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Tuesday, 23 June, 2026
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IDFC FIRST बैंक घोटाला: हरियाणा के पूर्व CEO और IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल गिरफ्तार

पंकज अग्रवाल पर आरोप है कि स्कूल शिक्षा और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान ही वे इन गड़बड़ियों में शामिल थे.

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गुरुग्राम: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस साल की शुरुआत में हरियाणा को हिला देने वाले 645 करोड़ रुपये के IDFC FIRST बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में हरियाणा कैडर के एक और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी को गिरफ्तार किया है.

केंद्रीय एजेंसी ने सोमवार देर शाम 2000 बैच के हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार किया. वह उस समय स्कूल शिक्षा विभाग और कृषि विभाग में प्रधान सचिव थे. उन पर हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के IDFC FIRST बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा में मौजूद खातों से सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का आरोप है.

उन्हें मंगलवार को अदालत में पेश किया जाना था.

नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के सबसे भरोसेमंद आईएएस अधिकारियों में गिने जाने वाले अग्रवाल को जुलाई 2024 में हरियाणा विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राज्य का मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया था. वह 23 जून 2025 तक इस पद पर रहे.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी रहते हुए भी उनके पास हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और भिवानी स्थित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार था.

सीईओ पद से मुक्त होने के बाद अग्रवाल को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया.

आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान ही वह IDFC FIRST बैंक में सरकारी धन के खाते खुलवाने और बाद में हुए कथित घोटाले में शामिल थे.

मार्च में अग्रवाल को राज्यसभा चुनावों के लिए रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया था. उस चुनाव में कई वोटों को अमान्य घोषित किए जाने को लेकर काफी विवाद और नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला था.

सीबीआई के एक प्रवक्ता ने दिप्रिंट को बताया, “जांच में पता चला कि इन विभागों के खाते हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के मौजूदा दिशानिर्देशों का उल्लंघन करके खोले गए थे और बाद में इनमें तय सीमा से अधिक धनराशि ट्रांसफर की गई. ये खाते उस समय खोले गए थे जब श्री पंकज अग्रवाल प्रधान सचिव थे.”

उन्होंने कहा, “इन विभागों के खातों में धोखाधड़ी वाले लेन-देन के जरिए धन का दुरुपयोग किया गया, जिससे सरकार को कुल 60.54 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.”

अग्रवाल इस मामले में गिरफ्तार होने वाले दूसरे आईएएस अधिकारी हैं. 2012 बैच के अधिकारी राम कुमार सिंह, जो पंचकूला नगर निगम के आयुक्त रह चुके हैं, को 19 जून को पंचकूला नगर निगम के IDFC FIRST बैंक खाते से 79.46 करोड़ रुपये निकालने के कथित मामले में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

जहां राम कुमार सिंह हरियाणा सिविल सेवा से पदोन्नति के जरिए आईएएस बने थे, वहीं अग्रवाल सीधे भर्ती किए गए अखिल भारतीय सेवा (AIS) के अधिकारी थे.

बड़ा घोटाला

अग्रवाल के नेतृत्व वाले दो विभागों को हुए 60.54 करोड़ रुपये के नुकसान का मामला सेक्टर-32 स्थित IDFC FIRST बैंक शाखा में हुए एक बड़े घोटाले का हिस्सा है. इस घोटाले में हरियाणा के आठ विभागों से कुल 504 करोड़ रुपये निकाल लिए गए और फर्जी या अस्तित्व में ही नहीं रहने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों (एफडीआर) और डेबिट नोट्स के जरिए शेल कंपनियों में भेज दिए गए.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जो मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत समानांतर जांच कर रहा है, इस पूरे घोटाले की रकम 645 करोड़ रुपये बता रहा है, जबकि CBI ने इसे 657 करोड़ रुपये आंका है.

अब तक सीबीआई ने हरियाणा से जुड़े इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इनमें IDFC FIRST बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन सरकारी कर्मचारी, दो कंपनियां और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं. आईएएस अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट अभी दाखिल नहीं की गई है.

दो बैंक अधिकारियों को इस घोटाले का मुख्य सूत्रधार माना गया है—IDFC FIRST बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा के पूर्व शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार.

आरोप है कि उन्होंने सरकारी विभागों को सालाना 10 प्रतिशत की असामान्य रूप से ऊंची ब्याज दर का लालच देकर निष्क्रिय सरकारी धन को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने के लिए प्रेरित किया, लेकिन ये फिक्स्ड डिपॉजिट वास्तव में कभी बनाए ही नहीं गए.

