अलीगढ़: सितंबर 2024 की एक रात करीब 1 बजे, बादल बाबू दिल्ली से अटारी-वाघा बॉर्डर के पास पहुंचा. वहां कोई सुरक्षा कर्मचारी नहीं था. वह रुका, आसपास देखा, फिर सेंसर या विस्फोटक होने का पता लगाने के लिए अपने जूते एक-एक करके अंधेरे में फेंके.
कुछ नहीं हुआ. दुबले-पतले शरीर वाला यह किशोर बिजली वाली सीमा की तारों के नीचे से रेंगकर निकल गया. कुछ ही मिनटों में वह पाकिस्तान पहुंच चुका था. उसके पास कोई सामान, सरकारी पहचान पत्र, वीजा या टिकट नहीं था. उसके पास सिर्फ एक ऐसी महिला के लिए प्यार था, जिससे उसकी मुलाकात फेसबुक पर हुई थी. उसकी उम्र 19 साल थी.
सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की नजर में आए बिना वह पूरी रात चलता रहा और सुबह एक पास के गांव पहुंचा. सुबह बादल एक सरकारी बस में बैठकर पाकिस्तान के मंडी बहाउद्दीन जिले पहुंच गया. यह इलाका लाहौर से करीब 200 किलोमीटर और बॉर्डर से 170 किलोमीटर दूर है.
बादल ने अलीगढ़ में अपना परिवार और दिल्ली की नौकरी क्यों छोड़ दी? इसकी वजह फेसबुक पर एक महिला के साथ उसका दो साल पुराना प्रेम था. इस महिला की पहचान सना रानी के रूप में हुई है. लेकिन प्रेम कहानी बादल की उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ी.
सना ने बादल के शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया. उसकी मां एक भारतीय नागरिक से उसकी शादी के पक्ष में नहीं थी. उन्हें यह भी पसंद नहीं था कि बादल बहुत गरीब परिवार से आता था.
अब बादल के लिए कानूनी तरीके से भारत लौटना मुश्किल था, क्योंकि उसके पास कोई पहचान पत्र नहीं था. इसलिए उसने अगले कुछ महीनों तक काम करने का फैसला किया. उसने जिले के एक गांव में एक व्यक्ति के लिए मवेशी चराने का काम शुरू कर दिया. उस महिला के परिवार ने उसकी हालत और पैसों की परेशानी को समझते हुए उसे अपने घर में रहने की इजाजत दे दी, जब तक कि वह वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं ढूंढ लेता. वह चुपचाप वहां रह रहा था.
लेकिन दिसंबर के एक दिन सब कुछ बदल गया. बातचीत के दौरान उसकी अलीगढ़ वाली बोली निकल गई और स्थानीय लोगों को पता चल गया कि वह भारतीय है. इसके बाद उसे पुलिस थाने ले जाया गया और फिर जेल भेज दिया गया.
27 दिसंबर 2024 को पंजाब प्रांत के पाकिस्तान में बादल को सदर मंडी बहाउद्दीन पुलिस स्टेशन में विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 13 और 14 के तहत गिरफ्तार किया गया.
तब से उसका परिवार उसे वापस लाने के लिए सरकारी अधिकारियों से गुहार लगा रहा है और वकीलों से बात कर रहा है. उसे वापस लाने की कोशिश में परिवार ने अपनी लगभग सारी बचत खर्च कर दी है.
28 दिसंबर 2024 को बादल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. 30 अप्रैल 2025 को उसे दोषी ठहराया गया और एक साल की सख्त जेल की सजा के साथ 5,000 पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाया गया.
पाकिस्तान में बादल के वकील फियाज रमाय ने दिप्रिंट को बताया कि यह मामला अब दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर अटक गया है.
लाहौर से दिप्रिंट से बात करते हुए उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि बादल भारतीय एजेंट था या उसने पाकिस्तान की सुरक्षा के खिलाफ कोई काम किया था. फियाज ने कहा, “उस पर सिर्फ पाकिस्तान में अवैध तरीके से घुसने का आरोप है, जो वहां के इमिग्रेशन कानूनों का उल्लंघन है.”

