नई दिल्ली: मारे गए अंडरवर्ल्ड डॉन अब्दुल लतीफ के करीबी मोहम्मद तस्लीम को गुजरात पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया. माना जाता है कि तस्लीम की ज़िंदगी पर आधारित शाहरुख खान की फिल्म रईस बनी थी. तस्लीम 2019 में पैरोल पर रिहा होने के बाद से फरार था.
1992 के राधिका जिमखाना हत्याकांड में उम्रकैद की सज़ा काट रहे तस्लीम को गुजरात पुलिस ने सात महीने तक चली तलाश के बाद उदयपुर से पकड़ा. इस अभियान में तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी दोनों का इस्तेमाल किया गया.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, तस्लीम 2019 में पैरोल पर बाहर आने के बाद वापस जेल नहीं लौटा. उसने कई बार अपनी पहचान और ठिकाना बदला तथा राजस्थान और हरियाणा में टैक्सी चालक और प्रॉपर्टी डीलर के रूप में काम करके कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने की कोशिश की.
गुजरात पुलिस के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि पुलिस की नज़रों से बचने के लिए तस्लीम ने अपनी दाढ़ी कटवा ली थी और हर 15 दिन में मोबाइल नंबर बदलता था. वह सलीम और उमर जैसे फर्जी नामों का इस्तेमाल कर रहा था और पिछले सात साल से अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ शांत जीवन जी रहा था.
जांच अधिकारी ने कहा, “वह पिछले सात साल से छिपा हुआ था. पहले जोधपुर में रहा, फिर गुरुग्राम और सीकर में टैक्सी चलाता रहा और आखिर में उदयपुर लौट आया.”
डीसीपी (क्राइम ब्रांच) अजीत राजियन ने दिप्रिंट को बताया कि उसे एक समन्वित अभियान के दौरान गिरफ्तार किया गया और हिरासत में ले लिया गया है. उन्होंने कहा, “उसे वापस साबरमती सेंट्रल जेल भेजने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है.”
1990 के दशक में किशोर उम्र में तस्लीम अब्दुल लतीफ के गिरोह में शामिल हुआ था और जल्द ही उसका सबसे भरोसेमंद शार्पशूटर बन गया. यह गिरोह 1980 और 1990 के दशक में गुजरात में अवैध शराब के कारोबार को चलाता था.
बाद में तस्लीम गुजरात के दो चर्चित गैंगवार मामलों में दोषी ठहराया गया—1992 का राधिका जिमखाना हत्याकांड, जिसमें एक प्रतिद्वंद्वी शराब तस्कर को निशाना बनाकर गोलीबारी की गई थी और पूर्व राज्यसभा सांसद रऊफ वलीउल्लाह की हत्या.
अब्दुल लतीफ ने युवा लड़कों की एक टीम तैयार की थी, जिसकी मदद से उसने पश्चिम भारत के सबसे खतरनाक आपराधिक गिरोहों में से एक खड़ा किया. उसका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था. उस समय उसकी गैंग एके-47 राइफलों का इस्तेमाल करती थी, जबकि देश की ज्यादातर पुलिस फोर्सों, यहां तक कि गुजरात पुलिस के पास भी ये हथियार नहीं थे.
3 अगस्त 1992 को अहमदाबाद के ओढव इलाके में हुए राधिका जिमखाना हत्याकांड में नौ लोगों की मौत हुई थी. यह हमला अब्दुल लतीफ गिरोह से जुड़े हथियारबंद लोगों ने किया था.
मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला तस्लीम, लतीफ का भरोसा जीतने में सफल रहा था और अपने राज्य में शराब के कारोबार की जिम्मेदारी संभालता था.
पुलिस ने बताया कि तस्लीम 1992 से जेल में था. उसे 6 अप्रैल 2019 को 45 दिनों की पैरोल मिली थी, लेकिन वह वापस जेल नहीं लौटा.
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