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Monday, 19 October, 2026
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कोलकाता के 3 दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा की कमी, अग्निशमन विभाग ने जारी किया नोटिस

बड़ी भीड़ जुटने वाले प्रमुख पंडालों की जांच करने वाली उच्चस्तरीय समिति के आदेशों को लागू करने में जुटे आयोजक.

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कोलकाता: दक्षिण कोलकाता के बालीगंज में एक पंडाल में लोग मां दुर्गा की विशाल मूर्ति के आसपास जमा होकर तस्वीरें खींच रहे हैं और वीडियो बना रहे हैं. सुरक्षा गार्ड बाहर निकलने वाले दरवाजों पर नज़र रख रहे हैं. आयोजक पंडाल के अंदर और बाहर आ-जा रहे हैं, इंतज़ाम देख रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आने-जाने के रास्तों में कोई रुकावट न हो.

दक्षिण कोलकाता के सबसे मशहूर दुर्गा पूजा आयोजनों में शामिल बालीगंज कल्चरल पंडाल उन तीन पंडालों में से एक है, जहां एक उच्चस्तरीय समिति ने सुरक्षा के इंतजामों में कमी पाई. यह समिति शनिवार को उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद बनाई गई थी. इस भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई थी और कम से कम 27 लोग घायल हुए थे.

कम रोशनी, बाहर निकलने के रास्तों पर भीड़ और सजावट में आग जल्दी पकड़ने वाली चीज़ों के इस्तेमाल जैसी कमियां मिलने के बाद अग्निशमन विभाग ने तीन पंडालों की आयोजन समितियों को नोटिस जारी किए. ये पंडाल हैं- चेतला अग्रणी, बालीगंज कल्चरल और त्रिधारा सम्मिलनी.

जांच टीम ने बालीगंज कल्चरल पंडाल में मां दुर्गा की मूर्ति के सामने लगी रेलिंग हटाने को कहा, ताकि श्रद्धालुओं के लिए ज्यादा जगह हो सके | फोटो: सूरज सिंह बिष्ट/दिप्रिंट
जांच टीम ने बालीगंज कल्चरल पंडाल में मां दुर्गा की मूर्ति के सामने लगी रेलिंग हटाने को कहा, ताकि श्रद्धालुओं के लिए ज्यादा जगह हो सके | फोटो: सूरज सिंह बिष्ट/दिप्रिंट

भगदड़ के बाद से समिति ने उन प्रमुख पंडालों की जांच की है, जहां बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना है. समिति ने आयोजकों को मिली कमियों को दूर करने के लिए एक दिन का समय दिया है.

चेतला अग्रणी पंडाल में समिति ने रोशनी की कमी और पंडाल के अंदर पंखे तथा एयर कंडीशनर नहीं होने की बात उठाई. वहां पास के इलाके में बिना अनुमति के बना एक अस्थायी ढांचा और LPG सिलेंडर भी मिले.

एक अधिकारी के बयान में कहा गया, “उच्चस्तरीय समिति ने चेतला अग्रणी पंडाल के पास के इलाके में एक अवैध अस्थायी ढांचा और LPG सिलेंडर होने की बात भी बताई.” समिति ने इन अस्थायी ढांचों को तुरंत हटाने का आदेश दिया.

त्रिधारा सम्मिलनी पंडाल में जांच करने वालों को अंदर की सजावट में आग जल्दी पकड़ने वाली चीज़ों की “बड़ी मात्रा” मिली.

अधिकारियों ने कहा, “अगर किसी भी वजह से आग लगती है, तो जहरीला धुआं फैलने के कारण लोगों की जान जाने का खतरा है.”

बालीगंज कल्चरल पंडाल में टीम को बाहर निकलने का रास्ता संकरा और वहां रोशनी कम मिली. जांच करने वालों को खुद भी पंडाल से बाहर निकलने में परेशानी हुई. प्रवेश और निकास के पास लगे दुकानों के स्टॉल भी लोगों के आने-जाने में रुकावट डाल रहे थे. इसके बाद इन गतिविधियों को रोकने का आदेश दिया गया.

जांच के बाद बालीगंज समिति ने किए बदलाव

सोमवार को जब दिप्रिंट ने बालीगंज कल्चरल पंडाल का दौरा किया, तो वहां जाने वाली सड़क के दोनों ओर आइसक्रीम, गहने और फुचका बेचने वाले स्टॉल लगे थे. बड़े ब्रांड और खाने-पीने के सामान बेचने वाले दुकानदार पंडाल घूमने आए लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे थे. खेल और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों से भी वहां काफी चहल-पहल थी.