फियाज ने बताया कि बादल की सजा दिसंबर 2025 में पूरी हो गई थी. अब परिवार की लगभग सारी उम्मीद सरकार के हस्तक्षेप पर टिकी हुई है.
बादल के पिता कृपाल सिंह ने दिप्रिंट से कहा, “मैं हर सरकारी दफ्तर में गया हूं, अधिकारियों के सामने बैठा हूं, हाथ जोड़कर उनसे उसे वापस लाने की गुहार लगाई है. हमने कानूनी फीस में करीब 3 लाख रुपये खर्च कर दिए हैं. यह हमारी क्षमता से बाहर था. अब मैं सरकार के जवाब का इंतजार कर रहा हूं.”
‘बहुत शांत स्वभाव का लड़का’
2022 में रिश्तेदारों ने गायत्री और कृपाल के पास बादल के लिए शादी के रिश्ते लाने शुरू कर दिए थे. वह घर से दूर रहता था, दिल्ली में एक स्थिर नौकरी करता था और कई परिवारों को लगता था कि वह शादी करके घर बसाने की स्थिति में है.
बादल के पिता कृपाल सिंह ने कहा, “जब हमने बादल से शादी के बारे में पूछा, तो उसने मना कर दिया. उसने कहा कि पहले वह हमारे पूरे घर पर प्लास्टर करवाना चाहता है. वह जितना हो सके उतना पैसा बचाना चाहता था, ताकि उसके बड़े भाई की शादी हो सके.”
बादल तब सिर्फ 17 साल का था और परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद था. उसी साल, आम लोगों की तरह बादल ने फेसबुक पर दोस्त बनाना शुरू किया. सना रानी भी उन्हीं में से एक थी. यह बात 2022 की है.
दोनों फेसबुक पर बात करते थे और धीरे-धीरे एक-दूसरे को पसंद करने लगे. उनका प्यार फेसबुक से व्हाट्सऐप तक पहुंच गया और मैसेज से ऑडियो और वीडियो कॉल तक पहुंच गया.

बादल के परिवार को इस बारे में कुछ पता नहीं था. गायत्री ने कहा, “हमें नहीं पता था कि सना कौन है. बादल ने हमें कभी नहीं बताया. आप जानते हैं कि छोटे बच्चे अपने प्यार के बारे में बातें छिपाते हैं.”
दो साल बाद, 2024 में सना ने बादल से पूछा कि क्या वह उससे शादी करेगा. प्यार में डूबे बादल ने हां कर दी. शायद उसे यह अंदाजा नहीं था कि अंतरराष्ट्रीय सीमा, खासकर रैडक्लिफ लाइन, पार करने के कानूनी और असली नतीजे क्या हो सकते हैं.
अगस्त 2024 में राखी के त्योहार को मनाने और एक-दूसरे को तोहफे देने के बाद बादल ने अपनी मां से कहा कि उसे काम के लिए दिल्ली वापस जाना है. उसकी मां कहती हैं, “वह बस चला गया. उसके बाद मैंने अपने बेटे को नहीं देखा.”
कुछ दिनों बाद बादल सीमा पार करके पाकिस्तान चला गया. वह अपना घर, सामान, कपड़े, पैसे और सभी सरकारी पहचान पत्र पीछे छोड़ गया.
उसने कई हफ्तों तक अपने परिवार को फोन नहीं किया. लेकिन दिवाली से एक दिन पहले उसने फोन किया. इस बार नंबर अलग था, उसकी मां को याद है. उसने परिवार से कहा कि इस बार वह काम की वजह से घर नहीं आएगा.
उसकी मां कहती हैं, “वीडियो कॉल बिल्कुल सामान्य लग रही थी. उसने हमें काम करने वाले दूसरे लोगों को दिखाया. मुझे फोन नंबर पर ध्यान देना याद नहीं है. अब सोचती हूं तो वह +92 नंबर था, जो पाकिस्तान का कंट्री कोड है.”
बादल का पैतृक घर अलीगढ़ के नागला खितकरी गांव में है. यह गांव बरला इलाके में है और अलीगढ़ के मुख्य शहर से दूर है. यह एक शांत इलाका है, जहां खेत हैं और ज्यादातर लोग मजदूरी या बादल के पिता की तरह ई-रिक्शा चलाने का काम करते हैं. लेकिन बादल ने दिल्ली की एक औद्योगिक फैक्ट्री में सिलाई का काम हासिल कर लिया था.
