नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट ने राजस्थान से चल रहे साइबर ठगी के सात सदस्यों वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. यह कार्रवाई एक बैंक अकाउंट पर कथित तौर पर बिना अनुमति कब्जा करने और करीब 3.93 करोड़ रुपये के 149 फर्जी लेनदेन से जुड़े मामले में की गई है.
पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क म्यूल बैंक अकाउंट की व्यवस्था करने, नकद पैसे निकालने और अपराध से हुई संदिग्ध कमाई को कई स्तरों के जरिए ट्रांसफर करने में शामिल था. आरोपियों ने गिरफ्तारी के बाद पुलिस को यह जानकारी दी. उन्होंने अवैध नकद पैसे को छिपाने और उसे दूसरे रूप में बदलने के लिए विदेशी फोन नंबरों और यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदलने का इस्तेमाल किया.
गिरफ्तार किए गए सात लोगों में पीयूष तलानिया (19), बृज लाल (29), विपिन चनवारिया (19), सुनील (23), विक्रम (23), राकेश बहादू (26) और हेमंत सिंह (23) शामिल हैं.
आरोपियों में से एक बृज लाल कथित तौर पर 95 लाख रुपये की ठगी वाले एक “बॉस स्कैम” में भी शामिल था. उसके संबंध एक विदेशी मनी-एक्सचेंज ऐप और एक हवाला चैनल से भी बताए गए हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध से हुई संदिग्ध कमाई को बदलने और आगे भेजने के लिए किया जाता था.
पुलिस ने 45 चेक बुक, 25 बैंक पासबुक, 45 एटीएम कार्ड और 13 मोबाइल फोन बरामद किए हैं. पुलिस के मुताबिक, बरामद सामान इस जांच के लिए महत्वपूर्ण है कि बैंक अकाउंट का कथित तौर पर कैसे इस्तेमाल किया गया, पैसे कैसे ट्रांसफर किए गए और इसमें शामिल लोगों के बीच क्या संभावित संबंध हैं. पुलिस ने कहा कि इन सामानों का सबूत के तौर पर महत्व जांचा जा रहा है.
आईएफएसओ के डीसीपी गौरव त्यागी ने कहा, “यूएसडीटी लेनदेन, मनी-एक्सचेंज ऐप और हवाला चैनल में शामिल सिंडिकेट, बरामद सामान और डेटा के दूसरे अपराधों से संबंध आदि का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है.”
जांच
5 अक्टूबर को नई दिल्ली के पुलिस स्टेशन स्पेशल सेल/आईएफएसओ में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) (धोखाधड़ी और बेईमानी से किसी को संपत्ति देने के लिए मजबूर करना), 319 (किसी और की पहचान बनाकर धोखाधड़ी करना), 340 (जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना और उन्हें असली बताकर इस्तेमाल करना) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. यह एफआईआर प्रिंस बंसल (28) की शिकायत पर दर्ज हुई थी. वह एनबीएफसी और लोन से जुड़े लेनदेन का काम करते हैं और आईसीआईसीआई बैंक में एक बैंक अकाउंट रखते हैं. उन्होंने बताया कि 5 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे उनके बैंक अकाउंट से उनकी जानकारी या सहमति के बिना “149 अनधिकृत लेनदेन हुए”.
पुलिस के मुताबिक, अकाउंट से 3,93,59,000 रुपये यानी करीब 3.93 करोड़ रुपये निकाल लिए गए. नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल ने 1.78 करोड़ रुपये की राशि पर लियन/होल्ड लगा दिया. लियन या होल्ड बैंक अकाउंट में मौजूद रकम के एक हिस्से को कुछ समय के लिए रोकने को कहते हैं, जिससे उसे निकाला या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता. ऐसा साइबर अपराध या विवाद की शिकायतों समेत कई कारणों से किया जा सकता है.
शिकायत के बाद बिना अनुमति हुए लेनदेन और पैसों के ट्रांसफर की जांच शुरू की गई. पैसे के रास्ते का पता लगाने और इसमें शामिल लोगों की पहचान के लिए टीमें बनाई गईं. जांच टीम राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर और दूसरे इलाकों तक पहुंची.
इस कार्रवाई में बड़े स्तर पर फील्ड वर्क, बैंक लेनदेन की जांच, संदिग्ध अकाउंट धारकों का सत्यापन, स्थानीय जानकारी जुटाना और कथित तौर पर पैसे के ट्रांसफर और निकासी में शामिल लोगों के बीच संबंधों का पता लगाना शामिल था. पुलिस ने कहा कि लगातार प्रयास और मिलकर की गई जांच के जरिए टीम को अहम सुराग मिले और वित्तीय लेनदेन की इस कड़ी में कई अकाउंट धारकों और मदद करने वालों की कथित भूमिका का पता चला.
