भुवनेश्वर, 29 अगस्त (भाषा) ओडिशा में कांग्रेस विधायकों ने राज्य में तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाने के वास्ते बृहस्पतिवार को राज्यपाल रघुबर दास से हस्तक्षेप की मांग की।
कांग्रेस विधायक पिछले कुछ दिनों से राज्य विधानसभा में इस मुद्दे को उठा रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस विधायक तारा प्रसाद बहिनीपति ने बृहस्पतिवार को शून्यकाल के दौरान फिर इस मुद्दे को उठाया और विधानसभा अध्यक्ष से इस पर व्यवस्था देने की मांग की।
जब अध्यक्ष ने इस मामले पर कोई व्यवस्था नहीं दी तो कांग्रेस सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए रामचंद्र कदम के नेतृत्व में सदन से बहिर्गमन किया और राजभवन जाकर राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की।
राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस विधायकों ने कहा कि राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के साथ ‘‘घोर अन्याय’’ हो रहा है।
उन्होंने दावा किया कि ये समूह सामूहिक रूप से राज्य की आबादी का 94 प्रतिशत हिस्सा हैं, जिसमें एससी-एसटी 40 प्रतिशत और ओबीसी 54 प्रतिशत हैं।
विधायकों ने कहा, ‘दुर्भाग्यवश अपने महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय प्रतिनिधित्व के बावजूद वे राज्य की आरक्षण नीतियों के कारण उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों में असमानता से पीड़ित हैं।’
ओडिशा में ओबीसी, एससी और एसटी छात्रों के लिए आरक्षण नीतियों में असमानता का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार रोजगार में एसटी के लिए 22.5 प्रतिशत, एससी के लिए 16.25 प्रतिशत और ओबीसी के लिए 11.25 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि उच्च शिक्षा में विशेषकर एमबीबीएस और इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों में, एसटी को केवल 12 प्रतिशत, एससी को आठ प्रतिशत आरक्षण मिलता है तथा ओबीसी को कोई आरक्षण नहीं मिलता है।
उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के केंद्र के 2019 के निर्देश को लागू किया, जिससे आबादी के सिर्फ 6 प्रतिशत लोगों को लाभ हुआ, लेकिन यह ओबीसी छात्रों (आबादी में 54 प्रतिशत) को उनका उचित हिस्सा प्रदान करने पर चुप रही।’
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इस पक्षपातपूर्ण आरक्षण नीति के कारण, ओबीसी, एससी और एसटी श्रेणियों के सैकड़ों छात्रों को हर साल उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
भाषा योगेश अविनाश
अविनाश
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