कोलकाता: उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की जांच चार टीमें कर रही हैं. इनमें एक विशेष जांच टीम (एसआईटी), अपराध जांच विभाग (सीआईडी), विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और एक फॉरेंसिक टीम शामिल हैं. इस भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई और 27 लोग घायल हो गए.
गिरीश पार्क पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर में भगदड़ की वजह आयोजकों की ओर से भीड़ को ठीक से नहीं संभालना और पंडाल गिरने की चेतावनी देने वाली घोषणा से फैली दहशत को बताया गया है. आयोजन समिति के सदस्यों, निजी सुरक्षा कर्मचारियों और एक ठेकेदार समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
यह मामला गिरीश पार्क पुलिस थाने के सब-इंस्पेक्टर रूपक दास की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 110 (गैर इरादतन हत्या की कोशिश) और 3(5) (साझा इरादा) के तहत दर्ज किया गया.
एफआईआर के मुताबिक, दास को एक सहायक सब-इंस्पेक्टर से भगदड़ की जानकारी मिली. इसके बाद वह तुरंत मौके पर पहुंचे, जहां उन्होंने कई लोगों को घायल पाया. इनमें से कई लोग बेहोश थे.
एफआईआर में कहा गया है, “घायलों को पुलिस और स्थानीय लोगों ने वहां से निकालकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया. इसके बाद पंडाल को खाली कराया गया और उसे चारों तरफ से घेर दिया गया.”
बारिश, चेतावनी देने वाली घोषणा और दहशत
एफआईआर में अचानक तेज़ बारिश और आयोजन समिति की ओर से की गई घोषणा को भगदड़ की मुख्य वजहों में शामिल किया गया है.
एफआईआर में कहा गया है, “पता चला कि शाम 7 से 7:30 बजे के बीच अचानक तेज बारिश हुई. इसके बाद आयोजकों ने घोषणा की कि पंडाल की हालत बिगड़ गई है और वह कभी भी गिर सकता है. इससे वहां आए लोगों में दहशत फैल गई और वे एक-दूसरे को धक्का देने लगे. इसके कारण भगदड़ मच गई.”
एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि आयोजक प्रवेश और बाहर निकलने वाले दरवाजों पर लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने में नाकाम रहे.
एफआईआर में कहा गया है, “आयोजकों ने प्रवेश और बाहर निकलने वाले दोनों दरवाजों पर भीड़ को संभालने के लिए लोगों को तैनात किया था. लेकिन उन्होंने न तो पंडाल के अंदर लोगों की भीड़ को बढ़ने से रोका और न ही बाहर निकलने वाले दरवाजे से भीड़ को बाहर निकालने का इंतजाम किया.”
शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि पंडाल के अंदर हालात बिगड़ने की जानकारी होने के बावजूद घोषणाएं करके आयोजकों ने “दहशत को और बढ़ा दिया”.
घटना के कुछ घंटे बाद दास ने चोरबागान इलाके के पंडालों के आयोजकों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने उन्हें “पंडाल के अंदर और आसपास सुरक्षा के इंतजाम करने और भीड़ की आवाजाही को सुचारू रखने” से जुड़े दिशा-निर्देश बताए.
भगदड़ में दबने से हुई पीड़ितों की मौत
गिरीश पार्क पुलिस थाने के कर्मचारियों ने बताया कि भगदड़ के बाद से वे लगातार काम कर रहे हैं और घटना के बाद की दो रातों में सो भी नहीं पाए हैं. इस हादसे को दुर्गा पूजा के दौरान हुई सबसे जानलेवा घटनाओं में से एक बताया जा रहा है.
थाने में तैनात एक सहायक सब-इंस्पेक्टर ने कहा, “चोरबागान भगदड़ की जांच कई टीमें कर रही हैं. इनमें फॉरेंसिक टीमें, विशेष कार्य बल और सीआईडी शामिल हैं. एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) भी बनाई गई है, जिसकी अगुवाई कलकत्ता हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश कर रहे हैं. हम जूनियर अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के काम में उनकी मदद कर रहे हैं.”
पंडाल को सील कर दिया गया है. वहां सिर्फ जांच अधिकारियों और फॉरेंसिक कर्मचारियों को जाने की अनुमति है. पुलिस को पंडाल के प्रवेश और बाहर निकलने वाले दरवाजों पर तैनात किया गया है. जांच अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा की है. उन्होंने घटना को अपनी आंखों से देखने वाले लोगों, स्थानीय निवासियों, स्वयंसेवकों और उस समय ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज किए हैं.
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की मुख्य वजह छाती दबने के कारण सांस न ले पाना बताई गई है. इसे मेडिकल भाषा में ट्रॉमैटिक एस्फिक्सिया कहा जाता है.
एक अधिकारी ने कहा, “भगदड़ के दौरान लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए और कई लोगों को पैरों तले कुचल दिया गया. छाती पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ने से लोगों की सांस लेने की प्रक्रिया बाधित हो गई. शरीर के अंदरूनी अंगों में चोट लगने की बात भी दर्ज की गई है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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