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Thursday, 7 May, 2026
होमदेश2024 में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध 17% बढ़े. MP और महाराष्ट्र का सबसे खराब प्रदर्शन—NCRB

2024 में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध 17% बढ़े. MP और महाराष्ट्र का सबसे खराब प्रदर्शन—NCRB

NCRB के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक अनुसूचित जनजातियों (ST) के खिलाफ दर्ज अपराधों की संख्या 2023 के मुकाबले 23 प्रतिशत घटी. इस मामले में भी मध्य प्रदेश सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला राज्य रहा.

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध में काफी बढ़ोतरी हुई. दर्ज मामलों की संख्या पिछले साल के मुकाबले लगभग 17 प्रतिशत बढ़ गई.

2024 के आंकड़ों के अनुसार, इसी दौरान अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के खिलाफ अपराधों की संख्या 23 प्रतिशत कम हुई. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आदिवासियों को प्रभावित करने वाले अपराधों के 9,966 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह संख्या 12,960 थी.

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या लगभग 6 प्रतिशत घटी. 2024 में 58.85 लाख मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 62.41 लाख थी.

वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध दर्ज करने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य रहे. मध्य प्रदेश में 5,875 और महाराष्ट्र में 4,918 मामले दर्ज हुए. पिछले तीन साल यानी 2022 से ही ये दोनों राज्य इस मामले में लगातार खराब प्रदर्शन कर रहे हैं.
मध्य प्रदेश में 2022 और 2023 में क्रमशः 6,187 और 5,738 मामले दर्ज हुए थे. वहीं महाराष्ट्र में 2022 और 2023 में इसी श्रेणी में क्रमशः 5,059 और 5,115 मामले दर्ज किए गए थे.

कुल मिलाकर, 2024 में 60 साल और उससे ज्यादा उम्र के भारतीय नागरिकों के खिलाफ अपराध के 31,067 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 26,306 थी. महानगरों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला शहर रहा, जहां 1,267 मामले दर्ज हुए. मुंबई दूसरे स्थान पर रहा, जहां 2024 में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े 791 मामले दर्ज किए गए. वहीं इस श्रेणी में महानगरों के बीच कोलकाता सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला शहर रहा, जहां सिर्फ एक मामला दर्ज हुआ.

एसटी के खिलाफ अपराध के मामलों में भी मध्य प्रदेश सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला राज्य रहा, जहां 3,165 मामले दर्ज किए गए. राजस्थान 2,282 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा. बड़ी आदिवासी आबादी वाले महाराष्ट्र में 2024 में 830 मामले दर्ज हुए, जबकि छत्तीसगढ़ और झारखंड में क्रमशः 387 और 260 मामले दर्ज किए गए.

पिछले तीन साल से नागरिक संघर्ष से जूझ रहे मणिपुर ने 2023 में इस मामले में सबसे खराब प्रदर्शन किया था, जहां 3,399 मामले दर्ज हुए थे.
हालांकि, अब स्थिति में सुधार आया है.

राज्य में आदिवासियों के खिलाफ मामलों की संख्या घटकर 289 रह गई है, जहां समय-समय पर सांप्रदायिक झड़पें आम बात बन चुकी हैं.

हत्या से जुड़े अपराध 2024 में 2.4 प्रतिशत बढ़ गए. 2024 में हत्या के 27,049 मामले दर्ज हुए. वहीं अपहरण या किडनैपिंग से जुड़े मामलों की संख्या 15 प्रतिशत घट गई. 2023 में 1,13,564 मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 96,079 रह गए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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