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Wednesday, 30 September, 2026
होमएजुकेशनLPU में आत्महत्याओं की अफवाहों के बीच पुलिस ने शुरू की जांच, छात्रों ने उठाए ‘कार्रवाई न होने’ पर सवाल

LPU में आत्महत्याओं की अफवाहों के बीच पुलिस ने शुरू की जांच, छात्रों ने उठाए ‘कार्रवाई न होने’ पर सवाल

किसी को भी मामलों की पूरी जानकारी नहीं थी, फिर भी दिप्रिंट से बात करने वाले लगभग हर LPU छात्र के पास आत्महत्या की एक कहानी थी. इनमें से किसी भी दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी.

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फगवाड़ा: देशभर से आए छात्रों का साथ और प्रैक्टिकल तरीके से पढ़ाई का माहौल आंध्र प्रदेश के 20 साल के एक साइंस स्टूडेंट के लिए पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) को पढ़ाई के लिए एक बेहतर जगह बनाता था, लेकिन जैसे-जैसे महीने बीतते गए, आत्महत्या की अफवाहों का एक सिलसिला सामने आने लगा. ये चर्चाएं रुकने का नाम नहीं ले रही थीं.

इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह थी कि कभी कोई आधिकारिक पुष्टि या खबर सामने नहीं आई. उन्होंने दिप्रिंट से नाम न बताने की शर्त पर कहा, “आधिकारिक ग्रुप या नोटिस बोर्ड पर कोई श्रद्धांजलि संदेश नहीं होते थे, बस कैंपस में अफवाहें चलती रहती थीं.”

आत्महत्याओं का यह दावा पंजाब पुलिस की नज़र से भी नहीं बचा है. मामले की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों की एक विस्तृत सूची तैयार करना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा, “हम उन सभी छात्रों के बयान दर्ज कर रहे हैं, जिन्होंने कैंपस के अंदर छात्रों की आत्महत्या देखने या उसके बारे में जानने का आरोप लगाया है. हम कैंपस के बाहर आत्महत्या से हुई मौतों के उन सभी मामलों को भी नोट कर रहे हैं, जिनका कॉलेज से कोई संबंध है.”

अधिकारी ने बताया कि पंजाब पुलिस ने सोमवार को कई लोगों के बयान दर्ज किए और कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों से संपर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. उन्होंने कहा, “हमारी टीमें हर मामले की अलग-अलग जांच करेंगी और रिपोर्ट तैयार की जाएगी.”

LPU कैंपस में पुलिसकर्मी | फोटो: अलीशा दत्ता/दिप्रिंट
LPU कैंपस में पुलिसकर्मी | फोटो: अलीशा दत्ता/दिप्रिंट

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कपूरथला पुलिस जिला, जिसके अधिकार क्षेत्र में LPU आता है, के पास फिलहाल उन LPU छात्रों की कोई सूची नहीं है, जिनके बारे में कथित तौर पर कहा गया है कि उन्होंने आत्महत्या की. उक्त अधिकारी ने कहा, “कुछ मामलों की जानकारी हमारे पास है, जिनके बारे में यूनिवर्सिटी ने हमें बताया था, लेकिन छात्रों ने इससे ज्यादा मामलों के बारे में बताया है, इसलिए हम उनकी जानकारी की पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं.”

हालांकि, LPU में अफवाहों का दौर नहीं रुका है. आंध्र प्रदेश के छात्र के मुताबिक, सिर्फ 20 दिन पहले एक दोस्त ने उन्हें बताया कि उन्होंने 57 ब्लॉक में एक लड़के को आत्महत्या करते हुए देखा था.

उन्होंने दावा किया, “छात्र का शव बहुत जल्दी वहां से हटा दिया गया, जैसे इससे पहले के मामलों में हुआ था.”

कैंपस में इस तरह की बात लगभग आम हो गई है. दिप्रिंट से बात करते हुए छात्र ने आगे आरोप लगाया, “अधिकारी पहले बिना किसी शोर के शवों को जल्दी से वहां से हटा देते हैं और फिर उनके रूममेट्स को कुछ दिनों के लिए घर भेज देते हैं. चुप रहने के बदले रूममेट्स को अच्छे नंबर और अच्छी नौकरी दिलाने का ऑफर दिया जाता है.”

26 और 27 सितंबर को मामला तब और बढ़ गया, जब एक महिला छात्रा के साथ एक कंस्ट्रक्शन मजदूर द्वारा कथित यौन उत्पीड़न के बाद छात्र न्याय की मांग को लेकर जमा हुए.

गुस्सा, निराशा और बेबसी सामने आ गई. दिप्रिंट से बात करने वाले LPU के कई छात्रों ने कहा कि शिकायत करने या जवाबदेही मांगने के लिए बहुत कम या कोई जगह नहीं है.

छात्रों के विरोध और खुद को अनसुना महसूस करने की उनकी बातों को देखते हुए LPU की प्रो चांसलर डॉ. रश्मि मित्तल ने कहा कि “यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्रों के बीच परिवार जैसा भरोसे और सहयोग का रिश्ता है.”

उन्होंने एक वीडियो में कहा, “जो हुआ वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन LPU में छात्रों के पास RMS, स्टूडेंट रिलेशनशिप सेल और खास तौर पर मेरे साथ विशेष सत्र जैसे कई मीडियम हैं. अगर वे इतने निराश महसूस कर रहे थे तो उन्होंने हमारे पास इसकी शिकायत क्यों नहीं की. उन्होंने सोशल मीडिया की अफवाहों पर भरोसा किया और यह गलत है.”

