सक्रिय होते थे, जब वे खाद्य मिलावट रोकने के लिए जांच बढ़ा देते थे. लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं और अधिकारी दिन-रात काम कर रहे हैं.

मुंढे ने तंबाकू, गुटखा और निकोटीन उत्पादों के निर्माताओं और वितरकों के खिलाफ मकोका लगाने की मंजूरी दे दी है. इसके बाद FDA अधिकारियों को तलाशी अभियान चलाने के लिए पुलिस के साथ तालमेल बनाना होगा.

उन्होंने बताया कि मकोका लागू करने का मकसद कानून का पालन करने वाले व्यापारियों को परेशान करना नहीं, बल्कि प्रतिबंधित पदार्थों के संगठित अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सबूतों के आधार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करना है. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य लोगों की जिंदगी की रक्षा करना है और अब लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ को गंभीर अपराध माना जाएगा.

FDA का कार्यभार संभालने के तुरंत बाद मुंढे को पुणे और पिंपरी चिंचवड़ की जहरीली शराब त्रासदी से निपटना पड़ा, जिसमें कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई थी. उन्होंने तुरंत मौतों से जुड़े प्रतिष्ठान को सील कर दिया और विभाग ने एफआईआर भी दर्ज कराई.

इसके बाद FDA विभाग ने ठाणे जिले के भिवंडी स्थित एक गोदाम से लगभग 6,000 किलोग्राम जहरीला मेथनॉल जब्त किया, जो कथित तौर पर नकली शराब बनाने वाले तस्करों को यह रसायन सप्लाई कर रहा था. यह गोदाम भिवंडी की रेक्स इंटरनेशनल से जुड़ा हुआ था.

FDA की ओर से जारी बयान के मुताबिक, यह घातक देसी शराब रेक्स इंटरनेशनल से लाए गए औद्योगिक मेथनॉल से मिलाई गई थी.

इसके अलावा विभाग ने शराब के लाइसेंस पाने वाली 938 दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच की. एक FDA अधिकारी ने कहा कि अब तक 600 से ज्यादा लाइसेंसों की जांच की जा चुकी है और बाकी 300 की जांच एक-दो दिन में पूरी हो जाएगी, ताकि “पुणे जैसी जहरीली शराब त्रासदी दोबारा न हो.”

अपनी E3 रणनीति के बारे में मुंढे ने कहा कि पहला उद्देश्य लोगों को सशक्त बनाना है, यानी उन्हें खाद्य सुरक्षा कानून और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के नियमों के बारे में जागरूक करना. दूसरा उद्देश्य कारोबार को सक्षम बनाना है, यानी ऐसा माहौल देना जिसमें वे कानून का पालन कर सकें. उन्होंने कहा, “जो लोग कानून का पालन करते हैं, हम उनके दोस्त हैं और उन्हें डरने की जरूरत नहीं है.”

और तीसरा है उन लोगों के खिलाफ कानून लागू करना जो नियमों का पालन नहीं करते. “ऐसे लोगों के पास छिपने की कोई जगह नहीं होगी.”

FDA विभाग की बड़ी छापेमारी में से एक पतंजलि पर की गई कार्रवाई थी. मुंबई, पुणे, कोंकण, नासिक, अमरावती, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर में एक साथ छापे मारे गए, जहां दिव्य फार्मेसी की बनाई गई दवाएं जब्त की गईं. इसके उत्पादों में दृष्टि आई ड्रॉप, गिलोय घन वटी, कुटज घन वटी, सिस्टोग्रिट डायमंड टैबलेट और न्यूरोग्रिट गोल्ड कैप्सूल शामिल थे, जिनकी कुल कीमत 51 लाख रुपये थी.

अधिकारियों ने कहा कि पतंजलि पर यह छापा भ्रामक विज्ञापनों को लेकर मारा गया, जिनमें कुछ बीमारियों के “चमत्कारी” इलाज का दावा किया गया था. ऊपर बताए गए कुछ उत्पादों का कथित तौर पर “चमत्कारी इलाज” और “गारंटीड उपचार” जैसे दावों के साथ प्रचार किया जा रहा था, जिसकी अनुमति ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के तहत नहीं है.

मुंढे ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अगर सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा पहुंचता है और उससे समझौता किया जाता है, तो किसी को भी कोई छूट या विशेष रियायत नहीं दी जाएगी.

छापों के बाद पतंजलि ने राहत और उत्पादों की लेबलिंग पर एक समान नीति की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया. कंपनी ने आरोप लगाया कि उसे निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन मुंढे ने इस दावे को खारिज कर दिया.

बुधवार को महाराष्ट्र सरकार ने चुनिंदा कार्रवाई के आरोप से इनकार किया और अदालत को भरोसा दिलाया कि फिलहाल दिव्य फार्मेसी या पतंजलि के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.

दिप्रिंट ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दिव्य फार्मेसी की ओर से पेश हो रहे वकील बीरेंद्र सराफ से फोन और संदेश के जरिए संपर्क किया. दिप्रिंट ने ईमेल के जरिए पतंजलि से भी संपर्क किया. जवाब मिलने पर इस खबर को अपडेट किया जाएगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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