नई दिल्ली: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में किशोरों द्वारा किए गए अपराधों में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इसके अलावा, बच्चों के खिलाफ अपराध में भी 5.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. 2024 में 34,878 मामले दर्ज हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 31,365 थी.
बुधवार को जारी एनसीआरबी रिपोर्ट में कहा गया कि संज्ञेय अपराधों में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है. 2023 में 62.4 लाख मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 58.9 लाख रह गए. वहीं प्रति लाख आबादी पर अपराध दर भी 448.3 से घटकर 418.9 हो गई.
2024 में किशोरों द्वारा किए गए सबसे ज्यादा अपराध बिहार में दर्ज हुए, जहां 5,037 मामले सामने आए. महाराष्ट्र में 3,779 मामले दर्ज हुए, इसके बाद मध्य प्रदेश में 3,474 और तमिलनाडु में 2,946 मामले दर्ज किए गए.
2024 में भारत में किशोरों द्वारा रेप के 1,067 मामले और रेप की कोशिश के 16 मामले दर्ज किए गए. महिलाओं की शील भंग करने की नीयत से हमले के 408 मामले दर्ज हुए. यौन उत्पीड़न के 172 मामले और महिलाओं के कपड़े उतारने की नीयत से हमला या आपराधिक बल प्रयोग के 33 मामले दर्ज किए गए.
रिपोर्ट में कहा गया, “2024 में किशोरों के खिलाफ कुल 34,878 मामले दर्ज किए गए, जो 2023 के 31,365 मामलों के मुकाबले 11.2 प्रतिशत ज्यादा हैं. अपराध दर 2023 में 7.1 से बढ़कर 2024 में 7.9 हो गई. 34,878 मामलों में कुल 42,633 किशोरों को पकड़ा गया. इनमें से 34,648 किशोर आईपीसी और बीएनएस के मामलों में पकड़े गए, जबकि 7,985 किशोर स्पेशल और लोकल लॉ (एसएलएल) के मामलों में पकड़े गए. आईपीसी, बीएनएस और एसएलएल अपराधों में पकड़े गए ज्यादातर किशोर 16 से 18 साल की उम्र के थे. यह संख्या कुल 42,633 में से 33,129 यानी 77.7 प्रतिशत थी.”
2024 में ही भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू की गई थी.
बच्चों के खिलाफ अपराध
2024 में भारत में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1,87,702 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 1,77,335 थी. यानी एक साल में लगभग 5.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में यह संख्या 1,62,449 थी.
बच्चों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध महाराष्ट्र में दर्ज हुए, जहां 24,171 मामले सामने आए. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 22,222 और मध्य प्रदेश में 21,908 मामले दर्ज किए गए. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बच्चों के खिलाफ अपराध के 7,662 मामले दर्ज हुए.
रिपोर्ट में कहा गया, “2024 में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 1,87,702 मामले दर्ज किए गए, जो 2023 के 1,77,335 मामलों के मुकाबले 5.9 प्रतिशत ज्यादा हैं. प्रतिशत के हिसाब से 2024 में बच्चों के खिलाफ अपराध की बड़ी श्रेणियों में ‘बच्चों का अपहरण और किडनैपिंग’ सबसे ऊपर रही, जिसमें 75,108 मामले यानी 40 प्रतिशत मामले दर्ज हुए. इसके बाद ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट (POCSO)’ के तहत 69,191 मामले यानी 36.9 प्रतिशत मामले दर्ज हुए. प्रति लाख बच्चों की आबादी पर अपराध दर 2024 में 42.3 रही, जबकि 2023 में यह 39.9 थी.”
भारत में बच्चों के रेप के 784 मामले दर्ज हुए. इनमें उत्तर प्रदेश में 275 और हिमाचल प्रदेश में 194 मामले दर्ज किए गए. लड़कियों के यौन उत्पीड़न के 263 मामले और पीछा करने यानी स्टॉकिंग के 123 मामले दर्ज हुए.
रेप के बाद हत्या के मामलों में भारत में बच्चों की हत्या और रेप के 113 मामले दर्ज हुए, जबकि अलग से हत्या के 1,097 मामले दर्ज किए गए.
POCSO के तहत भारत में 69,191 मामले दर्ज किए गए. इसके अलावा लड़कियों को शादी के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से किडनैप या बहला-फुसलाकर ले जाने के 13,192 मामले दर्ज हुए. भ्रूण हत्या के 141 और शिशु हत्या के 56 मामले दर्ज किए गए. लड़कियों की खरीद-फरोख्त या बहला-फुसलाकर ले जाने के 1,661 मामले और लड़कों के 12 मामले दर्ज हुए. 2024 में किडनैपिंग और अपहरण के कुल 70,370 मामले दर्ज किए गए.
एनसीआरबी की स्थापना 1986 में अपराध रिकॉर्ड के राष्ट्रीय भंडार के रूप में की गई थी. यह गृह मंत्रालय के तहत काम करता है.
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