नयी दिल्ली, छह नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को समाचार पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ और उसके प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर जवाब मांगा, जिसके तहत एफडीआई नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े धनशोधन के मामले को रद्द कर दिया गया था।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने न्यूजक्लिक और पुरकायस्थ को नोटिस जारी किया तथा चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा।
सुनवाई की शुरुआत में ईडी की ओर से पेश वकील ने कहा कि एजेंसी की ओर से पैरवी करने वाले अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया जाए।
इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि इस अपील से भरोसा नहीं पैदा होता।
ईडी के वकील ने दलील दी कि दिल्ली पुलिस भी मूल अपराध से संबंधित प्राथमिकी रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देने की प्रक्रिया में है। उन्होंने इसके लिए भी चार सप्ताह का समय मांगते हुए सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया।
उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका में ईडी ने दलील दी कि उच्च न्यायालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले की जांच किए बिना ही उसकी प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) रद्द कर दी। एजेंसी ने यह भी कहा कि फैसले की घोषणा करने में पांच महीने की असामान्य देरी हुई।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 29 मई को कहा था कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की ओर से दर्ज प्राथमिकी को जारी रखना ‘कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग’ है। अदालत ने कहा था कि जब मूल अपराध से संबंधित प्राथमिकी ही रद्द कर दी गई है, तो इस मामले में ईडी की ओर से दर्ज ईसीआईआर भी बंद की जानी चाहिए।
ईओडब्ल्यू की ओर से 2020 में दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि न्यूजक्लिक की मूल कंपनी पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड को वित्त वर्ष 2018-19 में अमेरिका की कंपनी वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी से 9.59 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मिला था। आरोप था कि यह विदेशी निवेश कानून का उल्लंघन करके प्राप्त किया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
भाषा गोला वैभव
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