दिप्रिंट ने छात्रों के आरोपों पर टिप्पणी के लिए ईमेल के जरिए डॉ. सोरभ लखनपाल, एग्जीक्यूटिव डीन (स्टूडेंट वेलफेयर विंग) और हेड (LPU मीडिया और PR) से संपर्क किया. साथ ही LPU के मालिक अशोक मित्तल की टीम से फोन पर टिप्पणी मांगी. उनके जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

क्या LPU में ऐसा कोई सिलसिला है?

एनएच-44 के पास खड़ी एक दूसरी छात्रा स्थानीय ऑटो रिक्शा का इंतज़ार कर रही थी. जब उनसे हाल के मामले के बारे में पूछा गया तो वह व्यंग्य करते हुए हंसने लगीं. उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “मुझे इस मामले या जांच की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन हमारे कॉलेज कैंपस के अंदर आत्महत्या के बहुत ज्यादा मामले होते हैं.”

किसी को भी इन मामलों की पूरी जानकारी नहीं थी, फिर भी लगभग हर छात्र के पास आत्महत्या की एक कहानी थी. इनमें से किसी भी दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी.

LPU की दूसरे साल की छात्रा ने आरोप लगाया कि इस साल की शुरुआत में गर्ल्स हॉस्टल (GH) 509 या 510 में एक छात्रा की आत्महत्या से मौत की खबर आई थी. उन्होंने कहा, “मुझे उसका कमरा नंबर याद नहीं है, लेकिन मैंने उसकी मौत के बारे में उसी GH में रहने वाली एक दोस्त से सुना था. उसके किसी दोस्त को उसे आखिरी बार देखने या प्रार्थना करने का मौका नहीं दिया गया. रातोंरात शव को वहां से हटा दिया गया और उसके रूममेट्स को घर भेज दिया गया.”

पहले बताए गए आंध्र प्रदेश के छात्र ने आरोप लगाया कि जब अधिकारियों को पता चला कि उनका दोस्त उस घटना का गवाह था, जिसके बारे में उन्होंने बताया था, तो उनका पहला “कदम” “डराने-धमकाने” का था.

उन्होंने कहा, “उन्होंने उसे फोन किया और उसने जो कुछ देखा था, उसके बारे में पूछा. फिर उन्होंने मेरे दोस्त (गवाह) को कुछ दिनों के लिए घर जाने की सलाह दी और कहा कि उसे अपने नंबरों की चिंता नहीं करनी चाहिए.” उन्होंने आगे कहा कि निर्देश यहीं खत्म नहीं हुए. “इसके बाद उन्होंने उसे धमकी दी कि अगर उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे, जिसमें प्लेसमेंट में हिस्सा लेने से रोकना भी शामिल है.”

क्या व्यवस्था ही दबाने के लिए बनाई गई है?

दिप्रिंट से बात करते हुए एक और प्रथम वर्ष की छात्रा ने कहा कि इनमें से कई मामलों को इसलिए दबा दिया जाता है क्योंकि आत्महत्या करने वाले छात्रों के आसपास के छात्र “UMC” से डरते हैं. UMC यानी University Management Case, जो कैंपस में छात्रों की जिंदगी को नियंत्रित करता है.

महिला छात्रा ने कहा, “अगर आप ड्रग्स लेते हैं या कोई अपराध करते हैं, तो यूनिवर्सिटी UMC की संबंधित धाराओं के तहत आपके खिलाफ मामला दर्ज करती है, लेकिन अगर आप किसी भी तरह से उनके खिलाफ जाते हैं, तो यूनिवर्सिटी के पास आपके खिलाफ UMC के तहत मामला दर्ज करने की ताकत भी है.”

उन्होंने आरोप लगाया, “इसका मतलब है कि छात्र अपनी स्कॉलरशिप खो सकता है, उसे सस्पेंड किया जा सकता है, लगातार काउंसलिंग से गुजरना पड़ सकता है या उसे प्लेसमेंट राउंड में हिस्सा लेने से रोक दिया जा सकता है.”

शिकायत उठाने की जगह नहीं

छात्रों का कहना है कि UMC का डर कोई अलग मामला नहीं है. Relationship Management System (RMS) भी ठीक से काम नहीं करता.

महिला छात्रा ने कहा, “मैंने बायोटेक्नोलॉजी विभाग के एक प्रोफेसर के खिलाफ उनके अनुचित व्यवहार को लेकर शिकायत की थी. जांच करने के बजाय उन्होंने मेरी शिकायत की जानकारी के साथ मेरा आईडी नंबर उसी प्रोफेसर के साथ शेयर कर दिया. इस व्यवस्था की वजह से छात्रों को उन्हीं लोगों से परेशान होना पड़ता है, जिनके खिलाफ वे न्याय मांगने के लिए शिकायत करते हैं.”

21 साल के एक छात्र ने दिप्रिंट को बताया कि LPU में दाखिला लेते समय वेबसाइट पर शिकायतों के समाधान की व्यवस्था देखकर वह काफी प्रभावित हुआ था. लेकिन जब उसे मदद की जरूरत पड़ी तो उन्हें पता चला कि छात्रों के ID नंबर यौन उत्पीड़न के मामलों में भी शेयर किए जाते हैं.

उन्होंने कहा, “मेरे एक सीनियर ने मेरा यौन उत्पीड़न किया था और मैं शिकायत करना चाहता था. लेकिन मुझे पता चला कि इस व्यवस्था में शिकायत करने वाले की पहचान गुप्त नहीं रहती और उसका ID नंबर उस व्यक्ति के साथ शेयर कर दिया जाता है, जिसके खिलाफ शिकायत की जाती है.”

छात्र ने कहा कि इस प्रक्रिया से उसे मदद मिलने के बजाय ज्यादा खतरा महसूस हुआ, इसलिए उसने शिकायत ही नहीं की.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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