गुरुग्राम: शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक समूह ने अपनी जेब से काले कपड़े निकाले और गुरुग्राम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के काफिले को दिखाए. कुछ ही घंटों के अंदर वीआईपी सुरक्षा में हुई इस लापरवाही के कारण कई पुलिस अधिकारियों को अपने पद गंवाने पड़े.
गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर सिबाश कबीराज ने सुरक्षा में हुई इस चूक को गंभीरता से लिया और सख्त कार्रवाई के आदेश दिए.
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (वेस्ट) करण गोयल और डीसीपी (क्राइम) हितेश यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. दोनों हरियाणा पुलिस सेवा के अधिकारी हैं. इस तरह ऊपर के स्तर पर जिम्मेदारी तय की गई.
सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन के SHO बिजेंद्र सिंह के साथ मौके पर ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मियों और वेस्ट जोन के सुरक्षा प्रभारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया.
खुफिया विभाग के प्रभारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए. गुरुग्राम पुलिस के एक प्रवक्ता ने दिप्रिंट से इन घटनाक्रमों की पुष्टि की.
आज मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी के गुरुग्राम विश्वविद्यालय आगमन पर NSUI गुरुग्राम ग्रामीण जिला अध्यक्ष भाई नितिन यादव जी, NSUI शहरी जिला अध्यक्ष भाई सचिन बसोया जी, कांग्रेस शहरी जिला अध्यक्ष श्री पंकज डावर जी एवं कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष भाई वर्धन यादव जी के नेतृत्व… pic.twitter.com/m9EjAadK1W
— Haryana Congress (@INCHaryana) August 21, 2026
उन्होंने कहा कि पुलिस कमिश्नर ने साफ कर दिया है कि वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही, तालमेल की कमी या ढिलाई को गंभीरता से लिया जाएगा और जब भी इस तरह की स्थिति सामने आएगी, नियमों के तहत जिम्मेदारी तय की जाएगी.
गुरुग्राम पुलिस के कमिश्नर ने कहा कि वीआईपी सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता बनी हुई है.
प्रदर्शन के सिलसिले में कांग्रेस के आठ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने उनकी पहचान मानेसर के नीरज यादव, घाटोला के शिव, भिवानी के निखिल, कन्हाई के अनुज, फिरोज गांधी कॉलोनी के हरकेश, मनोहर नगर के पटौदा चौक के अमन, कृष्णा नगर के राजीव यादव और मेवात जिले के तावड़ू के हरेंद्र के रूप में की है.
पार्टी के ग्रामीण जिला अध्यक्ष वर्धन यादव के नेतृत्व में 15 से ज्यादा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अचानक, संभवतः जेब में रखे काले कपड़े निकाले और मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरते समय उन्हें दिखाया.
काफिले के साथ चल रहे पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन तब तक कार्यकर्ता गाड़ियों के काफी करीब पहुंच चुके थे.
सिविल लाइंस SHO को शाम देर से सस्पेंड कर दिया गया और कमिश्नर ने डीसीपी (वेस्ट) और डीसीपी (क्राइम) से जवाब मांगा. इसके बाद खुफिया विभाग के प्रभारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई.
झंडे दिखाने के बाद यादव ने घटना का वीडियो अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया.
एक दूसरे वीडियो में, जिसे यादव ने एक्स पर पोस्ट किया और जिसमें उन्होंने CM को काले झंडे दिखाने की वजह बताई, उन्होंने कहा कि प्रदर्शन गुरुग्राम यूनिवर्सिटी की समस्याओं को लेकर था. पहले साल के छात्रों को उनके रिजल्ट नहीं मिले थे, कैंपस में सुविधाएं पर्याप्त नहीं थीं और स्थानीय और ग्रामीण छात्रों के लिए कैंपस पहुंचने की कोई बस या परिवहन सुविधा नहीं थी. उन्होंने कहा कि यह सरकारी यूनिवर्सिटी है, लेकिन यहां निजी संस्थानों के बराबर फीस ली जा रही है.
उन्होंने भगत सिंह की उस बात का हवाला दिया कि बहरे लोगों को सुनाने के लिए धमाका करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के यूनिवर्सिटी पहुंचने से पहले ही उन्होंने छात्रों की आवाज सुन ली थी.
वर्धन यादव ने एक्स पर एक और पोस्ट किया. इसमें उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाई गई अपनी एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया और लिखा, “सरकार सोशल मीडिया से हमारे विरोध की आवाज हटा सकती है, लेकिन हमारे दिलों में जल रही न्याय की आग को बुझाना उसके बस की बात नहीं है. आवाज को दबाया जा सकता है, हमारे संकल्प को नहीं. संघर्ष जारी रहेगा…”
पुलिस के एक सूत्र ने दिप्रिंट को बताया कि गुरुवार देर तक मुख्यमंत्री के रास्ते में संभावित प्रदर्शन को लेकर कोई पहले से खुफिया जानकारी नहीं थी.
वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी गुरुवार देर रात ही मिली. बताया गया है कि कुछ अधिकारियों ने रात में ही कांग्रेस नेताओं को फोन करके योजना के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन इसके बाद भी CM के रास्ते की सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई.
प्रदर्शनकारियों का काफिले के इतने करीब पहुंच जाना जमीन पर तैनात पुलिस टीम पर सवाल खड़े करता है.
मुख्यमंत्री ने गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में GenH Startup Summit 2026 के ‘चौपाल’ कार्यक्रम में जाने से पहले जिला जनसंपर्क और शिकायत निवारण समिति की बैठक में हिस्सा लिया था.
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