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Thursday, 7 May, 2026
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ऑपरेशन सिंदूर भारत की रणनीतिक यात्रा का निर्णायक मोड़ था: पूर्व DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई

पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद भारत ने कड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था.

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जयपुर: पूर्व सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने गुरुवार को ऑपरेशन सिंदूर को भारत की रणनीतिक यात्रा का “निर्णायक मोड़” बताया. यह बयान उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए सैन्य अभियान की पहली वर्षगांठ पर दिया.

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के रवैये में बड़ा बदलाव था.

पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद भारत ने कड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था.

जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल घई, जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डीजीएमओ थे, ने कहा, “आज ऑपरेशन सिंदूर को हुए एक साल पूरा हो गया है. उस समय डीजीएमओ के रूप में मैं इसे सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक यात्रा का निर्णायक क्षण मानता हूं. ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने बहुत सोच-समझकर अपनी पुरानी रणनीतियों से आगे बढ़ते हुए नियंत्रण रेखा (LoC) और पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार आतंकियों को निशाना बनाया.”

घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर “अंत नहीं बल्कि शुरुआत” था और आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.

उन्होंने कहा, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं. मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए. ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं था, यह सिर्फ शुरुआत थी. आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी. एक साल बाद हम सिर्फ इस ऑपरेशन को नहीं, बल्कि इसके पीछे के सिद्धांत को भी याद कर रहे हैं. भारत अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और लोगों की रक्षा पूरी मजबूती, पेशेवर तरीके और जिम्मेदारी के साथ करेगा.”

उन्होंने कहा कि सरकार ने सेना को स्पष्ट राजनीतिक और सैन्य लक्ष्य दिए थे, साथ ही उन्हें हासिल करने के लिए पूरी ऑपरेशनल स्वतंत्रता भी दी गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य आतंकी ढांचे को नष्ट करना, उनकी योजनाओं को बाधित करना और भविष्य के हमलों को रोकना था.

उन्होंने कहा, “पूरी सटीकता, संतुलन और स्पष्ट उद्देश्य के साथ यह अभियान भारत के संकल्प, जिम्मेदारी और रणनीतिक संयम का संदेश था. शुरुआत से ही सरकार ने हमें दो स्पष्ट निर्देश दिए थे—साफ राजनीतिक-सैन्य लक्ष्य और उन्हें हासिल करने की पूरी स्वतंत्रता. आतंक के ढांचे को खत्म करना, उनकी योजनाओं को तोड़ना और भविष्य की आक्रामकता को रोकना हमारे स्पष्ट लक्ष्य थे. सेना को इस अभियान की योजना बनाने और उसे अंजाम देने के लिए जरूरी संसाधन दिए गए थे.”

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आतंकी ठिकानों पर हमला किया.

7 मई 2025 को शुरू किए गए इस अभियान में भारत ने पाकिस्तान और PoJK में मौजूद नौ बड़े आतंकी लॉन्चपैड को सफलतापूर्वक नष्ट किया. इनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन के ठिकाने शामिल थे. इस कार्रवाई में भारतीय सेना ने 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया.

इसके जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन हमले और गोलाबारी की, जिसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिन तक संघर्ष चला. भारत ने मजबूत जवाबी कार्रवाई करते हुए लाहौर में रडार इंस्टॉलेशन और गुजरांवाला के पास रडार सुविधाओं को नष्ट कर दिया.

भारी नुकसान के बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क किया और 10 मई को युद्धविराम पर सहमति बनी, जिसके बाद संघर्ष खत्म हुआ.

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