उसके पिता ने कहा कि उन्होंने बादल को वापस लाने के लिए जितने लोगों से हो सकता था, उतने लोगों से संपर्क किया. कृपाल ने कहा, “मेरे बेटे को अच्छी नौकरी मिल गई थी. वह 15,000 रुपये कमाता था और 10,000 रुपये घर भेजता था. वह हमारे परिवार का पूरा खर्च संभालता था.”
गायत्री और कृपाल के तीन और बच्चे हैं, दो बेटे और एक बेटी. बादल की बहन और बड़ा भाई अब शादीशुदा हैं, और छोटा भाई नौकरी की तलाश कर रहा है.
नागला खितकरी गांव में लोग बादल को “बहुत शांत स्वभाव का लड़का” बताते हैं.

गांव के एक व्यक्ति ने दिप्रिंट से कहा, “वह किसी से बहस नहीं करता था. बहुत शांत रहता था. वह ‘दिलफेंक’ था. दिल्ली से सबके लिए कपड़े लाता था. वह कीमत भी नहीं देखता था. वह लोगों पर जल्दी भरोसा कर लेता था. शायद… इसी वजह से उसके साथ धोखा हुआ?”
गांव में टीवी के माइक, कैमरे और प्रोडक्शन वैन पहुंचीं
अगस्त 2024 में राखी के दिन घर से निकलने के बाद जब बादल ने कई हफ्तों तक परिवार से संपर्क नहीं किया, तो उन्हें लगा कि वह शायद काम में व्यस्त होगा.
कृपाल ने कहा, “हम सोच रहे थे कि बादल हमें फोन क्यों नहीं कर रहा है, वह घर क्यों नहीं आ रहा है. वह पैसे भी नहीं भेज रहा था. लेकिन हमने सोचा कि वह काम में व्यस्त होगा. इसलिए हम अपनी सामान्य जिंदगी जीते रहे.”
लेकिन 29 दिसंबर 2024 की शाम को सब कुछ बदल गया. मीडिया की कई गाड़ियां और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के टीवी रिपोर्टर उस संकरी गली में पहुंच गए, जहां परिवार रहता था.
कृपाल उस समय घर पर नहीं थे. गायत्री घबरा गईं. उन्हें लगा कि उनके बेटे ने कोई अपराध कर दिया है. गायत्री कहती हैं, “टीवी रिपोर्टरों ने मेरे सामने माइक कर दिया. उन्होंने मुझसे पूछा, ‘आपका बादल कहां है?’ मैंने जवाब दिया, ‘दिल्ली.’ उसके बाद क्या हुआ, मुझे याद नहीं है.”
अब करीब 19 महीने हो चुके हैं. गायत्री को उस शाम सुनी हुई कुछ बातें याद हैं. वह कहती हैं, “एक रिपोर्टर ने मुझे बताया, ‘बादल पाकिस्तान में है.’ दूसरे ने पूछा कि वह वहां क्यों गया. उसके पीछे कौन है? क्या आपको पता था कि वह पाकिस्तान में है?”
वह कहती हैं कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है और इन सवालों का क्या जवाब दें. उन्हें सिर्फ अपना बेटा याद था, जो कपड़े सिलता था और लोगों के नाप लेता था.
कृपाल ने कहा, “हमें रिपोर्टरों के जरिए पता चला कि बादल पाकिस्तान की जेल में है.” यही वह दिन था, जब परिवार की मुश्किलें शुरू हुईं. परिवार ने बादल के कमरे में रखे उसके सभी सरकारी पहचान पत्रों को एक प्लास्टिक के फोल्डर में निकालकर रख लिया.

बॉर्डर पार करना
अगले कुछ दिनों में परिवार की बात फियाज रमाय से हो गई. उन्होंने फोन पर दिप्रिंट को बताया कि बादल ने उन्हें बताया था कि वह वाघा बॉर्डर के पास एक ऐसी जगह पहुंचा था, जो मुख्य गांवों से काफी दूर थी.
