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Wednesday, 30 September, 2026
होमदेशLPU हंगामा: वॉकी-टॉकी वाले ‘बाहरी’ नहीं, मेजर की अगुवाई में आई सेना की टीम थी

LPU हंगामा: वॉकी-टॉकी वाले ‘बाहरी’ नहीं, मेजर की अगुवाई में आई सेना की टीम थी

मेजर रैंक के अधिकारी ने अपनी पहचान बताने के लिए आईडी कार्ड दिखाया. ये लोग वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर LPU में पढ़ने वाले उनके बच्चों का हाल जानने और उनका पता लगाने पहुंचे थे.

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नई दिल्ली: पंजाब के फगवाड़ा में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) कैंपस में रविवार को हुए हंगामे के दौरान हाथों में वॉकी-टॉकी और पारंपरिक हथियार लिए दिखे लोगों को सोशल मीडिया और विपक्ष की ओर से “बाहरी लोग” या “असामाजिक तत्व” बताया गया था. लेकिन पंजाब पुलिस के मुताबिक, ये लोग ऐसे नहीं थे. ये भारतीय सेना के जवान थे और मेजर रैंक के एक अधिकारी उनकी अगुवाई कर रहे थे.

पुलिस ने मौके पर जाकर जांच की. इसमें पता चला कि अधिकारी ने अपनी डिफेंस आईडी दिखाकर अपनी और अपनी टीम की पहचान साबित की. ये टीम वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर उनके बच्चों का पता लगाने और उनका हाल जानने के लिए भेजी गई थी, जो LPU में पढ़ते हैं.

पुलिस के एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “उन्हें सेना की स्थानीय यूनिट से दो छात्राओं का हाल जानने के लिए भेजा गया था. ये दोनों छात्राएं जनरल रैंक के अधिकारियों की बेटियां हैं और उन्हें पूछताछ के लिए अलग ले जाया गया था. हालांकि, जब मेजर रैंक के अधिकारी ने अपनी और अपनी टीम की पहचान बताई, तो उनके नाम और पहचान की ब्रिगेडियर रैंक के एक अधिकारी से भी पुष्टि की गई. उन्होंने बताया कि वे वास्तव में सेना से जुड़े हुए थे.”

शुरुआत में पंजाब आर्म्ड पुलिस की उस टीम ने सेना के जवानों को रोककर उनसे पूछताछ की थी, जो यूनिवर्सिटी कैंपस में तैनात थी. बाद में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी उनकी पहचान की जांच की. इनमें डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल नवीन सिंगला, कपूरथला के एसएसपी गौरव तूरा और दूसरे अधिकारी शामिल थे.

सोमवार को इससे पहले स्पेशल डीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रवीण सिन्हा ने भी साफ किया था कि मौके पर मौजूद सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान और उनके बारे में जानकारी की जांच की थी.

सिन्हा ने सोमवार को मीडिया से कहा, “मैं साफ करना चाहता हूं…जिसे आप दरांती बता रहे हैं, वह खुखरी थी. यहां सेना के अधिकारियों के बच्चे पढ़ते हैं और जाहिर तौर पर कोई भी माता-पिता चिंतित होंगे. इसलिए सेना के कुछ अधिकारी और जवान, पांच-छह लोगों की टीम में, जांच करने आए थे. मुख्य सड़क बंद थी, इसलिए वे पैदल चल रहे थे. छात्रों और हमारी टीम ने उन्हें वॉकी-टॉकी के साथ देखा और हमने उन्हें अलग ले जाकर उनकी पहचान की जांच की. वे वरिष्ठ स्तर के अधिकारी थे (मेजर), और एक जवान के पास पारंपरिक हथियार था, जबकि एक अधिकारी के पास वॉकी-टॉकी था. मेजर के पास पहचान पत्र था.”

“हमने उन छात्रों से भी पुष्टि की, जिनसे वे मिलने आए थे और फिर उनके हाल के बारे में पूछा. हम भी संतुष्ट थे और वे भी संतुष्ट थे. इसके बाद वे वापस चले गए.”

सोशल मीडिया पर वॉकी-टॉकी और दरांती जैसे हथियार लिए लोगों के वीडियो तेजी से फैल गए थे. इन वीडियो के बाद विपक्षी दलों ने भगवंत मान सरकार पर सवाल उठाए थे. उन्होंने पंजाब पुलिस पर LPU कैंपस में हिंसा करने वाले कथित असामाजिक तत्वों को रोकने में नाकाम रहने का आरोप भी लगाया था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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