मुंबई: यह कहते हुए कि यह बहुत ही दुर्लभ मामलों में से एक है और अपराध की भयावहता को देखते हुए मौत की सजा भी शायद पर्याप्त नहीं है, पुणे की एक विशेष (POCSO) अदालत ने इस सप्ताह की शुरुआत में 65 वर्षीय भीमराव प्रभाकर कांबले को नसरापुर में 3 साल की बच्ची से बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई. अदालत ने कहा कि “वासना की संतुष्टि” ही उसका एकमात्र मकसद था और यही मकसद मौत की सजा देने के लिए “पर्याप्त आधार” है.
दिप्रिंट को मिले फैसले में यह भी कहा गया कि “योनि और गुदा में प्रवेश के साफ सबूत” मिले हैं, साथ ही “मुंह के जरिए यौन शोषण की संभावना” भी है.
सुनवाई के दौरान अदालत ने उन बच्चों की गवाही पर भी भरोसा किया जो घटना से पहले पीड़िता के साथ लुका-छिपी खेल रहे थे. साथ ही एक स्थानीय दुकानदार की गवाही भी मानी, जिसने कांबले को बच्ची के साथ घटना वाली जगह की तरफ जाते हुए देखा था.
फैसला लिखने वाले विशेष न्यायाधीश एस. आर. सालुंखे ने कहा कि अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, सीसीटीवी फुटेज और घटनास्थल की तस्वीरों की जांच की ताकि कांबले की बर्बरता की गंभीरता का पता लगाया जा सके.
भीमराव कांबले को दोषी ठहराया जाना पिछले दस साल से ज्यादा समय में दूसरा मामला है, जिसमें महाराष्ट्र की किसी अदालत ने POCSO मामले में सुनवाई शुरू होने के 60 दिनों से कम समय में फैसला दिया. इससे पहले एक अदालत ने 45 दिनों के भीतर वाशी निवासी दत्तात्रय रोकड़े को 2013 में अपनी 5 साल की पड़ोसी बच्ची से बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई थी. उसकी सजा को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बरकरार रखा था, लेकिन 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे उम्रकैद में बदल दिया. मौजूदा मामले में घटना के 16 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी और सुनवाई 28 मई से शुरू हुई.
घटनाक्रम
फैसले में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार, घटना वाले दिन यानी 1 मई को कांबले श्रीराम मंदिर की सीढ़ियों पर बैठा हुआ दिखा, जहां पीड़िता अपने दोस्तों के साथ लुका-छिपी खेल रही थी. प्रत्यक्षदर्शियों ने अदालत को बताया कि करीब 2.30 बजे कांबले ने ईंट फेंककर बाकी बच्चों को वहां से भगा दिया.
करीब 4 बजे बच्ची की दादी ने देखा कि वह गायब है. उन्होंने परिवार के लोगों को बताया और परिवार व पड़ोसियों ने मिलकर बच्ची की तलाश शुरू की. तलाश के दौरान जब उन्होंने सीसीटीवी फुटेज देखी तो उसमें कांबले बच्ची को ले जाते हुए दिखाई दिया.
आखिरकार उन्होंने कांबले को ढूंढ लिया, लेकिन बच्ची नहीं मिली. जब उन्होंने गोशाला में तलाश की तो उसकी लाश एक बोरे के नीचे मिली. फैसले में दर्ज जानकारी के अनुसार उसकी लेगिंग उसके मुंह में ठूंसी हुई थी और उसके चेहरे, सीने तथा गुप्तांगों के पास खून के थक्के और चोटें थीं.
गवाह
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 55 गवाह पेश किए. इनमें गांव के लोग, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और जांच अधिकारी सहित कई लोग शामिल थे.
मुख्य गवाहों में संदीप और संध्या गायवाल शामिल थे, जिनकी गोशाला में कांबले ने यह अपराध किया. संध्या ने अदालत को बताया कि उनका परिवार जरूरत पड़ने पर कांबले को खेत में मजदूरी के लिए रखता था, लेकिन वह नियमित रूप से गायों को चारा खिलाता था और गोशाला साफ करता था. वह गोशाला के पास बने टीन के शेड में रहता था. उन्होंने यह भी बताया कि घटना से एक दिन पहले कांबले ने शायद पहली बार बच्ची को देखा था, जब वह आसपास के दूसरे बच्चों के साथ नवजात बछड़े को देखने गोशाला आई थी.
संदीप गायवाल के भतीजे ओमकार भी इस मामले के अहम गवाह थे.
ओमकार और उसकी बहन समीक्षा ने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद सबसे पहले कांबले को बच्ची के साथ गोशाला की तरफ जाते हुए देखा था.
अदालत ने योगेश जंगम की गवाही भी स्वीकार की. अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, घटना वाली सुबह कांबले ने जंगम से एक नमकीन खरीदी थी. इसी वजह से जब जंगम ने करीब 3.12 बजे कांबले और बच्ची को गोशाला की तरफ जाते देखा तो वह उसे पहचान गया. करीब 3.51 बजे जंगम ने कांबले को गोशाला से निकलकर सार्वजनिक पानी की टंकी की तरफ जाते हुए भी देखा.
