scorecardresearch
Sunday, 18 October, 2026
होमफीचररावण, कुंभकर्ण, मेघनाद और कॉकरोच: दिल्ली की रामलीला में चौथे पुतले के मायने क्या हैं?

रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद और कॉकरोच: दिल्ली की रामलीला में चौथे पुतले के मायने क्या हैं?

देशभर में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली के पीतमपुरा में एक रामलीला में एक आदमी की छाती पर कॉकरोच चढ़ कर उसे जलाने की तैयारी की जा रही है. इसके आयोजक किसी भी राजनीतिक संदेश से इनकार करते हैं.

Text Size:

नई दिल्ली: पीतमपुरा में श्री केशव रामलीला कमेटी ने 30 फुट ऊंचा कॉकरोच का पुतला बनाने का वादा किया था, लेकिन वह बिल्कुल भी कॉकरोच जैसा नहीं दिखता. इसके बजाय, वह एक ऐसे आदमी जैसा दिखता है, जिस पर एक कॉकरोच हमला कर रहा है.

चमकीले गुलाबी रंग के इस पुतले की भौहें टेढ़ी हैं, मूंछें वालरस जैसी हैं, मुंह चमकीले लाल रंग का है, नाक पीली है और आंखें लाल रंग की हैं, जो इधर-उधर घूरती हुई लगती हैं. उसका मुंह चमकीले लाल रंग का एक बड़ा हिस्सा है, जिसमें चांदी जैसे दांत हैं. और एक काला, अभी अधूरा कॉकरोच, जिसकी छह टांगें हैं, उसकी छाती पर चढ़ रहा है.

“यह कॉकरोच उनके अध्यक्ष के ऊपर चढ़ रहा है,” पुतला बनाने वाले लकड़ी के कारीगर सवेज खान ने समझाया. “कुछ लोगों ने ऐसे पुतले बनाए हैं, जो बिल्कुल कॉकरोच जैसे दिखते हैं, लेकिन हम कुछ अलग करना चाहते थे. यह उनका अध्यक्ष है.”

पीतमपुरा के नेताजी सुभाष प्लेस में श्री केशव रामलीला कमेटी के विजयादशमी कार्यक्रम में 30 फुट ऊंचे कॉकरोच के इस अनोखे पुतले की वजह से काफी चर्चा हो रही है. यह पुतला रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ जलाया जाएगा. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में देशभर में विरोध प्रदर्शन फैल रहे हैं. यह युवाओं का एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन है, जो अभी रजिस्टर्ड नहीं है. ऐसे में कॉकरोच के इस प्रतीक का राजनीतिक मतलब भी निकाला जा रहा है. इस कार्यक्रम के आयोजक और मॉडल टाउन से बीजेपी विधायक अशोक गोयल अपने शब्दों को लेकर सावधानी बरत रहे हैं. वह इस बात से इनकार करते हैं कि चौथे पुतले का कोई राजनीतिक मतलब है.

गोयल ने कहा, “कॉकरोच जनता पार्टी क्या है? वह तो रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी भी नहीं है. हम उसे इतनी अहमियत क्यों देंगे?” उन्होंने कहा, “हर विजयादशमी पर पुतले जलाना सच की झूठ पर जीत और धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक होता है. इसीलिए हमने कॉकरोच को चुना. यह गंदगी का प्रतीक है. चाहे वह सामाजिक गंदगी हो, राजनीतिक गंदगी हो या किसी और तरह की गंदगी.”

गोयल ने खुद ही इस पार्टी का जिक्र किया, जबकि उनसे इसके बारे में पूछा भी नहीं गया था. इससे ऐसा लगता है कि कॉकरोच को चुनने का फैसला मौजूदा माहौल की ओर इशारा करता है.

CJP की स्थापना 16 मई 2026 को अभिजीत दिपके ने की थी. वह पहले आम आदमी पार्टी के लिए कम्युनिकेशन रणनीतिकार के तौर पर काम कर चुके हैं. यह कदम उस खबर के बाद उठाया गया, जिसमें कहा गया था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “समाज के परजीवियों” से की थी. इस पार्टी का नाम बीजेपी की नकल करते हुए रखा गया है. यह चुनाव आयोग में आधिकारिक राजनीतिक पार्टी के तौर पर रजिस्टर्ड नहीं है.

गोयल ने कहा कि वह पिछले 15 साल से इसी जगह पर रामलीला का आयोजन कर रहे हैं. उनके मुताबिक, चौथा पुतला हर साल बनाया जाता है. पहले आतंकवाद, नक्सलवाद और दूसरे मुद्दों को दिखाने वाले पुतले बनाए जा चुके हैं.