जांच में उस समय बड़ी सफलता मिली जब बृज लाल को पकड़ा गया. वह आईएफएसओ के एक दूसरे साइबर ठगी के मामले में भी वांछित था. पुलिस ने एक बयान में कहा, “उसकी गिरफ्तारी से दोनों मामलों की जांच में मदद मिली और संदिग्ध नेटवर्क की आगे की कड़ियों का पता चला.” भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 84 (फरार व्यक्ति को पेश होने की घोषणा) के तहत कार्रवाई अब अदालत में लंबित है.
धोखाधड़ी कैसे की गई
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर बैंक अकाउंट तक बिना अनुमति पहुंच बनाई, जिसके बाद 149 अनधिकृत लेनदेन हुए. पुलिस के मुताबिक, अपराध से हुई संदिग्ध कमाई को कई बैंक अकाउंट के जरिए कई स्तरों में ट्रांसफर किया गया. कथित तौर पर इन अकाउंट की व्यवस्था या संचालन अलग-अलग लोगों ने किया था, ताकि पैसों के रास्ते का पता लगाना मुश्किल हो.
पुलिस ने कहा, “कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर म्यूल अकाउंट से बड़ी रकम निकाली और नेटवर्क के दूसरे लोगों को नकद पैसे दिए. कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर अपने या दूसरे लोगों के बैंक अकाउंट की व्यवस्था की या उनका इस्तेमाल कराने में मदद की, ताकि अपराध से हुई संदिग्ध कमाई को इन अकाउंट के जरिए आगे भेजा जा सके.”
बृज लाल की भूमिका की जांच में ‘यू होम’ नाम के एक “मनी-एक्सचेंज ऐप” और एक हवाला चैनल से कथित संबंध सामने आए. पुलिस के मुताबिक, इस चैनल का इस्तेमाल पैसे को आगे भेजने और उसे यूएसडीटी में बदलने के लिए किया जाता था.
पुलिस ने कहा, “पूछताछ के दौरान बृज लाल ने कथित तौर पर बताया कि हवाला ऑपरेटर के कहने पर खन्ना में एक व्यक्ति को नकद पैसे दिए गए. इस पहलू की आगे जांच की जा रही है.”
पुलिस ने हर व्यक्ति की भूमिका बताते हुए कहा कि बीकानेर के रहने वाले तलानिया की पहचान दूसरे स्तर के म्यूल बैंक अकाउंट के धारक के तौर पर हुई. इस अकाउंट से कथित तौर पर 9.5 लाख रुपये निकाले गए और सह-आरोपी फालोदी जिले के रहने वाले बृज लाल को दिए गए.
पुलिस ने कहा, “पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर बताया कि उसके पास ‘यू होम’ मनी-एक्सचेंज ऐप पर एक वॉलेट आईडी थी और मोबाइल नंबर +85254885189 के जरिए उसका एक विदेशी साइबर नेटवर्क से संपर्क था. उसने कथित तौर पर म्यूल अकाउंट में अपराध से हुई संदिग्ध कमाई हासिल की, नकद पैसे निकाले और हवाला ऑपरेटर के जरिए यूएसडीटी खरीदने के लिए उसका इस्तेमाल किया.”
उसने आगे बताया कि हवाला ऑपरेटर के कहने पर खन्ना में एक व्यक्ति को नकद पैसे दिए गए.
इसके अलावा, बीकानेर के रहने वाले चनवारिया के नाम पर कई म्यूल बैंक अकाउंट मिले. इन अकाउंट में तलानिया से जुड़े अकाउंट के साथ लेनदेन भी पाए गए. जांच के दौरान उसने बताया कि 12 अक्टूबर को उसने बृज लाल के कहने पर 7 लाख रुपये निकाले और उसे नकद पैसे दे दिए.
पुलिस को सुनील के नाम पर भी कई म्यूल बैंक अकाउंट मिले. पैसे के ट्रांसफर में मदद करने में उसकी कथित भूमिका और दूसरे आरोपियों के साथ उसके संबंधों की जांच की जा रही है. विक्रम ने कथित तौर पर बृज लाल के लिए म्यूल बैंक अकाउंट की व्यवस्था करने में मदद की थी. इनमें सह-आरोपी हेमंत सिंह के बैंक अकाउंट भी शामिल थे. इन अकाउंट की व्यवस्था करने और इनके इस्तेमाल में मदद करने में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है.
जांच के दौरान बहादू के नाम पर म्यूल बैंक अकाउंट और तलानिया से जुड़े अकाउंट के साथ लेनदेन की पहचान हुई. अपराध से हुई संदिग्ध कमाई के ट्रांसफर या निकासी में मदद करने में उसकी कथित भूमिका की जांच की जा रही है.
हेमंत सिंह ने कथित तौर पर बृज लाल के लिए म्यूल बैंक अकाउंट की व्यवस्था करने में मदद की. उससे जुड़े अकाउंट और दूसरे आरोपियों के साथ उसके संबंधों की जांच की जा रही है, ताकि कथित तौर पर उसकी भूमिका कितनी थी, यह पता लगाया जा सके.
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