इसके बजाय यह पैसा शेल कंपनियों के जरिए ज्वैलर्स तक पहुंचाया गया, जहां से बराबर राशि नकद में लेकर बांटी गई.

यह घोटाला फरवरी में सामने आया, जब विकास एवं पंचायत विभाग के एक अधिकारी ने सरकारी खाते को बंद करने की कोशिश की और विभागीय रिकॉर्ड तथा खाते में मौजूद वास्तविक राशि के बीच भारी अंतर पाया.

इसके बाद IDFC FIRST बैंक ने शेयर बाज़ारों को इन अनधिकृत लेन-देन की जानकारी दी, यह स्वीकार किया कि उसके कर्मचारियों ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर काम किया था, और हरियाणा सरकार को मूल राशि और ब्याज सहित 578 करोड़ रुपये लौटा दिए. इसके बाद राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी.

हरियाणा के मामलों के अलावा, सीबीआई ने चंडीगढ़ से जुड़े दो अन्य मामलों की भी जांच अपने हाथ में ली है. इनमें एक मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) और नगर निगम चंडीगढ़ से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला CREST चंडीगढ़ से संबंधित है. दोनों मामलों में एक-एक चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है.

CSCL मामले में एजेंसी ने पांच बैंकरों, एक CSCL अधिकारी और एक निजी व्यक्ति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. वहीं CREST मामले में पांच बैंकरों, दो CREST अधिकारियों, चार निजी व्यक्तियों और दो कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है.

भारतीय वन सेवा (IFS) के एक वरिष्ठ अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव को CREST मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है.

सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, “सीबीआई सभी जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाने और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की पूरी कड़ी का पता लगाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.”

कौन हैं पंकज अग्रवाल?

झारखंड के धनबाद के रहने वाले पंकज अग्रवाल 4 सितंबर 2000 को हरियाणा कैडर में आईएएस बने थे. उन्होंने करनाल में असिस्टेंट कमिश्नर और झज्जर में सब-डिविजनल ऑफिसर के तौर पर फील्ड पोस्टिंग से शुरुआत की, फिर डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन में कुरुक्षेत्र (2007–2011) और सोनीपत (2011–2013) के डिप्टी कमिश्नर के तौर पर काम किया – इन पोस्टिंग ने उन्हें खेती-बाड़ी वाले हरियाणा और अधिकारियों पर सरकार की मांगों के सेंटर में ला खड़ा किया.

2013 तक, वह ट्रांसपोर्ट कमिश्नर थे, उसके बाद प्राथमिक शिक्षा परियोजना परिषद के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर और एलिमेंट्री एजुकेशन के डायरेक्टर बने. 2015 से 2022 तक के सालों में उन्होंने कई तरह के पोर्टफोलियो संभाले – लेबर कमिश्नर, फूड सिविल सप्लाई के डायरेक्टर जनरल, एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के कमिश्नर, हरियाणा गवर्नेंस रिफॉर्म्स अथॉरिटी के मेंबर सेक्रेटरी, और कभी-कभी एक साथ पांच-पांच डिपार्टमेंट का चार्ज भी संभाला.

उनकी सबसे ज़्यादा पब्लिक में दिखने वाली भूमिका जुलाई 2024 में आई, जब उन्हें चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर और इलेक्शन कमिश्नर और सेक्रेटरी बनाया गया. यह एक बहुत ही अहम संवैधानिक पद था, जिसने उन्हें अक्टूबर 2024 के हरियाणा चुनावों की देखरेख के लिए मुख्य ऑफिसर बना दिया, जिसमें बीजेपी ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की.

जून 2025 में उन्हें उस चार्ज से हटाकर एग्रीकल्चर और फार्मर्स वेलफेयर डिपार्टमेंट का हेड बना दिया गया, फिर दिसंबर 2024 में उन्होंने स्कूल एजुकेशन का एडिशनल चार्ज संभाला और साथ ही हरियाणा बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन, भिवानी के चेयरमैन के तौर पर भी काम किया. यह उनके पहले के कार्यकाल के दौरान था जब वे प्रिंसिपल सेक्रेटरी, स्कूल एजुकेशन के तौर पर काम करते थे, जिसमें हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और एग्रीकल्चर शामिल थे, जिसमें HSAMB का चार्ज था, सीबीआई का आरोप है कि फ्रॉड अकाउंट खोले गए और फंड निकाले गए.

स्कैम में उनका नाम सामने आने के बाद, हरियाणा सरकार ने उन्हें इरिगेशन और वॉटर रिसोर्स से हटाकर आर्किटेक्चर डिपार्टमेंट में भेज दिया, जहाँ वे अपनी गिरफ्तारी तक पोस्टेड रहे.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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