“रात काफी हो चुकी थी, करीब 1 बजे का समय था, और उसके पास कोई बैग नहीं था. किसी को शक न हो, इसलिए उसने यह देखने के लिए एक जूता फेंका कि कहीं बम या डिटेक्टर तो नहीं हैं. फिर उसने दोबारा ऐसा किया. जब सब ठीक लगा और कोई सुरक्षा कर्मचारी नजर नहीं आया, तो वह नीचे झुका और तारों के नीचे से निकलकर बॉर्डर पार कर गया. वह सबसे नजदीकी गांव तक पैदल गया. वहां से वह मंडी बहाउद्दीन जाने वाली बस में बैठ सकता था, जहां सना रहती थी.”
रमाय ने बताया कि जब बादल आखिरकार सना तक पहुंचा, तो उसकी मुलाकात सना की मां से भी हुई. बादल के परिवार का कहना है कि सना बादल से खुश नहीं थी. गायत्री के मुताबिक, “उसकी मां उससे उसकी शादी नहीं करवाना चाहती थी. उसके पास पैसे भी नहीं थे.”
बादल के पास कोई पहचान पत्र नहीं था, इसलिए उसके लिए आधिकारिक तरीके से वापस लौटना संभव नहीं था. इसलिए बादल ने उसी गांव के एक घर में मवेशी चराने का काम शुरू कर दिया. उसे बहुत कम पैसे मिलते थे, जिनसे वह अपना खर्च चलाता था.
कृपाल बताते हैं कि 27 दिसंबर 2024 की सुबह बादल बकरियां चरा रहा था, तभी लोगों को उस पर शक हुआ. “जिस घर में वह काम करता था, वहां के लोगों ने बादल से पूछा कि वह कौन है और क्या कर रहा है. उसने हमारी खड़ी बोली में जवाब दिया, ‘कुच्छू नई’ (कुछ नहीं). इससे पाकिस्तानियों को शक हुआ कि वह उनमें से नहीं है. उसकी भाषा अलग थी,” कृपाल ने कहा.
पूरे गांव के लोगों ने जब उससे बार-बार सवाल किए, तो उसने मान लिया कि वह भारतीय है.
इसके बाद लोगों ने स्थानीय पंजाब पुलिस को बुलाया. उसे सदर मंडी बहाउद्दीन पुलिस स्टेशन में विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 13 और 14 के तहत गिरफ्तार किया गया.
चार्जशीट
दिप्रिंट को मिले कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, बादल को गिरफ्तार किए जाने के एक दिन बाद 28 दिसंबर 2024 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
चार्जशीट में कहा गया है, “27.12.2024 को करीब 07:20 PM पर, सदर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाके में, आपको, आरोपी को भारतीय नागरिक होने और बिना किसी वीजा या अनुमति के पाकिस्तान में मौजूद होने के कारण पकड़ा गया. इसलिए आपने विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 13 के तहत अपराध किया है, जिसकी सजा उसी अधिनियम की धारा 14 के तहत है और इस मामले पर इस अदालत का अधिकार है.”

कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, बादल ने अपना अपराध कबूल कर लिया था.
30 अप्रैल के एक आदेश में मंडी बहाउद्दीन के सीनियर सिविल जज-कम-मैजिस्ट्रेट, क्रिमिनल डिवीजन, उस्मान सरवर ने कहा कि कबूलनामे के आधार पर विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 13 के तहत अपराध साबित हो गया.
“इसलिए आरोपी को दोषी माना जाता है और विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 के तहत दोषी ठहराया जाता है. हालांकि, आरोपी के पछतावे और शर्मिंदगी वाले व्यवहार को देखते हुए, यह अदालत नरमी बरतती है और उसे एक साल की सख्त कैद और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा देती है. अगर वह जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे इसके बदले 5 दिन की साधारण कैद और भुगतनी होगी. आरोपी को Cr.P.C. की धारा 382-B का लाभ दिया जाता है.”

आदेश में आगे कहा गया, “विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14-B के तहत ऊपर बताई गई सजा पूरी होने के बाद, संघीय सरकार की अनुमति से आरोपी को पाकिस्तान से बाहर भेजा जा सकता है, क्योंकि उसके पास पाकिस्तान में रहने के लिए कोई वीजा या अनुमति नहीं थी. अगर मामले में कोई जब्त सामान है, तो उसके साथ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए.”