अदालत ने तीन बच्चों मोहम्मद आगा, आशान अंसारी और रुद्र सालुंखे की गवाही पर भी भरोसा किया. पहचान परेड के दौरान तीनों ने कांबले को उसी व्यक्ति के रूप में पहचाना जिसे उन्होंने श्रीराम मंदिर की सीढ़ियों पर बैठे देखा था.
विशेष POCSO अदालत ने कहा, “ये बच्चे पहले से आरोपी को जानते थे क्योंकि वह उनके स्कूल में सफाई कर्मचारी के रूप में काम करता था. अदालत में गवाही देने की उनकी क्षमता की ठीक से जांच की गई और उन्हें सच बोलने के योग्य पाया गया.”
‘दम घुटने से मौत’
फैसले के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर 18 चोटों का जिक्र था, जो किसी कठोर और भारी चीज से लगी थीं.
अदालत ने माना कि “मुंह और नाक दबाने तथा मुंह बंद करने के मिले-जुले असर से दम घुटने और सीने पर भारी चोट के कारण उसकी मौत हुई. यह हत्या थी. साथ ही हाल में हुए यौन हमले के सबूत भी मिले, जिनमें योनि में प्रवेश, गुदा में प्रवेश और शरीर पर वीर्य पाया जाना शामिल है.”
अदालत ने कहा कि यौन हमले को साबित करने के “पक्के सबूत” हैं और मेडिकल रिपोर्ट साफ बताती है कि बच्ची के साथ “बेहद क्रूर तरीके से बलात्कार और यौन शोषण किया गया और उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई.”
अदालत ने यह भी पाया कि ऐसे सबूत हैं जो बताते हैं कि “उसकी मौत के बाद भी” यौन शोषण की कोशिश की गई.
फैसले में कहा गया, “उसकी लेगिंग उसके मुंह में 21 सेंटीमीटर गहराई तक ठूंस दी गई थी, जो उसकी मौत का कारण बनने के लिए काफी थी. ये सभी परिस्थितियां इस बात में कोई शक नहीं छोड़तीं कि आरोपी ने ही यह अपराध किया.”
आरोपी का पिछला रिकॉर्ड
सुनवाई के दौरान कांबले ने माना कि 1998 में जब वह 36 साल का था तब उस पर एक महिला से बलात्कार की कोशिश का आरोप लगा था. इसके 17 साल बाद, जब वह 53 साल का था, उस पर अपनी 17 साल की भतीजी की इज्जत भंग करने की कोशिश करने और उसे हंसिया दिखाकर धमकाने का एक और मामला दर्ज हुआ.
इन दोनों मामलों में उसे बरी कर दिया गया था.
मौजूदा सुनवाई के दौरान कांबले के एक रिश्तेदार ने 1996 की एक घटना भी बताई. उसने कहा कि वह गांव सालवडे के पास पहाड़ी पर बकरियां और मवेशी चरा रहा था, तभी उसने कांबले को एक बकरी के साथ यौन शोषण करने की कोशिश करते देखा.
अभियोजन पक्ष ने कहा कि कांबले का पिछला रिकॉर्ड इस बात का सबूत है कि वह “समाज के लिए खतरा बना हुआ है क्योंकि उसे कोई पछतावा नहीं है और उसमें सुधार की कोई संभावना नहीं है.”
विशेष POCSO अदालत ने बचाव पक्ष की यह दलील भी सुनी कि अभियोजन का पूरा मामला ‘आखिरी बार साथ देखे जाने’ के सिद्धांत और परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित है.
लेकिन आखिर में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने “परिस्थितियों की लगातार और पूरी कड़ी स्थापित करके” बिना किसी उचित संदेह के कांबले का अपराध साबित कर दिया.
अपने अंतिम निष्कर्ष में अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत “पूरी तरह साबित करते हैं” कि कांबले ने ही यह अपराध किया.
अदालत ने कहा, “आरोपी की इस अपराध में भूमिका सीसीटीवी फुटेज जैसे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से पूरी तरह साबित हो गई है. यौन और शारीरिक हमले मेडिकल सबूतों से साबित हुए हैं. इन हमलों का आरोपी द्वारा किया जाना डीएनए, वीर्य और दूसरी फॉरेंसिक रिपोर्ट जैसे वैज्ञानिक सबूतों से साबित हुआ है.”
अदालत ने यह भी कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और यौन क्षमता की जांच रिपोर्ट से पता चला कि कांबले शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और यौन रूप से सक्षम था. यहां तक कि “मौत की सजा भी शायद पर्याप्त नहीं है, लेकिन ऐसे अपराध के लिए यही सबसे बड़ी सजा दी जा सकती है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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