समिति ने बालीगंज कल्चरल पंडाल में बाहर निकलने का रास्ता संकरा और रोशनी कम होने की बात उठाई | फोटो: सूरज सिंह बिष्ट/दिप्रिंट
समिति ने बालीगंज कल्चरल पंडाल में बाहर निकलने का रास्ता संकरा और रोशनी कम होने की बात उठाई | फोटो: सूरज सिंह बिष्ट/दिप्रिंट

हालांकि, पंडाल के अंदर आयोजकों ने समिति की सलाह पर काम शुरू कर दिया था. समिति के वरिष्ठ सदस्य बापी मुखर्जी और सचिव सप्तक ने जांच में मिली कमियों को दूर करने के लिए रविवार की पूरी रात काम किया.

बालीगंज कल्चरल पूजा समिति से तीन दशक से जुड़े मुखर्जी ने कहा कि जरूरी बदलाव करने के लिए रविवार रात पंडाल बंद कर दिया गया था.

जांच टीम ने उनसे मां दुर्गा की मूर्ति के सामने लगी रेलिंग हटाने को कहा था. टीम का कहना था कि रेलिंग की वजह से श्रद्धालुओं के खड़े होकर पूजा करने के लिए जगह कम हो रही थी.

मुखर्जी ने कहा, “जांच के तुरंत बाद हमने पंडाल बंद कर दिया और रातभर काम करके रेलिंग हटा दी, ताकि श्रद्धालुओं के लिए ज्यादा जगह बनाई जा सके.”

उन्होंने कहा कि रेलिंग हटने से लोगों को पंडाल से बाहर निकलने में आसानी होगी और उन्हें पूजा करने के लिए भी ज्यादा जगह मिलेगी.

चोरबागान की घटना के बाद रास्तों में रुकावट का मुद्दा और गंभीरता से देखा जा रहा है. वहां पंडाल तक जाने वाली सड़क संकरी थी और अलग VIP प्रवेश द्वार बनाने के लिए लगाई गई रेलिंग के कारण रास्ता और भी छोटा हो गया था. भगदड़ के बाद राज्य प्रशासन ने VIP प्रवेश की व्यवस्था हटाने का आदेश दिया.

मुखर्जी ने कहा, “हमने VIP प्रवेश की व्यवस्था भी हटा दी है. अब पंडाल के अंदर और बाहर पर्याप्त जगह है.”

बदलाव करने के बाद भी मुखर्जी को चिंता है कि शाम को भीड़ बढ़ने पर ये इंतज़ाम कितने कारगर रहेंगे. उन्हें यह भी चिंता है कि क्या किए गए बदलाव एक और जांच से बचने के लिए पर्याप्त होंगे.

चेतला अग्रणी ने सुझावों से आगे बढ़कर किए इंतजाम

चेतला अग्रणी पंडाल के आयोजकों ने भी कहा कि उन्होंने आदेशों का पालन किया है. जांच के बाद वहां अतिरिक्त लाइटें और एयर कंडीशनर लगाए गए हैं.

पंडाल में मां दुर्गा की मूर्ति एक रथ पर स्थापित है. पीछे की हल्की रोशनी से श्रद्धालुओं को एक अलग अनुभव मिलता है. हालांकि, रविवार को जांच के दौरान समिति ने वहां हवा आने-जाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने और रोशनी कम होने की बात कही थी.

समिति ने चेतला अग्रणी पंडाल में रोशनी की कमी और पंखे तथा एयर कंडीशनर नहीं होने की बात उठाई | फोटो: सूरज सिंह बिष्ट/दिप्रिंट
समिति ने चेतला अग्रणी पंडाल में रोशनी की कमी और पंखे तथा एयर कंडीशनर नहीं होने की बात उठाई | फोटो: सूरज सिंह बिष्ट/दिप्रिंट

आयोजन समिति के सदस्य आदित्य दास ने कहा, “हमारे पास पहले से चार एयर कंडीशनर थे. जांच के बाद हमने चार और लगा दिए. हवा आने-जाने का इंतजाम बेहतर करने के लिए ज्यादा पंखे भी लगाए हैं.”

उच्चस्तरीय समिति ने बाहर निकलने वाले दरवाजों के पास लगे स्टॉलों में इस्तेमाल हो रहे LPG सिलेंडरों पर भी चिंता जताई थी. समिति ने कहा था कि इनसे सुरक्षा को खतरा हो सकता है.

दास ने कहा, “हमने स्टॉल वालों से LPG सिलेंडर हटाने को कहा. अब वे दूसरी जगह खाना बना रहे हैं और पकने के बाद उसे यहां ला रहे हैं. जो लोग मौके पर खाना बना रहे हैं, वे इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल कर रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि उच्चस्तरीय समिति के सुझावों के अलावा पूजा समिति ने अपनी तरफ से भी निगरानी बढ़ाई है. इसके लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं, चार एंबुलेंस तैयार रखी गई हैं और पंडाल में 700 स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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