सजा पूरी होने के बाद उसे लाहौर की सेंट्रल जेल कोट लखपत भेज दिया गया.
फियाज ने कहा, “कोई आधिकारिक संधि या समझौता नहीं है, इसलिए हमें केंद्र सरकार की अनुमति की जरूरत है. यहां संघीय सरकार रिहाई का फैसला करती है. पाकिस्तान का गृह मंत्रालय, जो भारत के गृह मंत्रालय जैसा है, देश से बाहर भेजने का फैसला करता है. हमने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. वहां हमें बताया गया कि संघीय समिति इस मामले को देख रही है. इसलिए अब हम भारत के विदेश मंत्रालय के जवाब का इंतजार कर रहे हैं.”
23 मार्च 2026 को विदेश मंत्रालय के पाकिस्तान डेस्क के डिप्टी सेक्रेटरी ऋषभ देव ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट, सिटी, किंशुक श्रीवास्तव को बादल के मामले को लेकर पत्र लिखा था.
पत्र के मुताबिक, पाकिस्तान के अधिकारियों ने 29 जनवरी 2026 को लाहौर की जेल में बादल को कॉन्सुलर एक्सेस दिया था. इसमें कहा गया है कि उसकी भारतीय नागरिकता की पुष्टि गृह मंत्रालय से अभी बाकी है.

पत्र में कहा गया, “इस्लामाबाद में भारत के हाई कमीशन ने बताया है कि 1 जनवरी 2026 तक पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि बादल बाबू को एक साल की सजा और 5,000 पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना दिया गया है. जुर्माना न भरने पर इसके बदले 5 दिन की साधारण कैद होगी. इसे देखते हुए जुर्माना भरने की जरूरत शायद ही पड़े, क्योंकि वह दिसंबर 2024 से जेल में है.”
पत्र में आगे कहा गया, “मंत्रालय और भारत का हाई कमीशन पाकिस्तान की जेलों में बंद सभी भारतीय कैदियों की रिहाई और उन्हें भारत वापस लाने का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं. यह मामला सक्षम अधिकारी की मंजूरी के लिए भेजा गया है.”
परिवार ने बताया कि उन्होंने वकील के जरिए जुर्माना भर दिया है.
इस साल 1 जुलाई को भारत और पाकिस्तान ने राजनयिक माध्यमों से नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूचियों का आदान-प्रदान किया.
विदेश मंत्रालय ने कहा, “भारत और पाकिस्तान के बीच 2008 में हुए कॉन्सुलर एक्सेस समझौते के तहत ऐसी सूचियों का हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को आदान-प्रदान किया जाता है.”
बादल के परिवार ने दिप्रिंट को बताया कि उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि उसका नाम इस सूची में था या नहीं.
ऑडियो कॉल
फियाज ने बताया कि जेल में रहने के दौरान बादल के लिए अपने परिवार से बात करना मुश्किल था, क्योंकि बादल को उनसे बात कराने की अनुमति लेने के लिए कोर्ट में आवेदन देना पड़ता था.
“यहां तक कि उसके वकील को भी उससे मिलने के लिए या तो कार्ड लेना पड़ता है या गृह सचिव से अनुमति लेनी पड़ती है.”
अलीगढ़ में बादल का परिवार उसकी गैरमौजूदगी से परेशान है. गायत्री भावुक होकर कहती हैं, “बादल की बहुत कमी महसूस होती है.”
अगस्त 2024 में घर से जाने के बाद परिवार की उससे सिर्फ 4-5 बार बात हुई है. इनमें से कोई भी बातचीत 5 मिनट से ज्यादा नहीं चली.
“मैंने उससे आखिरी बार 12 अगस्त को बात की थी. उसने मुझसे पूछा, ‘मां, आप कैसी हैं?’ उसने बताया कि वह बीमार है. उसे कोई दवा नहीं मिल पा रही थी. मैंने उसकी आवाज सुनी और मेरा दिल टूट गया. मेरे बेटे से गलती हुई है, लेकिन क्या वह पूरी जिंदगी जेल में रहेगा?”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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