इस साल चौथा पुतला कॉकरोच का है. यह उसी महीने सामने आया है, जब इस कीड़े का नाम इस्तेमाल करने वाला एक आंदोलन शुरू हुआ और लोगों को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए जुटाने लगा.

पीतमपुरा, दिल्ली में रामलीला स्थल पर कॉकरोच का अधूरा पुतला. फोटो: हिमांशी अग्रवाल | दिप्रिंट

कॉकरोच का पुतला बनाना

खाने-पीने की दुकानों, झूलों, प्रदर्शनियों, खेलों और रोशनी की लड़ियों के पीछे, एक काले तंबू के अंदर पुतलों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. तंबू में बांस के ढांचे, रंगीन कागज और हाथ से बनाए गए पटाखों के बंडल रखे हुए हैं.

सवेज खान और उनके चचेरे भाई आमिर खान मेरठ के रहने वाले हैं. उनका परिवार कई पीढ़ियों से पुतले बनाने का काम करता आ रहा है. उनकी टीमें दिल्ली और दूसरे राज्यों में अलग-अलग रामलीलाओं के लिए पुतले बनाती हैं. उनका कहना है कि वे पिछले 16 साल से इस रामलीला के लिए पुतले बना रहे हैं.

कॉकरोच के पुतले के मतलब को लेकर सवेज ज्यादा साफ-साफ बात करते हैं.

सवेज ने गुलाबी रंग के आदमी की छाती की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह कॉकरोच उनके अध्यक्ष के ऊपर चढ़ रहा है.” वहां काले, अंडाकार आकार का कीड़ा धीरे-धीरे ऊपर चढ़ रहा है. “यह उनका अध्यक्ष है.”

सवेज खान (दाएं) और उनके चचेरे भाई आमिर खान दिल्ली के पीतमपुरा में श्री केशव रामलीला के अधूरे पुतलों के पास बैठे हैं. उनका पारिवारिक कारोबार पिछले 16 साल से इस कार्यक्रम के लिए पुतले बना रहा है. फोटो: हिमांशी अग्रवाल | दिप्रिंट

उनके इस अस्पष्ट बयान से उस आदमी की ओर इशारा मिलता है, जो इन “कॉकरोचों” का नेतृत्व कर रहा है. यह नाम अब छात्र प्रदर्शनकारियों के लिए इस्तेमाल होने लगा है.

दूसरे शब्दों में कहें तो टेढ़ी भौहों वाला आदमी सिर्फ गंदगी का कोई आम प्रतीक नहीं है. वह कॉकरोचों का नेता है और गंदगी उस पर हावी हो रही है.

सवेज को इस बात की चिंता नहीं है कि कॉकरोच अभी कॉकरोच जैसा नहीं दिख रहा. उन्होंने बताया कि अभी उसके सिर पर मुकुट लगना बाकी है. साथ ही सींग और कॉकरोच की तरह लंबे, घुमावदार एंटीना भी लगाए जाने हैं. उन्होंने कहा कि इसकी टांगें बड़ी की जाएंगी और बाहर की ओर मोड़ी जाएंगी. उन्होंने हाथ से इशारा करके इसका आकार भी दिखाया.

कहीं दूसरी जगह कोई टीम एक साधारण, अकेले कॉकरोच का पुतला बना सकती थी. लेकिन उनके पुतले में एक कहानी दिखाई जा रही है, जो अभी पूरी होनी बाकी है.

उन्होंने कहा, “आखिर इसमें कुछ अलग तो होना ही चाहिए.”

इस चौथे पुतले को बनाने का काम एक महीने पहले दिया गया था. यह आदमी और कॉकरोच वाला पुतला था. आयोजकों ने उनसे सिर्फ इतना कहा था कि “एक अच्छा पुतला बनाना”.

अंतिम डिजाइन कलाकारों पर छोड़ दिया गया था. उनका कहना है कि वे अपनी मर्जी से इसका आकार और रूप तय कर सकते थे.

उन्होंने बाकी तीन पुतलों के सिर भी बनाए हैं, जिन्हें आग लगाई जाएगी. सवेज ने उनकी ओर इशारा करते हुए बताया कि सोने के रंग का मुकुट वाला सिर रावण का है, गुलाबी रंग वाला कुंभकर्ण का है और बीच वाला मेघनाद का है. कॉकरोच का पुतला करीब 30 फुट ऊंचा होगा, जबकि बाकी पुतले करीब 65 से 70 फुट ऊंचे होंगे.

