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Tuesday, 23 June, 2026
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NRI मैरिज रजिस्ट्रेशन और शादी के एक हफ्ते के अंदर पासपोर्ट लिंकेज: UCC के लिए BJP के सुझाव

मध्य प्रदेश यूसीसी समिति को दिए सुझाव में पार्टी ने कहा, इससे शादी के बाद पत्नी को छोड़कर विदेश भागने की समस्या खत्म होगी. बाल विवाह पर भी सख्त कार्रवाई की मांग.

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नई दिल्ली: यह ‘एक हफ्ते’ का समाधान है, लेकिन शायद काम कर जाए. अगर कोई अनिवासी भारतीय (एनआरआई) भारत में शादी करता है, तो उसका मैरिज रजिस्ट्रेशन और पासपोर्ट लिंकेंज सात दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से हो जाना चाहिए. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की मध्य प्रदेश इकाई ने यह सुझाव उन मामलों को रोकने के लिए दिया है, जिनमें एनआरआई शादी के बाद पत्नी को छोड़कर विदेश भाग जाते हैं.

मध्य प्रदेश भाजपा ने ये सुझाव न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली समान नागरिक संहिता (यूसीसी) समिति को दिए हैं. समिति ने राज्य के लिए यूसीसी का मसौदा अंतिम रूप देने के लिए राजनीतिक प्रतिनिधियों, धार्मिक नेताओं और अन्य पक्षों से मौखिक और लिखित सुझाव मांगे थे.

समिति को दिए गए सुझावों में भाजपा ने कहा, “एनआरआई विवाहों की निगरानी: देशहित और बेटियों की सुरक्षा के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि यदि कोई एनआरआई भारत में शादी करता है, तो उसकी शादी का पंजीकरण और पासपोर्ट लिंकिंग 7 दिनों के भीतर अनिवार्य हो. इससे शादी के बाद विदेश भागने और पत्नी को छोड़ देने के मामलों को पूरी तरह रोका जा सकेगा.”

इन सुझावों की एक प्रति दिप्रिंट के पास है. इन्हें मध्य प्रदेश भाजपा के चुनाव आयोग समन्वय विभाग के राज्य समन्वयक एस.एस. उप्पल और प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने समिति को सौंपा है.

मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार ने यूसीसी लागू करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है. समिति ने भोपाल में विभिन्न पक्षों से चर्चा की है और संकेत दिया है कि लंबे समय से प्रतीक्षित यूसीसी का मसौदा जुलाई के पहले सप्ताह तक तैयार हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस इस बैठक में शामिल नहीं हुई.

भाजपा ने अपने लिखित सुझाव में कहा, “समान नागरिक संहिता का मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना आदि) में एकरूपता लाना है.” पार्टी ने यह भी कहा कि सभी धर्मों के पुरुषों और महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु तय है (जैसे पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष).

पार्टी ने कहा कि कुछ मामलों में इन नियमों का पालन नहीं होता है, इसलिए सख्त कार्रवाई की ज़रूरत है. भाजपा ने सुझाव दिया, “सभी विवाहों का कानूनी पंजीकरण अनिवार्य किया जाए. बाल विवाह के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो. अगर कोई व्यक्ति तय उम्र से पहले शादी करता है या करवाता है, तो उस विवाह को केवल अवैध घोषित न किया जाए, बल्कि इसमें शामिल अभिभावकों पर कड़ी सज़ा और जुर्माना भी लगाया जाए.”

पार्टी ने सुझाव दिया कि बाल विवाह के मामलों में माता-पिता के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की जाए.

राज्य भाजपा इकाई ने यह भी कहा कि यदि बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करते हैं, तो उनकी संपत्ति के हस्तांतरण को रद्द करने और माता-पिता के भरण-पोषण की राशि सीधे बच्चों की आय से काटने का प्रावधान होना चाहिए.

भाजपा ने आगे कहा, “तलाक की स्थिति में शादी के बाद पति-पत्नी द्वारा खरीदी गई संपत्ति को बराबर बांटा जाए. दोनों का 50-50 प्रतिशत हिस्सा हो, ताकि गृहिणियां तलाक के बाद असहाय या बिना सहारे के न रह जाएं.”

भाजपा शासित उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है, जबकि गुजरात ने भी हाल ही में इससे जुड़ा विधेयक पारित किया है. असम समेत कई भाजपा शासित राज्यों ने यूसीसी लागू किया है या इसे अपने चुनावी वादों में शामिल किया है. पश्चिम बंगाल में भी भाजपा ने यूसीसी लागू करने का वादा किया है.

6 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भाजपा सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राम मंदिर जैसे कई वादे पूरे किए हैं, जबकि यूसीसी और ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे मिशन पर अभी काम जारी है.

कांग्रेस ने यूसीसी को “ध्यान भटकाने की रणनीति” बताया है. मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भाजपा से पूछा कि यूसीसी पर चर्चा करने से पहले यह बताया जाए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कितनी गारंटियां अब तक पूरी हुई हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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