चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने आर्म्ड फोर्सेज़ में चार साल काम करने के बाद घर लौटने वाले पूर्व अग्निवीरों के लिए नए नियम नोटिफाई किए हैं. बदले हुए नियमों के तहत उन्हें पुलिस कॉन्स्टेबल, फॉरेस्ट गार्ड और जेल वार्डर जैसी वर्दी वाली पोस्ट पर 20 परसेंट हॉरिजॉन्टल रिज़र्वेशन मिलेगा. इन नौकरियों के लिए उन्हें कोई एंट्रेंस एग्ज़ाम नहीं देना होगा.
राज्य के मानव संसाधन विभाग ने 16 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किए और अगले दिन इन्हें हरियाणा के मुख्य सचिव की वेबसाइट पर अपलोड किया. ये आदेश एक सितंबर 2026 से पिछली तारीख से लागू माने जाएंगे.
इस आरक्षण का लाभ केवल वही पूर्व अग्निवीर ले सकते हैं, जिनका मूल निवास हरियाणा में है.
गृह विभाग में पुलिस कांस्टेबल, इंडिया रिजर्व बटालियन (IRB) में कांस्टेबल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) में कांस्टेबल के पदों पर 20 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा.
इतना ही 20 प्रतिशत आरक्षण वन रक्षक, वन्यजीव रक्षक, खनन रक्षक, जेल विभाग में वार्डर और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में फायर ऑपरेटर-कम-ड्राइवर के पदों पर भी लागू होगा. अन्य ग्रुप सी पदों पर 5 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. खास कौशल से जुड़े ग्रुप बी पदों पर 1 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा.
20 प्रतिशत वर्दी वाली नौकरियों के आरक्षण में आदेश के तहत अलग-अलग वर्गों के लिए पद तय किए गए हैं. वंचित अनुसूचित जातियों और अन्य अनुसूचित जातियों को 2-2 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. पिछड़ा वर्ग-ए (BC-A) को 3 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग-बी (BC-B) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 2-2 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 9 प्रतिशत आरक्षण होगा.
ग्रुप सी के 5 प्रतिशत आरक्षण में अनुसूचित जातियों के लिए 1 प्रतिशत, BC-A और BC-B के लिए मिलाकर 1 प्रतिशत और अनारक्षित वर्ग तथा EWS के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण रखा गया है.
पूर्व अग्निवीरों को ग्रुप सी के पदों पर सीधी भर्ती के लिए सभी लिखित परीक्षाओं से छूट मिलेगी. आदेश में उन्हें शारीरिक जांच परीक्षा से भी छूट दी गई है. इसके अलावा, हाल ही में विज्ञापित वन्यजीव रक्षक, IRB कांस्टेबल, SDRF कांस्टेबल और फायर ऑपरेटर-कम-ड्राइवर के पदों के लिए शारीरिक माप परीक्षा से भी छूट दी गई है.
नौकरी में शामिल होने के बाद विभागों के नियमों के तहत सेवा की अन्य शर्तें उन पर भी लागू होंगी.
अगर किसी पद के लिए योग्य पूर्व अग्निवीर उपलब्ध नहीं होता है, तो वह पद संबंधित आरक्षण वर्ग के उम्मीदवार से भरा जाएगा. अग्निवीरों की नियुक्ति के कारण किसी वर्ग में जो कमी रह जाएगी, उसे भविष्य की भर्ती में उसी वर्ग के तहत पूरा किया जाएगा.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मीडिया समन्वयक अशोक छाबड़ा ने कहा कि इस नीति से हरियाणा के उन कई युवाओं को फायदा होगा, जो सशस्त्र बलों में चार साल सेवा करने के बाद घर लौटते हैं. उन्होंने कहा कि लिखित परीक्षा और शारीरिक जांच से छूट मिलने से सेना से नागरिक नौकरियों में आने की उनकी प्रक्रिया आसान होगी.
यह पत्र प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों, विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजा गया है. इसमें उनसे निर्देशों को ‘पूरी तरह और उनकी भावना के अनुरूप’ लागू करने को कहा गया है.
विभागों को अपने सेवा नियमों में तुरंत बदलाव करने के लिए कहा गया है, क्योंकि कैबिनेट की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है.