दिल्ली के पीतमपुरा में श्री केशव रामलीला में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले अधूरे कॉकरोच के पुतले के साथ खड़े हैं. फोटो: हिमांशी अग्रवाल | दिप्रिंट

सवेज को पुतले के डिजाइन से ज्यादा उसके मतलब में दिलचस्पी थी. उन्हें लगता था कि इसका मतलब समझाने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा, “पार्टी बनेगी… वे इस स्तर से आगे बढ़ेंगे. उनकी पार्टी की वजह से ही यह बनाया जा रहा है.”

आयोजक के इनकार से भी उन्हें कोई परेशानी नहीं थी.

उन्होंने कहा, “यह राजनीति है. जो समझते हैं, उनके लिए यह एक इशारा है. जो नहीं समझते, उनके सामने यह सिर्फ एक पूरी कहानी है. और मूर्ख इंसान मूर्ख ही रहता है.”

दिल्ली के पीतमपुरा में एक सड़क पर श्री केशव रामलीला कमेटी के कार्यक्रम के पोस्टर लगे हैं. इनमें हिंदू देवी-देवताओं और स्थानीय बीजेपी नेताओं की तस्वीरें हैं. फोटो: हिमांशी अग्रवाल | दिप्रिंट

रामलीला

आयोजक भले ही इस बात से इनकार करते हों कि पुतले का कोई राजनीतिक मतलब है, लेकिन नेताजी सुभाष प्लेस में होने वाली इस रामलीला में राजनीतिक संदेश साफ दिखाई देते हैं.

कार्यक्रम के सभी विज्ञापन पोस्टरों पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की तस्वीर लगी है. उनके साथ दूसरे आयोजकों की तस्वीरें भी हैं. यहां नरेंद्र मोदी प्रदर्शनी के नाम से एक खास प्रदर्शनी लगाई गई है. यह दीवार जितनी लंबी प्रदर्शनी है, जिसमें प्रधानमंत्री के जन्म और बचपन से लेकर गुजरात में उनके समय और हाल की उपलब्धियों तक की कहानी दिखाई गई है. इसमें ऑपरेशन सिंदूर और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसी चीजें भी शामिल हैं. इसके लिए अलग-अलग पैनलों और तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है. पूरे मैदान में यह सबसे लंबी प्रदर्शनी है और रामायण के मंच से थोड़ी ही दूरी पर है.

रामलीला के प्रवेश द्वार पर पांच इंस्टॉलेशन लगाए गए हैं. बीच वाले इंस्टॉलेशन में प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी सांसद हर्ष मल्होत्रा और प्रवीण खंडेलवाल, और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की तस्वीरें हैं. उनके बाईं ओर “नमो कैफे” है, जिसके बाएं कोने में रेखा गुप्ता का एक कटआउट कुर्सी पर बैठा हुआ दिखाया गया है. दाईं ओर ब्रिक्स से जुड़ा एक इंस्टॉलेशन है. सबसे दाईं ओर एक छोटा राम मंदिर बनाया गया है.

दिल्ली के पीतमपुरा में श्री केशव रामलीला के मंच के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे बीजेपी नेताओं के कटआउट लगे हैं. फोटो: हिमांशी अग्रवाल | दिप्रिंट
पीतमपुरा, दिल्ली में श्री केशव रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरों वाला “नमो कैफे” इंस्टॉलेशन. फोटो: हिमांशी अग्रवाल | दिप्रिंट
पीतमपुरा, दिल्ली में श्री केशव रामलीला के मंच पर ब्रिक्स 2026 का इंस्टॉलेशन लगा है. यह इस साल भारत के वैश्विक नेतृत्व की थीम को दिखाता है. फोटो: हिमांशी अग्रवाल | दिप्रिंट

पूरे मैदान में ब्रिक्स की थीम दिखाई देती है. इसका लोगो मुख्य मंच पर लगा है और आमंत्रित मेहमानों को दिए जाने वाले यादगार बैज पर भी छपा है.

गोयल ने कहा कि यह व्यवस्था परंपरा से अलग नहीं है.

उन्होंने कहा, “मोदी जी देश के लिए काम कर रहे हैं, पूरे देश को एकजुट कर रहे हैं, नक्सलवाद को खत्म कर रहे हैं और आतंकवाद से देश को आजाद करा रहे हैं. और इन सभी कामों की प्रेरणा भगवान राम से मिलती है. उनके काम भगवान राम से प्रेरित हैं.”

