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Saturday, 23 May, 2026
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पंजाब विजिलेंस रिश्वत केस: फरार आरोपी को संवेदनशील फाइलों तक पहुंच थी, CBI ने कोर्ट को बताया

CBI ने पिछले हफ़्ते चंडीगढ़ की विशेष CBI अदालत में आरोपी कर्मचारी OP राणा की अग्रिम ज़मानत याचिका के जवाब में यह खुलासा किया, जिसे गुरुवार को खारिज कर दिया गया.

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नई दिल्ली: पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के एक अधिकारी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पाया है कि आरोपी ओम प्रकाश सिंह राणा बिना किसी आधिकारिक पोस्टिंग आदेश के ब्यूरो प्रमुख के रीडर के तौर पर काम कर रहा था। उसे जुलाई 2020 में आईपीएस अधिकारी शरद सत्य चौहान का रीडर नियुक्त किया गया था, जब चौहान पंजाब के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ट्रैफिक) के पद पर तैनात थे.

जांच एजेंसी ने राणा के बारे में यह खुलासा पिछले हफ्ते चंडीगढ़ की विशेष CBI अदालत में दायर उसकी अग्रिम जमानत याचिका के जवाब में किया, जिसे गुरुवार को खारिज कर दिया गया। राणा इस महीने की शुरुआत में चंडीगढ़ के एक पांच सितारा होटल से CBI की गिरफ्तारी से कथित तौर पर बच निकला था, जहां वह कथित तौर पर 13 लाख रुपये की रिश्वत और एक महंगा सैमसंग फोन लेने पहुंचा था। वह अब भी फरार है.

दिप्रिंट ने पहले खबर दी थी कि पंजाब के एक टैक्स अधिकारी की शिकायत के बाद राणा जांच के दायरे में आया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राणा ने अपने बॉस विजिलेंस ब्यूरो प्रमुख चौहान के पास लंबित केस बंद करने के लिए 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी.

CBI के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में तीन बिचौलियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें पिता-पुत्र की एक जोड़ी भी शामिल है। विकास उर्फ विक्की गोयल और उसका बेटा राघव गोयल, साथ ही अंकित वाधवा नाम के एक अन्य व्यक्ति ने राणा की ओर से रिश्वत की रकम तय की थी। राघव गोयल भारतीय जनता पार्टी (BJP) की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) का मलोट में सदस्य है.

विशेष CBI जज भावना जैन ने राणा की याचिका पर CBI के जवाब का हवाला देते हुए कहा, “याचिकाकर्ता (राणा) को 29.07.2020 के ऑफिस पोस्टिंग आदेश के तहत ADGP/ट्रैफिक (पंजाब) के रीडर के तौर पर लगाया गया था, लेकिन वह बिना किसी औपचारिक पोस्टिंग आदेश के पंजाब के DGP/विजिलेंस के रीडर के तौर पर काम करता रहा और खुद को उसी हैसियत में पेश करता रहा। DGP (विजिलेंस) पंजाब के कार्यालय में उसकी पोस्टिंग या अटैचमेंट से जुड़ा कोई बाद का आदेश अब तक नहीं मिला है.”

एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि पंजाब पुलिस ने सोमवार को राणा को सस्पेंड कर दिया। एजेंसी का कहना था कि आरोपी के पास विजिलेंस विभाग में लंबित मामलों से जुड़ी संवेदनशील और गोपनीय फाइलों तक पहुंच थी और वह वहां के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कथित तौर पर “लगातार संपर्क” में था, जिससे “पहली नजर में यह पता चलता है कि विजिलेंस शिकायतों, जांच और FIR से जुड़ी गोपनीय और संवेदनशील जानकारी निजी लोगों के साथ साझा की गई.”

CBI ने अपना यह दावा भी दोहराया कि एजेंसी के अधिकारियों ने जब बिचौलिए वाधवा को पकड़ने के लिए ट्रैप कार्रवाई की, उस समय राणा मौके पर मौजूद था। एजेंसी के मुताबिक, इसके बाद वह गोयल परिवार के साथ वहां से भाग गया। एजेंसी ने पहले दावा किया था कि गोयल परिवार की सुरक्षा में तैनात हथियारबंद पंजाब पुलिस कर्मियों ने तुरंत CBI अधिकारियों को इसकी जानकारी दी थी.

दिप्रिंट ने टिप्पणी के लिए व्हाट्सऐप कॉल और मैसेज के जरिए आईपीएस चौहान से संपर्क करने की कोशिश की। जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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