नई दिल्ली: खुद को भगवान शिव का अवतार बताने वाला अशोक खरात कथित तौर पर काला जादू, डर और रिमोट से चलने वाले सांपों व बाघ की खाल से जुड़े नकली धार्मिक अनुष्ठानों का इस्तेमाल कर भक्तों से करोड़ों रुपये वसूलता था.
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सामने आया है कि बदकिस्मती और यहां तक कि मौत के डर से भक्त उसे भारी रकम देते थे. एक पीड़ित ने 5.6 करोड़ रुपये और दूसरे ने 3.8 करोड़ रुपये दिए.
अशोक खरात पहले से ही रेप, यौन शोषण और धोखाधड़ी के कई मामलों का सामना कर रहा है. ईडी के मुताबिक उसने करीब 70 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई और उसकी मनी लॉन्ड्रिंग की.
जांच के अनुसार, भक्तों से मिले पैसे को अलग-अलग लोगों के नाम पर खोले गए करीब 60 बैंक खातों के जरिए घुमाया गया. ये खाते कथित तौर पर उन लोगों की जानकारी या सहमति के बिना खोले गए थे.
मंगलवार को मुंबई की अदालत में खरात की रिमांड मांगते हुए ईडी ने कहा कि उसने इन खातों से अपना मोबाइल नंबर जोड़ा हुआ था और कई खातों में खुद को नॉमिनी भी बनाया था.
जांच एजेंसियों का कहना है कि यही वह नेटवर्क था, जिसके जरिए खरात ने अपने भक्तों पर प्रभाव और नियंत्रण बनाकर जुटाई गई भारी संपत्ति को छिपाया और घुमाया.
ईडी के मुताबिक, पैसे को सफेद दिखाने के लिए उसने बेनामी बैंक खातों, सहकारी क्रेडिट सोसायटियों (पतपेढ़ियों), संपत्तियों की खरीद और तीसरे पक्ष के वित्तीय साधनों का जाल बनाया. बाद में इन पैसों से देश के अलग-अलग हिस्सों में जमीन और संपत्तियां खरीदी गईं.
ईडी के एक अधिकारी ने कहा, “वह दावा करता था कि उसके पास अलौकिक शक्तियां और विशेष धार्मिक ज्ञान है. उसने ऐसा डर का माहौल बनाया कि लोग पैसे देने लगे.”
अधिकारी ने कहा, “उसने धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर, दबाव और उगाही के जरिए अपराध से कमाई की और फिर उसकी मनी लॉन्ड्रिंग की.”
ईडी ने अदालत को बताया कि आरोपी ने पीड़ितों की धार्मिक भावनाओं और कमजोरियों का फायदा उठाते हुए उन्हें “अवतार पूजा” और अन्य फर्जी धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर भारी रकम देने के लिए मजबूर किया.
18 मार्च को नासिक पुलिस ने एक महिला की शिकायत के बाद खरात को गिरफ्तार किया था. महिला ने आरोप लगाया था कि उसने तीन साल तक उसके साथ कई बार रेप किया.
बैंक खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट का जाल
ईडी के मुताबिक, खरात ने समता नगरी कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी (समता पतसंस्था) की राहाता शाखा में अलग-अलग लोगों के नाम पर गुपचुप तरीके से 60 बैंक खाते खुलवाए. इन खातों से अपना मोबाइल नंबर लिंक किया और खुद को नॉमिनी बनाया.
ईडी ने कहा, “इन 60 खातों से जुड़े 48 विशेष बचत खातों में 47.74 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन हुआ. इसमें 21.26 करोड़ रुपये नकद जमा और 23.87 करोड़ रुपये नकद निकाले गए.”
जांच में पता चला कि सभी लेनदेन जानबूझकर 2 लाख रुपये से कम रखे गए, ताकि केवाईसी नियमों से बचा जा सके.
ईडी ने अपने रिमांड नोट में कहा, “अशोक खरात और उसका सहयोगी अरविंद बावके पहले से साइन किए गए निकासी स्लिप का इस्तेमाल कर नकद जमा और निकासी करते थे.”
जांच में यह भी सामने आया कि खरात ने श्री जगदंबा माता ग्रामीण बिगर शेती सहकारी पतसंस्था में पहले उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष रहते हुए 2014 से 2024 के बीच 34 बेनामी फिक्स्ड डिपॉजिट खाते खोले. ये खाते कथित तौर पर फर्जी लोगों, खुद उसके और उसकी पत्नी कल्पना खरात के नाम पर खोले गए.
ईडी ने अदालत को बताया, “इन सभी खातों को बिना सही केवाईसी दस्तावेज़ और खाता खोलने के फॉर्म के खोला गया. इन खातों में कुल 1.86 करोड़ रुपये जमा किए गए, जो मैच्योरिटी पर बढ़कर 3.18 करोड़ रुपये हो गए.”
ईडी के मुताबिक, “मैच्योरिटी की रकम समय से पहले निकाल ली गई, बचत खातों में ट्रांसफर की गई, फिर नकद निकाली गई और सीधे अशोक खरात को पतसंस्था कार्यालय में उसकी निजी यात्राओं के दौरान सौंप दी गई.”
संपत्ति और ज़मीन की खरीद
ईडी के अनुसार, बाद में इन पैसों का इस्तेमाल जमीन और रियल एस्टेट खरीदने में किया गया.
ईडी ने अदालत से कहा, “खरात ने अपराध से कमाए गए पैसों से अपने और परिवार के सदस्यों व सहयोगियों के नाम पर कई अचल संपत्तियां खरीदीं. इनमें नकद भुगतान भी शामिल था, जिससे अवैध पैसों को वैध संपत्ति की तरह दिखाया गया.”
ईडी ने कहा, “जांच के तहत चल रही मनी लॉन्ड्रिंग योजना का मुख्य मास्टरमाइंड और सबसे बड़ा लाभार्थी अशोक खरात ही है.”
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