उन्होंने अपनी बात के समर्थन में रामायण का उदाहरण दिया.

उन्होंने कहा, “और भगवान राम ने क्या किया? अगर आप देखें, तो जब वह वनवास गए थे, तब उन्होंने पूरे रेड कॉरिडोर को राक्षसों से मुक्त कराया था. प्रधानमंत्री जी भी उसी प्रेरणा से काम कर रहे हैं. इसलिए हमने उनके जीवन की घटनाओं, ऑपरेशन सिंदूर वगैरह को भी दिखाया है.”

उन्होंने प्रधानमंत्री के कामों की तुलना भगवान राम के शासन से भी की.

उन्होंने कहा, “भगवान राम ने पूरी दुनिया में अखंड भारत की स्थापना की और भारत का नाम दुनिया भर में रोशन किया. इसी तरह, भारत का नाम दुनिया भर में रोशन करने वाली जिन भी चीजों को हम देखते हैं, उन्हें हम रामलीला में दिखाते हैं.”

इस रामलीला की एक खास थीम भी होती है. गोयल ने बताया कि यह हर साल बदलती है और उन चीजों को दिखाती है, जिन्हें कमेटी भारत की शान बढ़ाने वाला मानती है. पिछले सालों में रामायण एक्सप्रेस, नई संसद की इमारत और दिल्ली के कन्वेंशन सेंटर यशोभूमि पर आधारित थीम रखी गई थीं.

गोयल ने कहा, “जब भी हम अच्छे शासन की बात करते हैं, तो हम रामराज्य की बात करते हैं. हमने ब्रिक्स की थीम इसलिए बनाई, क्योंकि हम इसके जरिए दुनिया को भारत का वैश्विक नेतृत्व दिखाना चाहते थे.”

उन्होंने इस बात को भी खारिज कर दिया कि राजनीति को धर्म से अलग रखा जाना चाहिए. उनका कहना था कि अच्छी राजनीति को धार्मिक विचारों से दिशा मिलती है.

गोयल ने कहा, “धर्म हो या राजनीति, दोनों में धर्म और सही रास्ते पर चलना जरूरी है. क्योंकि जब राजनीति में धर्म और सही रास्ता आएगा, तभी अच्छे काम होंगे.”

पीतमपुरा में श्री केशव रामलीला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन और करियर को दिखाने वाली दीवार जितनी लंबी प्रदर्शनी लगी है. यहां ब्रिक्स की थीम पर आधारित प्रदर्शनियां भी हैं. फोटो: हिमांशी अग्रवाल | दिप्रिंट

पुतलों को जलाना

20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन गुलाबी आदमी और उस पर चढ़ते कॉकरोच को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ आग लगाकर जलाया जाएगा. पुतलों के अंदर हाथ से बनाए गए पटाखे भरे गए हैं और उनके लकड़ी के ढांचों को रंगीन कागज से अच्छी तरह ढका गया है. आयोजक का कहना है कि लोग इन पुतलों को जलते हुए देखकर हर तरह की गंदगी को आग में खत्म होते हुए देखेंगे. इसका प्रतीकात्मक संदेश साफ है और ताकत का प्रदर्शन भी खुलकर किया जा रहा है.

पुतला बनाने वालों ने एक संभावित मेहमान के आने की खबर भी सुनी थी. आमिर ने बताया कि सुबह आयोजकों में से एक व्यक्ति कलाकारों को निर्देश देने आया था.

आमिर ने कहा, “वह आए और बोले, ‘बेटा, इसे अच्छी तरह सजाना, अमित शाह आ रहे हैं, वह इसे देखेंगे.’ मुझे पूरा यकीन है कि वह आएंगे, 100 प्रतिशत. हमें यही बताया गया है.”

रामलीला कमेटी ने अमित शाह के आने की पुष्टि नहीं की है.

अगर वह आते हैं, तो गृह मंत्री अपने ही कटआउट के पास से गुजरेंगे. इसके बाद वह मोदी के जीवन और करियर को दिखाने वाली दीवार, रेखा गुप्ता के कटआउट, ब्रिक्स इंस्टॉलेशन और प्रधानमंत्री के नाम पर बने कैफे के पास से भी गुजरेंगे. सबसे दाईं ओर, बाकी इंस्टॉलेशन से थोड़ा अलग, राम मंदिर बना हुआ है.

पीतमपुरा में श्री केशव रामलीला के मंच पर भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को दिखाने वाला इंस्टॉलेशन. फोटो: हिमांशी अग्रवाल | दिप्रिंट

 

share & View comments