अग्निवीर वे युवा हैं, जिन्हें अग्निपथ योजना के तहत सेना, नौसेना और वायु सेना में भर्ती किया जाता है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 जून 2022 को इस योजना को मंजूरी दी थी. इसके तहत भर्ती होने वाले युवा प्रशिक्षण समेत चार साल तक सेवा करते हैं. इसके बाद इनमें से अधिकतम 25 प्रतिशत को नियमित सेवा में रखा जाना है. बाकी युवाओं को एकमुश्त आर्थिक पैकेज देकर सेवा से मुक्त कर दिया जाता है और उन्हें दूसरी जगह रोजगार तलाशना होता है.
इस योजना ने लंबे समय तक सेवा और पेंशन वाली पुरानी नियमित भर्ती व्यवस्था की जगह ली थी.
हरियाणा की भूमिका
हरियाणा लंबे समय से सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में जवान भेजने वाले राज्यों में शामिल रहा है. अधिकारियों ने मुख्यमंत्री सैनी को समीक्षा बैठक में बताया था कि राज्य से 2022-23 में 2,227 और 2023-24 में 2,893 युवा अग्निवीर के रूप में भर्ती हुए.
शुरुआत से ही अग्निपथ योजना का कड़ा विरोध हुआ और कई राज्यों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हुए. हरियाणा में सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए पहचाने जाने वाले गांवों के लोगों ने भी इस बदलाव का विरोध किया.
कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था. लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने महेंद्रगढ़ में कहा था कि अगर INDIA गठबंधन सत्ता में आया, तो अग्निपथ योजना को कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा. उसी साल बाद में हुए विधानसभा चुनाव के प्रचार में भी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा.
बीजेपी सरकार ने इस विरोध का असर कम करने के लिए कदम उठाए. जुलाई 2024 में, विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले, मुख्यमंत्री सैनी ने कांस्टेबल, खनन रक्षक, वन रक्षक और जेल वार्डर जैसे पदों पर अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी. उन्होंने नागरिक नौकरियों के ग्रुप सी पदों पर 5 प्रतिशत और ग्रुप बी पदों पर 1 प्रतिशत आरक्षण देने की भी घोषणा की थी.
उन्होंने उम्र में छूट देने का भी ऐलान किया था. अग्निवीरों के पहले बैच को पांच साल की छूट मिलनी थी. इसके अलावा, अपना कारोबार शुरू करने के इच्छुक अग्निवीरों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त कर्ज देने की घोषणा भी की गई थी.
इसके बाद बीजेपी ने फिर से राज्य में सरकार बनाई. बाद में सैनी ने कहा कि राज्य में पुलिस की नौकरियों में अग्निवीरों का आरक्षण बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाएगा. अक्टूबर 2026 का आदेश इसी वादे को लागू करने के लिए जारी किया गया है.
विपक्ष ने कहा-अग्निपथ योजना खत्म होनी चाहिए
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि अग्निपथ योजना की ही दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नई नीति से ज्यादा फायदा नहीं होगा.
राव ने सोमवार को फोन पर दिप्रिंट से कहा, “मैं दक्षिणी हरियाणा से आता हूं, जहां लगभग हर परिवार अपने बच्चों को सशस्त्र बलों में भेजता था. इनमें से ज्यादातर परिवार बहुत गरीब थे. युवा सालों तक अपनी शारीरिक फिटनेस पर मेहनत करके सेना में भर्ती हो सकते थे, लेकिन अब यह सब बंद हो गया है.”
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी बहुत ज्यादा होने के कारण हरियाणा में अपराध बढ़े हैं. उनके मुताबिक, सशस्त्र बलों और राज्य सरकार में नौकरियों के अवसर कम हो गए हैं.
रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी अग्निवीर के मुद्दे को 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में प्रमुखता से उठाया था. उन्होंने कहा कि यह योजना न तो सशस्त्र बलों के लिए अच्छी है और न ही लोगों के लिए.
हुड्डा ने सोमवार को फोन पर दिप्रिंट से कहा, “सशस्त्र बलों के कई सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी रिकॉर्ड पर कह चुके हैं कि अग्निवीर भर्ती योजना सेना के लिए नुकसानदायक है. लोगों ने भी इस नीति का विरोध किया है. पूर्व अग्निवीरों के लिए कोई नई नीति लाने के बजाय इसे तुरंत खत्म कर देना चाहिए.”
राज्य सरकार की नई नीति पर हुड्डा ने कहा कि सरकार के पास पहले से ही पूर्व सैनिकों के लिए एक नीति है. लेकिन, उनके मुताबिक, यह सभी जानते हैं कि वास्तव में कितने कम पूर्व सैनिकों को उसका फायदा मिलता है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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